पर्यावरण

केरल के मछुआरे समुद्र से मिले प्लास्टिक को रीसायकल कर रोड मरम्मत कर रहे हैं

तर्कसंगत

December 26, 2018

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समुद्र प्लास्टिक से भरा हुआ है. 2010 में, दुनिया भर के महासागरों में अनुमानित 8 मिलियन टन प्लास्टिक था. यह एक बढ़ती हुई चिंता है क्योंकि यह समुद्री जीवन के लिए एक गंभीर खतरा है. प्लास्टिक के कारण से मरने वाले समुद्री जीवों के चित्र हर रोज़ हमारे सामने आ रहे हैं.

केरल एक ऐसा राज्य है, जहाँ मछलीयों की खपत काफी ज़्यादा है. समुद्र में प्लास्टिक की मात्रा में वृद्धि के साथ, वो समय दूर नहीं है जब प्लास्टिक धीरे-धीरे मानव जाती के अंदर इन मछलियों के माध्यम से घर कर जायेगा. इस पर चिंता जताते हुए, 2017 में, सुचित्वा सागरम (स्वच्छ समुद्र) मिशन को केरल के मत्स्य मंत्री जे. मर्कुट्टी. अम्मा ने हरी झंडी दिखाई है.

यह एक ऐसी पहल है जो वादा करती है कि समुद्र में किसी भी प्लास्टिक सामग्री का निपटान नहीं किया जाएगा और समुद्र से सभी प्रकार के प्लास्टिक सामग्री को साफ किया जाएगा.

कोल्लम में नींदकारा बंदरगाह के किनारे बसे मछली पकड़ने वाले समुदाय ने तट के किनारे प्लास्टिक के कचरे को साफ़ करने की जिम्मेदारी ली है, और ये ज़िम्मेदारी उन्होने खुद से मामले की गंभीरता को देखते हुए ली है.

समुदाय के 28 लोग सीधे तट से प्लास्टिक को अलग करने की प्रक्रिया में शामिल है. पहले, वे प्लास्टिक के कचरे को यूँ ही छोड़ दिया करते थे, जो जाल में फँस जाता था और वो सारा कचरा दोबारा वापस समुद्र में चला जाता था. अब, वे उन प्लास्टिक पर अतिरिक्त ध्यान देते हैं जो जाल में फँस जाते हैं या जो उन्हें तट पर मिलते हैं.

 

जॉनसन प्रेमकुमार,जो इस पहल के तहत प्रोग्राम अफसर हैं संयुक्त राष्ट्र की एक वेबसाइट को बताया है कि “अब तक, 10 टन प्लास्टिक बैग और प्लास्टिक की बोतलें और समुद्र से 15 टन पुराने जाल, प्लास्टिक की रस्सी और समुद्र से अन्य प्लास्टिक की वस्तुओं को मछुआरों द्वारा हटा दिया गया है. भले ही यह एक छोटा समूह है, लेकिन उन्होंने समुद्र को 25 टन प्लास्टिक कचरे से मुक्त कर दिया है.

 

 

रीसाइक्लिंग

पहल का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि एकत्र किए गए पूरे प्लास्टिक को रीसायकल किया जाता है. कचरे को एकत्र करने के बाद, इसे एक श्रेडर के माध्यम से प्लास्टिक डालकर सड़क सरफेसिंग के लिए एक विशेष सामग्री में बदल दिया जाता है.

तर्कसंगत केरल सरकार की पहल की सराहना करता है. प्लास्टिक एक खतरनाक सामग्री है और गैर-बायोडिग्रेडेबल है. हम आशा करते हैं कि अन्य राज्य सरकारें इस पहल पर ध्यान दें, प्रेरित हों और ऐसी योजनाओं को अपनायें.

 

 

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