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रिपोर्ट: यूपी, बिहार के सरकारी स्कूल में 4.2 लाख शिक्षकों के पद खाली

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Image Credits: The Indian Express

December 28, 2018

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बिहार और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पहले से ही जर्जर है और समय के साथ ये और भी बिगड़ती जा रही है. इन विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या जितनी होनी चाहिए उससे भी कम है. एक अध्ययन के अनुसार जिसमें छह राज्य शामिल हैं, प्राथमिक विद्यालयों में पांच लाख से अधिक शिक्षकों की कमी है, उसमें आगे कहा गया है कि 14 प्रतिशत सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में छह शिक्षक भी नहीं हैं, जो कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की न्यूनतम आवश्यक संख्या है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सेंटर फॉर बजट एंड गवर्नेंस अकाउंटेबिलिटी (CBGA), और चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार छह राज्यों- बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में , शिक्षकों का अकाल पड़ा है.

बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य में रिक्त शिक्षक पदों की संख्या में शीर्ष पर हैं. छह राज्यों में से, बिहार और उत्तर प्रदेश में कुल मिलाकर लगभग 4.2 लाख पद खाली हैं. अध्ययन में आगे कहा गया है कि बिहार में प्राथमिक और माध्यमिक दोनों स्तरों पर अप्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या सबसे अधिक है, इसके बाद पश्चिम बंगाल में अप्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या सबसे अधिक है.

बिहार में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर 38.7 प्रतिशत पेशेवर अयोग्य शिक्षक हैं, इसमें 35.1 प्रतिशत अप्रशिक्षित शिक्षक हैं. दूसरी सूची में पश्चिम बंगाल है जो प्राथमिक स्तर पर 31.4 प्रतिशत की कमी और माध्यमिक स्तर पर 23.9 प्रतिशत है.

दूसरी ओर, तमिलनाडु और महाराष्ट्र मानदंडों में काफी बेहतर हैं, क्योंकि दोनों ही राज्यों ने प्राथमिक स्तर के लगभग 95 प्रतिशत पदों पर भर्तियां की हैं.

 

स्कूलों की बजट में इज़ाफ़ा उनके स्थिति से मेल नहीं खाती

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 14 वें वित्त आयोग की अवधि के तहत राज्यों के लिए स्कूली शिक्षा के लिए धन में वृद्धि के बाद भी, स्कूल की स्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. यह बताता है कि उनके स्कूली शिक्षा खर्च की संरचना को बदलने के लिए बजट का पूरा उपयोग नहीं किया गया है.

यह भी कहा गया है कि इन राज्यों में शिक्षा क्षेत्रों के लिए बजट के अनुचित उपयोग के कारण संसाधनों के आवंटन में कमी है.

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