पर्यावरण

‘वेक आवर लेक’ परियोजना को शुरू कर अपने गाँव को पानी के संकट से उबारा

तर्कसंगत

Image Credits: Wake Our Lake

December 23, 2018

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“जब भी मुझे बेंगलुरु में अपनी व्यस्त कॉर्पोरेट नौकरी से कुछ समय मिलता था, तो मैं घर चला जाता था. मेरा पैतृक गाँव, तमिलनाडु में कोल्ली मलाई की तलहटी में बसा हुआ है, जो मुख्य रूप से आदिवासी क्षेत्र है. लगभग तीन साल पहले, मैं कोल्ली हिल्स में एक छोटे से ट्रेक के लिए गया था. शिखर के ऊपर खड़े होकर, मैं चारों ओर की बंज़र जमीनों को देखकर हैरान रह गया, जो कभी मेरी आँखों के सामने हरा भरा हुआ करता था, उसकी दशा ठीक उसके विपरीत थी. मैंने देखा कि एक बूढ़ी औरत अपने कापंते पैरों से मीलों दूर पानी लेने जा रही थी. इससे मुझे गहरी पीड़ा हुई” यह कहना है ‘वेक आवर लेक’ के संस्थापक सरवनन का. वेक आवर लेक एक ऐसा संगठन है जिसने कोली हिल्स में जल संसाधनों को सक्रिय रूप से पुनर्जीवित किया है. तर्कसंगत से बात करते हुए, उन्होंने साझा किया कि कैसे उनके अथक प्रयासों ने जल निकायों का कायाकल्प किया और स्थानीय समुदायों को सूखे जैसी स्थिति से छुटकारा दिलाया. उनके काम से प्रेरित होकर, कोल्ली मलाई के किसान अब तालाबों और नहरों की खुदाई कर रहे हैं, और यह सब खुद से धन जुटा के कर रहे हैं.

 

 

पूरा क्षेत्र सूखाग्रस्त था

इस हालात से परेशान सरवनन ने पूरे क्षेत्र का एक विस्तृत सर्वेक्षण किया, ताकि पता लग सके कि इस परिवर्तन का कारण क्या है. उनके निष्कर्षों से पता चला कि क्षेत्र में भूजल स्तर में भारी गिरावट आई थी, जिससे 800-1000 फीट गहरे बोरवेल भी सूख गए थे. इस क्षेत्र की अधिकांश प्राकृतिक वनस्पतियाँ सूख चुकी थीं, जंगल ख़त्म हो रहे थे और फसलें खराब हो रही थीं. “ताड़ के पेड़ सबसे कम पानी का उपयोग करते हैं. जब मैंने कमजोर और मरते हुए ताड़ के पेड़ों को देखा, तो मुझे स्थिति की गंभीरता समझ में आ गई, ”उन्होंने कहा.

एक कृषि समुदाय के लिए सिंचाई या जल संरक्षण के आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए बहुत कम साधन थे. यहाँ तक कि पीने का पानी भी दुर्लभ होता जा रहा था.

 

 

क्षेत्र के स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार करने के उनके प्रयासों के कारण सरवनन लोगों के बीच एक जाना माना चेहरा थे,  उन्होंने इस मसले का स्थायी समाधान निकालने की अपनी जिम्मेदारी समझी.

बेंगलुरु  के ट्रैफिक में फंसे रहने के दौरान, सरवनन विशेषज्ञों, जल संरक्षण कार्यकर्ताओं और उत्साही स्वयंसेवकों के साथ बातचीत करते थे. सरवनन ने खुलासा किया कि “वन विभाग से अनुमति प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि वे हमारी दक्षता के बारे में आशंकित थे, और ग्रामीण भी यही सोच रखते थे”. हालाँकि, इन सब चीज़ों से उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा.

