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दारुल उलूम : महिलाओं और पुरूषों का एक साथ खाना गैर इस्लामिक है, एनसीडब्ल्यू ने जवाब माँगा

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Image Credits: Bangladesh Today

December 24, 2018

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देवबंद स्थित इस्लामिक मदरसा ने फतवा जारी करते हुए कहा है कि महिलाओं और पुरुषों के एक साथ फंक्शन में खाना गैर इस्लामी है. 18 दिसंबर को जारी किए गए फतवे में यह भी कहा गया है कि खड़े रहते हुए भोजन करना मुस्लिम समाज के लिए हानिकारक है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देवबंद के एक निवासी की ओर से मदरसे की राय मांगने पर फतवा जारी किया गया था.

दारुल उलूम ने घोषणा की कि दोनों अधिनियम शरीयत के तहत निषिद्ध हैं. मदरसा के फतवा विंग दारुल इफ्ता द्वारा जारी किए गए फतवे में कहा गया है, “यह विवाह और अन्य कार्यक्रमों में पुरुषों और महिलाओं के एक साथ भोजन करना नाजायज और पाप है.” फतवे में यह भी कहा गया है कि “इस तरह की हरकतें (खड़े रहते हुए खाना) करना मुस्लिम समाज को बर्बाद कर देगा. मुसलमानों को इस तरह के कृत्य से बचना चाहिए.”

 

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने स्पष्टीकरण की मांग की है

कथित तौर पर, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने दारुल उलूम देवबंद के वाइस चांसलर अब्दुल कासिम नोमानी से फतवा जारी करने के लिए स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें कहा गया है कि महिलाओं और पुरुषों के एक साथ काम करने का तरीका गैर-इस्लामिक है.

एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कहा, “आयोग मामले पर गंभीरता से ध्यान देता है. यह अपमानजनक है, अस्वीकार्य है और एनसीडब्ल्यू इसकी निंदा करता है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, आपको इस मामले में लिखित जवाब या ई-मेल द्वारा आयोग को एक संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रदान करना आवश्यक है.

दारुल उलूम, जो इस्लामिक शिक्षा के लिए एशिया के सबसे प्रसिद्ध केंद्रों में से एक है, ने अक्सर ऐसे विवादास्पद फतवे जारी किए हैं.

 

पहले जारी किए गए फतवे

 

नवंबर 2018 में, मदरसा ने एक फतवा जारी करते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाएं नेल पॉलिश लगा कर नमाज अदा करती हैं, जो कि गैर इस्लामी है, क्यूँकि नेल पॉलिश लगे होने कारण से उनके हाथ पूरी तरह से साफ़ नहीं होते. जुलाई 2018 में, एक और फतवा जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि शेविंग और वैक्सिंग अच्छा नहीं माना जाता है, यह संस्कृति (खिलाफत ए अदब) के खिलाफ है.

फरवरी 2018 में, दारुल उलूम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं का उन दुकानों पर से चूड़ियाँ नहीं पहननी चाहिए जहाँ पुरुष इस इसे बेचते हों यह “गलत और बड़ा पाप” है.

अप्रैल 2018 में, दारुल उलूम ने कहा कि मुस्लिम विवाह, जहां संगीत और नृत्य शादी का हिस्सा हैं, गैरइस्लामी हैं और इसलिए, यह इस तरह के विवाह आयोजित नहीं करने चाहिए.

2017 में, मदरसा ने एक फतवा जारी किया जिसमें कहा गया था कि शरीयत के अनुसार, तस्वीर शूट करना गैर-इस्लामी है और इसलिए सीसीटीवी भी गैर-इस्लामी है.

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