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पुणे की लड़की ने 159 दिन में साइकिल से पूरे विश्व का चक्कर लगाया, सबसे तेज़ एशियाई साइकिलिस्ट बनीं

तर्कसंगत

Image Credits: vedangikulkarni.com

December 26, 2018

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जो चीज़ आपको मार नहीं पाए वह निश्चित ही आपको मज़बूत बनाती है. यह पंक्तियाँ 20 वर्षीय वेदांगी कुलकर्णी के लिए सही बैठती है, जो दुनिया की सबसे तेज और सबसे कम उम्र की एशियाई साइकिलिस्ट बन गई हैं.

पुणे महाराष्ट्र के पास निगड़ी की रहने वालीं, वेदांगी, 20 दिसंबर रविवार की देर रात कोलकाता तक साइकिल चलाकर पहुँचीं और दुनिया भर में साइकिल चलाने के लिए आवश्यक 29,000 किलोमीटर की दूरी को पूरा किया.

लगभग पाँच महीने पहले, वेदांगी ने जुलाई में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से अपनी सफर शुरू की थी.  वह जल्द ही ऑस्ट्रेलियाई शहर वापस जाएँगी, जहाँ से उन्होनें अपनी यात्रा शुरू की, ताकि वह रिकॉर्ड पूरी कर सकें.

 

Posted by Vedangi Kulkarni on Saturday, 8 December 2018

 

उनकी कठिन और तकलीफदेह सफर

द स्क्रॉल के रिपोर्ट के अनुसार, अपने इस सफर के दौरान, 20 वर्ष की आयु की इस युवती ने 159 दिन में यह सफर ख़त्म किया, साथ ही हर दिन 300 किमी तक साइकिल चलाई. उन्होंने इन पाँच महीनों में 14 देशों की सफर तय की. उन्होनें कहा कि यात्रा में उन्होनें खुद का और दुनिया का सबसे अच्छा और ख़राब दोनों तरह का स्वाभाव देखा है.

इस साल की शुरुआत में, अक्टूबर में, स्कॉटिश हाइलैंड्स के 38 वर्षीय जेनी ग्राहम ने 124 दिनों में दुनिया में सबसे तेज साइकिल चलाने का रिकॉर्ड बनाया था. उनसे पहले, सबसे तेज़ रिकॉर्ड 144 दिनों का था, जो इतालवी साइकिल चालक पाओला जियोनोटी के पास था.

ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ बोर्नमाउथ की छात्रा, वेदांगी की शुरुआती योजना 100 दिनों में यात्रा पूरी करने की थी जिससे कि विश्व रिकॉर्ड को तोड़ा जा सकता था, हालाँकि, मानव और प्राकृतिक दोनों प्रतिकूलताओं ने वेदांगी की योजना विफल कर दी.

 

वेदांगी को कई जगहों पर वीजा हासिल करने में समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद यूरोप में मौसम ख़राब मिला. अपनी यात्रा के दौरान, उन पर आदमी और जानवर दोनों ने ही हमला किया. कनाडा में, उन्हें ग्रिज़ली भालू द्वारा पीछा किया गया था, और स्पेन में, उन्हें चाकू की नोंक पर लूट लिया गया था. रूस में, वह बर्फ में कई रातों तक अकेली चली थीं. माइनस 20 डिग्री सेल्सियस से 37 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान भी उनकी यात्रा में एक चुनौती थी.

 

1063km to go! The past few days have been overwhelming in every sense of that emotion. Just when I started telling…

Posted by Vedangi Kulkarni on Monday, 17 December 2018

 

माता-पिता ही उनकी ताकत थे

स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में डिग्री हासिल कर रही वेदांगी ने कहा कि उन्होंने लगभग दो साल पहले अपनी सफर की तैयारी शुरू कर दी थी. उनकी तैयारियों में लंबी साइकिल की यात्रा शामिल थी, यात्रा के मार्ग और समय की योजना बनाना और दौरे के लिए उपकरण प्राप्त करना. उन्होनें अपने लिए एक विशेष रूप की साइकिल भी बनवायी थी.

मजबूत और दृढ़ संकल्पित वेदांगी ने अपना 80 प्रतिशत मार्ग अकेले पूरा किया. सूनसान और निर्जन रास्तों पर उन्होंनें भारी सामान से लैस अपने साइकिल को ढोया जिसमें साइकिल के पुर्ज़े, कैंप के सामान, और कपड़े शामिल थे. उनके माता-पिता ने उनकी सफर के खर्च का बड़ा हिस्सा खुद दिया था.

जुलाई में, पर्थ से शुरू करते हुए, वेदांगी ऑस्ट्रेलिया भर में साइकल से सफर कर ब्रिस्बेन पहुँची. इसके बाद उन्होनें न्यूजीलैंड के वेलिंगटन के लिए उड़ान भरी और वहाँ भी उत्तर से दक्षिण तक साइकिल से सफर पूरी की.

अपनी इस कठिन सफर को पूरा करने का श्रेय, वेदांगी अपने माता-पिता को देती हैं, उनके अनुसार उनके माता-पिता उनके साथ एक स्तम्भ की तरह खड़े रहे. उन्होनें पीटीआई से बात की और कहा, “मेरे माता-पिता ने मुझे पूरा प्रोत्साहन दिया साथ ही मानसिक बल भी दिया, उनके लिए हमेशा फोन के दूसरे छोर पर मौज़ूद थे, भले ही माता-पिता की प्रवृत्ति ने उन्हें ऐसा करने से मन किया हो मगर उन्होनें मेरा पूरा साथ दिया”.

उनके पिता विवेक कुलकर्णी ने कहा, “यह उनके सपने को पूरा करने के लिए उनका समर्पण और इच्छाशक्ति है जिसने उनकी सफलता सुनिश्चित की, और मुझे यकीन है कि अभी और भी बहुत सारे कारनामें आने बाकी है.”

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