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ओडिशा के बिष्नु भगत ‘चलता फिरता डस्टबिन’ बन कर फैला रहे हैं जागरूकता

तर्कसंगत

Image Credits: Inuth

December 22, 2018

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हम इसे बात को कितना भी नकारने की कोशिश करें, लेकिन समय के साथ प्लास्टिक हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गया है. हम प्लास्टिक के उपयोग के इतने आदी हो गए हैं कि हम इसकी खपत को कम करना भी नहीं चाहते हैं और न ही वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की कोशिश करते हैं. हालांकि, कुछ लोग समझते हैं कि अगर हम प्लास्टिक के लगातार उपयोग को नहीं रोकेंगे तो दुनिया को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, ऐसे ही लोगों में से 36 साल के एक व्यक्ति है, जो ओडिशा के मयूरभंज जिले के निवासी है, दूसरों को समझाने और जागरूकता फैलाने के लिए इन्होने ओडिशा की सड़कों पर पॉलिथीन के रूप में कपड़े पहनने और घूमने का फैसला किया है.

 

चलता फिरता डस्टबिन

अपने सिर पर एक कार्डबोर्ड  का मुकुट पहने और कंधे से पैर तक लटकती प्लास्टिक की बोतलें और थैले लिए घूमते, बिष्णु भगत, ओडिशा के “चलता फिरता डस्टबिन” (डस्टबिन चलना) हैं जो रोज सड़कों पर निकलते हैं. वह अपना मज़ाक उड़ाए जाने के बारे में परवाह नहीं करते हैं. वे कहते हैं, “अगर मैं आपको (लोगों को) बदसूरत दिखता  हूँ , तो पृथ्वी के बारे में सोचें कि हमने इसका क्या हाल किया है?” वास्तव में उनकी चिंताएं मार्मिक हैं. उनका उद्देश्य केवल लोगों को एक संदेश देना है, “भविष्य को बचाने के लिए, पॉलिथीन बैग का उपयोग न करें”.

एएनआई से बात करते हुए, भगत कहते हैं कि लोगों को खतरों वाले प्लास्टिक का उपयोग करना बंद कर देना चाहिए, वह लोगों से अपने दैनिक जीवन से प्लास्टिक को हटाने के लिए कहते हैं, चाहे वे इसे चाय की चुस्की के लिए इस्तेमाल कर रहे हों या शॉपिंग बैग के रूप में.

एशियन ऐज से बात करते हुए वे कहते हैं, “मैं लोगों को स्पष्ट संदेश देना चाहता हूँ  कि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है. मैं प्लास्टिक से बनी इस पोशाक को पहन रहा हूँ ताकि मैं भी बच्चों को भी इसके बारे में बता सकूँ.  मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ  कि पर्यावरण और पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा रखने के लिए प्लास्टिक और उसके उत्पादों का उपयोग न करें.

 

 

 

बच्चों को भी सीख देते हैं

भगत प्लास्टिक के उपयोग से बचने के लिए छोटे बच्चों को भी शिक्षित कर रहे हैं. दैनिक आधार पर, वह अपने जागरूकता अभियान के तहत आसपास के स्कूलों और कॉलेजों का दौरा करते हैं. वह छात्रों के साथ बातचीत करते हैं और उन्हें बढ़ते संकट के बारे में अधिक जागरूक बनाने की कोशिश करते हैं.

भगत की पहल के बारे में बात करते हुए, ओडिशा के एक स्थानीय स्कूल के एक स्कूल प्रिंसिपल कहते हैं, “हमारे बच्चों को उनकी ड्रेस की वजह से प्रदूषण के बारे में बात करना पसंद है. बच्चे भी इस बात को मानते हैं कि प्लास्टिक के उपयोग से पर्यावरण बिगड़ जाएगा और पर्यावरण में विषाक्तता बढ़ जाएगी”.