 

‘वेक आवर लेक’ द्वारा झील पुनर्जीवित करने की  परियोजनाएं

जल्द ही सरवनन ने एक चरण-दर-चरण योजना तैयार की और 2017 में वेक आवर लेक पहल की शुरुआत की, जो नरसिंम कडु गांव में थेंडरल झील परियोजना के साथ शुरू हुई. झील में पानी की एक बूंद भी नहीं थी और इनलेट चैनल की अनुपस्थिति में इसके व्यापक जलग्रहण क्षेत्र में कमी आई थी.

 

 

वह बताते हैं “मेरे पास इस झील से जुड़ी कई यादें हैं. मैं और मेरे दोस्त आसपास के आम के बगीचे में खेलते थे. वह सब अब ख़त्म हो चूका था, और मैंने उन सब यादों को फिर से संजोने का संकल्प लिया है.”

“वेक आवर लेक की टीम ने हाथों से झील से सटे पहाड़ों से 1 किमी लंबी नहर की खुदाई शुरू की, किसानों को संदेह हुआ, उनमें से केवल दस या बीस लोगों ने टीम को अपना समर्थन दिया, जब बारिश हुई, तो झील रातोंरात भर गई. किसान अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सकते थे, ”सरवनन बताते हैं.

 

 

वेक आवर लेक की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि पंजापट्टी झील का पुनर्जीवित होना है. एक तरह की फूल खरपतवार की अधिकता के कारण, पूरे जलग्रहण क्षेत्र और प्राकृतिक वनस्पति धीरे-धीरे सूख रहे थे. उन्होंने कहा, “हम ग्रामीणों में जागरूकता फैलाते हैं, और हर सप्ताहांत वे खुद से उन खरपतवार को साफ़ करने में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं” वे कहते हैं, “लेकिन हमारे कड़े प्रयास के बावज़ूद पौधे तेज़ी से बढ़ रहे थे और उसे साफ करने की हमारी गति उसके अनुरूप धीमी थी, फिर हमनें एक विशेष क्रॉलर मशीन तैनात की, जो  खरपतवार को उखाड़ कर को पुन: प्रयोज्य बायोमास में परिवर्तित करने वाली कंपनी तक पहुँचाया करती है.”

भूजल और वन आवरण

 

इसरो के सॉइल वैज्ञानिक डॉ. पी. वेलमुरुगन द्वारा निर्देशित, टीम ने भूजल बहाली की ओर अपने कदम काफी तेज़ी से बढ़ाये। पुन्नगई झील के साथ, उन्होंने वर्षा जल से गहरे गड्ढे को भरने का काम चालु किया, और साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से सभी कनेक्टिंग स्ट्रीम में चेक डैम और बंड का निर्माण किया भूजल स्तर को फिर से भरने के लिए वर्षा जल से गड्ढे भरने के उनके प्रयास ने उम्मीदों से कहीं बढ़ कर काम किया. उनकी सफलता ने पड़ोसी गाँव के ग्रामीणों को इसी तरह की परियोजनाओं को लागू करने के लिए प्रेरित किया.

सरवनन बताते हैं कि “स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों के बहुत से एनएसएस के लोगों ने इस परियोजना के लिए स्वेच्छा से और ईमानदारी से काम किया, हमने स्वयंसेवकों और शुभचिंतकों की किसी भी कमी का सामना नहीं किया, सभी ने हमारी परियोजना के लिए उदारता से दान दिया.”

वेक आवर लेक ने भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर अब बंजर भूमि में बीज-गोले लगाने और क्षेत्र में टीमिंग ग्रीन कवर को फिर से स्थापित किया है.

सरवनन ने अपने क्षेत्र में जल संरक्षण पर ध्यान देने के लिए सभी को प्रोत्साहित करने के लिए झील के कायाकल्प के लिए फ्लो चार्ट बना कर दिया है.

 

तर्कसंगत का तर्क

वर्तमान में भारत के कई हिस्सों में जल संकट एक समस्या है. जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है. वेक अवर लेक की इस उत्साही प्रयास की सराहना की जानी चाहिए. तर्कसंगत को उम्मीद है कि अधिक से अधिक युवा अपने झीलों और जल निकायों के संरक्षण में काम करने के लिए सरवनन का उदाहरण याद रखेंगे.

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