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शादी पर अत्यधिक खर्च रोकने के लिए 30 साल में 10 बिल, पारित एक भी नहीं

तर्कसंगत

December 28, 2018

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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने मुकेश अंबानी के द्वारा अपनी बेटी की शादी में भव्य रूप से पैसे खर्च करने के लिए आलोचना की है. इस शादी के बाद विवाह में होने वाले फालतू और असीमित खर्च पर बहस फिर से तेज हो गई. संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में, संसद में दस (10) विभिन्न निजी सदस्य बिल पेश किए गए हैं जो फालतू के खर्चों पर रोक लगाना चाहते हैं. उनमें से कोई भी सफल (संसद द्वारा पारित) नहीं हुआ है.

इस मुद्दे से जुड़ा एक बिल 2017 में लोकसभा में भाजपा के गोपाल चिन्यालीस शेट्टी द्वारा पेश किया गया था, जो महाराष्ट्र से सांसद थे. उन्होंने प्रिवेंशन ऑफ एक्सट्रावेगन्स एंड अनलिमिटेड एक्सपेंडिचर मैरिज बिल’ की शुरुआत की, जो शादी के दौरान किये जाने वाले खर्च को सिमित करने का प्रयास करता है. दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने द मैरिजेज (कम्पलसरी रजिस्ट्रेशन एंड प्रिवेंशन ऑफ वेस्टफुल एक्सपेंडिचर) बिल, 2016 में पेश किया जो विवाह के लिए फालतू और फिजूल खर्ची पर रोक लगाने और सादगी से शादी कराने का प्रयास करता है. वास्तव में देखा जाये तो, रणजीत रंजन द्वारा बिल जो पेश किया गया वह 2011 में राज्यसभा में अखिलेश दास गुप्ता द्वारा पेश किए गए बिल की तरह ही है.

 

इस तरह के बिल का इतिहास

पिछले 30 वर्षों में संसद में कुल दस (10) ऐसे बिल पेश किए गए थे. इनमें से पांच विधेयक लोकसभा में और शेष पांच राज्यसभा में पेश किए गए थे. इन तीनों को छोड़कर बाकी सभी बिल लैप्स हो गए हैं. तीनों को अभी भी लोकसभा की वेबसाइट पर पेंडिंग दिखाई दे रहे हैं.

 

ऐसे बिल की ज़रूरत क्या है ?

इन बिलों में से पांच बिल आप संसद की वेबसाइट पर देख सकते हैं. ये सभी विधेयक विवाहों में बढ़ती अपव्यय के बारे में बात करते हैं और यह अमीरों द्वारा धन का फ़िज़ूल प्रदर्शन बन गया है. कुछ कारण इस बिल के  “स्टेटमेंट ऑफ़ ऑब्जेक्ट एंड रीज़न’ में दिए गए हैं जो इस प्रकार हैं:-

 

1. लाखों रुपये शमीनाओं और सजावट पर खर्च किए जाते हैं, इसके बाद शानदार दावतें दी जाती हैं. इन सभी चीजों के अलावा, पर्याप्त नकदी और महंगे उपहारों का आदान-प्रदान भी किया जाता है.

2. लोग इन अवसरों का उपयोग अपने काले धन को खर्च करने के लिए करते हैं।

3. लड़के के  माता-पिता कभी-कभी अपने बेटों की शादी के माध्यम से जितना संभव हो लड़की वालों से उतना पैसा ऐंठने की कोशिश करते हैं.

4. यहां तक ​​कि निमंत्रण कार्ड, जो बहुत सरल और सार्थक हुआ करते थे, अब आपके स्टेटस का एक साधन बन गए हैं, जिसके द्वारा हम एक दूसर को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं.

5. लोगों ने विवाह और रिसेप्शन में शामिल होने वाले मेहमानों को महंगे उपहार और मिठाइयां बांटने की प्रथा शुरू की है और यहां तक ​​कि निमंत्रण कार्ड देते समय भी उपहार दिए जाते हैं.

6. विवाहों में इस तरह की बढ़ती अपव्ययता का प्रभाव निम्न-मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों पर जाता है, जो बिना पैसे के या अक्सर अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई को बिना सोचे-समझे अमीर शादियों के बराबर दिखाने के          लिए खर्च करते हैं और बाद में खुद को गंभीर कर्ज के जाल में पाते हैं.

7. विवाहों पर इस तरह का अनियंत्रित खर्च हमारे समाज को कमज़ोर बनाता है और दहेज, फिजूल खर्ची की प्रथा को बढ़ावा देता है.

8. मीडिया ऐसे भव्य विवाह के लिए पेज तीन में व्यापक प्रचार करता है.

9.  बड़े पैमाने पर खाद्य पदार्थों की बर्बादी होती है, एक विवाह में जितनी खानों की बर्बादी होती है उनसे कई गरीब लोगों के पेट भरे जा सकते हैं.

राज्यसभा में यह बिल पेश करने वाले अखिलेश दास गुप्ता ने यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तान में मेहमानों को केवल चार व्यंजन परोसे जा सकते हैं और व्यंजनों की बर्बादी को विवाह में आपराधिक अपव्यय माना जाता है.

 

 

इस बिल में क्या कहा गया है?

इन सारे बिल में से केवल 5 बिल के टेक्स्ट उपलब्ध हैं. इनमें से तीन बिल विवाह के खर्च पर कोई स्पष्ट सीमा नहीं बताते हैं, इसके बजाय, वे प्रस्ताव करते हैं कि सरकार उन मेहमानों और रिश्तेदारों की संख्या पर सीमा तय करती है जिन्हें शादी या रिसेप्शन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है, इन विधेयकों के अनुसार, सरकार को विवाह पर होने वाले खर्च की सीमा भी तय करनी चाहिए.

 

 

खर्च को सिमित करने की मांग

संसद में अखिलेश दास गुप्ता द्वारा पेश किया गया बिल,खर्च की सिमा निर्धारित करने की मांग करता है. विधेयक में परिवार की वार्षिक का 25% या  5 लाख (दोनों में जो भी कम हो) की ऊपरी सीमा निर्धारित है. विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि जो भी इस सीमा से अधिक खर्च करना चाहते हैं. उन्हें ऐसी राशि का 10% सरकारी कल्याण कोष में योगदान करना होगा, जो बीपीएल परिवारों को उनकी बेटियों की शादी में सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

 

इस विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि सरकार समारोह के दौरान मेहमानों की संख्या और व्यंजनों की संख्या पर सीमा तय करे.

 

दोषी को सजा दी जाए

इस विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि दोषियों को एक साधारण कारावास की सजा दी जा सकती है, जो 3 साल तक बढ़ सकती है और जुर्माना के साथ 5 लाख रूपये तक जा सकती है.

 

चूंकि निजी सदस्यों के बिल शायद ही कभी सफल होते हैं, इन दस बिलों का भी यही हश्र हुआ है, एक बहस को फिर से शुरू करने के अलावा, ये बिल किसी अन्य तरीके से मदद नहीं कर पाए हैं.

PS: 2005 में लोकसभा में इन विधेयकों में से एक को पेश करने वाले टीडीपी के सांसद रेपती संबाशिवा राव ने 2016 में अपनी 50 वीं मैरिज एनिवर्सरी को बड़े ही शानदार अंदाज में मनाया. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी गेस्ट लिस्ट में थे.

 

फैक्टली के अनुमती से प्रकशित 

 

 

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