द एशियन एज के अनुसार भगत के काम को प्रभावशाली मानने वाले केवल शिक्षक नहीं हैं, यहाँ तक कि छात्र भी ‘वॉकिंग डस्टबिन मैन’ से क़ाफी प्रभावित हैं. छात्रों में से एक ने कहा कि उन्होंने भगत से बहुत कुछ सीखा है. छात्र का कहना है कि वह अब अपने दोस्तों और परिवार को भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए प्रोत्साहित करेगा.

इस बीच, मयूरभंज के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट विनीत भारद्वाज ने भी भगत के काम की सराहना की है. उन्होंने कहा, भरत का अनूठा कदम और प्रयास जिले में एक बड़े आंदोलन के रूप में परिणत हो सकता है, और हर कोई सामूहिक रूप से एक बेहतर भविष्य की दिशा में काम कर सकता है.

 

 

उनके प्रयास के पीछे की प्रेरणा

बारीपदा निवासी भगत ने एएनआई को बताया, यह एक त्रासदी है, जो भगत के दिमाग में अभी भी ताजा है जिसने उन्हें ‘डस्टबिन मैन’ बनने के लिए प्रेरित किया, वह बताते हैं कि उन्होनें एक बार देखा कि एक व्यक्ति ने उनके सामने भोजन से भरा एक प्लास्टिक का थैला फेंक दिया था. जैसे ही वह आदमी रवाना हुआ, वहाँ खड़ी एक गाय ने प्लास्टिक समेत वह खाना खा लिया, “कुछ दिनों बाद, गाय मरी पायी गई. इस घटना ने मुझे हिला दिया और मैंने पर्यावरण और जानवरों के लिए अपना काम करने का फैसला किया.

प्लास्टिक का खतरा एक बढ़ती हुई समस्या है, इस पर अंकुश लगाने के प्रयास में, इस साल अक्टूबर में ओडिशा सरकार ने राज्य के छह जिलों में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया था.

प्रतिबंध दिशानिर्देशों के अनुसार, प्लास्टिक को बेचना, स्टोर करना और निर्माण करना प्रतिबंधित है. जो राज्य अगले दो वर्षों में प्लास्टिक मुक्त होने का लक्ष्य बना रहे है, उन्होनें प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है और जो लोग इस आदेश का उल्लंघन करेंगे, उन्हें 5 साल की जेल की सजा के साथ 1 लाख का जुर्माना लगेगा.

 

तर्कसंगत का तर्क

कई रिपोर्टों के अनुसार, प्लास्टिक प्रदूषण मानव जाति के लिए बढ़ते खतरे में से एक है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में हर मिनट लगभग एक मिलियन प्लास्टिक पीने की बोतलें खरीदी जाती हैं. इसके अलावा, दुनिया भर में हर साल 5 ट्रिलियन सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब यह है कि दुनिया में बनाए गए लगभग आधे प्लास्टिक को एक बार के उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है.

यह सभी प्लास्टिक या तो लैंडफिल या समुद्र में फ़ेंक दिए जाते हैं. प्लास्टिक के कारण समुद्री जीवन भारी संकटग्रस्त स्थिति में है. प्लास्टिक प्रदूषण से मरने वाले जलीय जानवरों की रिपोर्ट दिन पर दिन बढ़ रही है. 2015 के एक अध्ययन में पाया गया कि 1960 के दशक के बाद से प्लास्टिक के मलबे में फंसने वाले जानवरों की संख्या लगभग 44,000 है. प्लास्टिक, जो छोटे टुकड़ों में बिखर जाता है, अक्सर छोटी मछलियों द्वारा खाया जाता है, जो अंततः हमारे पेट तक पहुँचता है, जो हमारे लिए कार्सिनोजेनिक है.

तर्कसंगत भगत के प्रयासों की बहुत सराहना करता है, यह भी महत्वपूर्ण है कि हम सभी उनसे प्रेरणा लें और प्लास्टिक की खपत रोककर पृथ्वी को बचाने की दिशा में काम करें.

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