सप्रेक

मेघालय: एक स्कूल को नया बनाने के लिए, इस आईएएस अधिकारी ने अपने दो महीने के वेतन का दान किया

तर्कसंगत

Image Credits: Genie Speaks

December 28, 2018

SHARES

मेघालय के सुदूर गारो हिल्स जिले में, बच्चों के लिए शिक्षा ग्रहण करना काफी दूर की बात थी, स्कूलों का रख रखाव नहीं था और कक्षाएँ खस्ताहाल थीं. शायद ही कभी कोई छात्र और शिक्षक मुश्किल से कक्षा में दीखते हों. यह सब कुछ वहां की शिक्षा प्रणाली की उदास तस्वीर झलकाती है.

लेकिन स्वप्निल ताम्बे के लिए जो कि एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी,और दादेनग्रे सिविल उपखंड के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) के रूप में सेवारत थे, स्कूलों को उस तरह बदरंग हालत में छोड़ना सही नहीं था, वह इस निराशा भरी तस्वीर को एक नई रंगीन तस्वीर में बदलना चाहते थे.

IIT खड़गपुर के छात्र, स्वप्निल के लिए शिक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं था. सचिवालय में अपने समय के दौरान, वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) का हिस्सा थे. शिक्षा नीति की बारीकियों को सीखना स्वप्निल के लिए काफी अच्छा अनुभव था. उन्होंने यह देखने के लिए राजस्थान का दौरा किया कि उनकी शिक्षा प्रणाली में कितनी तेजी से सुधार हो रहा है.

 

अनुमंडल में विद्यालयों की स्थिति

स्वप्निल तर्कसंगत से बात करते हुए बताते हैं कि “दादेनग्रे में एक एसडीओ के रूप में, मुझे सबसे ज्यादा दिलचस्पी सरकारी स्कूलों को देखने की थी. शिक्षा हमेशा मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है, और जब मैंने स्कूलों की स्थिति देखी, तो मैं उदास हो गया. उनकी हालत काफी ख़राब थी, दीवार पर कोई पेंट नहीं था और पूरी की पूरी स्कूल बेरंग थी, कोई भी शिक्षक पढ़ाने नहीं आता था और शायद ही कोई छात्र वहां पढ़ाई के इरादे से आता हो. छात्र सिर्फ सप्लीमेंटरी न्यूट्रिशन खाने हर सुबह आया करते थे.”

 

 

जिले के लगभग सभी स्कूलों में दो से तीन शिक्षक थे, लगभग 30-40 छात्र और दो से तीन कक्षाएँ थीं. भवन और कक्षाएँ इतनी भयानक स्थिति में थीं कि पढ़ाई का वातावरण बनाना कठिन था. जगह की कमी और शिक्षकों के कारण, सभी कक्षाओं के छात्रों को एक ही कक्षा के अंदर बैठना पड़ता था.

“मैंने इस समस्या के बारे में कुछ करने का मन बना लिया था क्योंकि कोई व्यक्ति या कोई भी स्थान वास्तव में शिक्षा के बिना आगे नहीं बढ़ सकता. जब तक हम उपखंड में स्कूलों का दौरा ख़त्म करते, तब तक हमने एक मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र बनाने की एक प्लानिंग पूरी कर ली थी.

 

मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र

उस एक जगह पर सैकड़ों आंगनवाड़ी केंद्रों थे, उन सभी को मॉडल केंद्रों में अपग्रेड करना संभव नहीं था. इसलिए स्वप्निल ने एक स्कूल को आवश्यक संसाधनों के साथ एक मॉडल केंद्र में बदलने का फैसला किया और स्थानीय लोगों और बच्चों की प्रतिक्रिया अच्छी मिलने पर बाकी के स्कूलों को भी अपग्रेड करने का फैसला किया.

“दिलसिग्रे आंगनवाड़ी केंद्र को हमने इसलिए चुना क्यूँकि वह हमारे मुख्यालय के करीब था और निगरानी करना आसान था. अन्य स्कूलों में हमारे नियमित दौरे के साथ, शिक्षक कक्षाओं में आने लगे और स्थिति में सुधार होने लगा.”

मिलाप.ऑर्ग पर स्वप्निल द्वारा शुरू किए गए एक क्राउडफंडिंग अभियान को बहुत अधिक सफलता नहीं मिली. बाद में, कुछ सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोगों को यह बताने के लिए बैठकें आयोजित की गईं कि उनकी यह पहल कितनी महत्वपूर्ण थी. मेघालय के बाहर के कुछ लोगों सहित, स्थानीय लोग भी जितना योगदान कर सकते थे उन्होनें योगदान किया. जल्द ही, दिलसिग्रे आंगनवाड़ी केंद्र उनके मनमुताबिक बन गया. ईमारत की मरम्मत की गई और उन पर पेंटिंग्स बनायीं गयीं. बच्चो के लिए खिलौने, किताबें और कहानी की किताबें, कुशन, कालीन, पानी फिल्टर, खाना रखने के लिए कंटेनर और कई अन्य चीजों की व्यवस्था की गई थी.

 

 

“उद्घाटन के दिन, पूरा गाँव मौजूद था. वह काफी ख़ुशी का क्षण था. हमने बाद बाकि स्कूल के लिए भी यही करने का मन बना लिया था उसी वक़्त ‘अडॉप्ट ए  स्कूल’ का आईडिया आया था”.

 

प्रोजेक्ट स्टार

उनके उपायुक्त श्री राम सिंह, आईएएस के मार्गदर्शन में, टीम ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए प्रोजेक्ट स्टार (ऑगमेंटिंग रिसोर्स द्वारा ऑगमेंटिंग रिसोर्स) का संचालन शुरू किया. परियोजना के हिस्से के रूप में, उन्होनें सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार करने का निर्णय लिया. उन्होनें क्राउडफंडिंग और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की मदद से भी पैसे इकठ्ठा किया.

“प्रोजेक्ट स्टार के तहत, हमने एक पुस्तकालय भी बनाया है जहाँ कई लोगों ने किताबें दान की हैं. बच्चे ऐसे माहौल में पले-बढ़े हैं, जहाँ उन्होंने शायद ही पढ़ना सीखा हो. कुछ छात्र इन दिनों पुस्तकालय में आ रहे हैं, और यह देखना अच्छा है कि चीजें कैसे बदल रही हैं. मुझे यकीन है कि समय के साथ, अधिक बच्चे पढ़ने आएंगे. हमने करियर काउंसलिंग भी शुरू की, जहाँ विभिन्न पेशों के लोग आएंगे और अपनी यात्रा के बारे में बताएंगे कि वे आज इस मुकाम तक कैसे पहुंचे? ”स्वप्निल ने कहा.

इस समय के दौरान, उन्हें पता चला कि उनके माननीय मुख्यमंत्री श्री कोनराड के संगमा ने नोंगस्टोइन में एक स्कूल के नवीकरण के लिए अपना वेतन दान किया है.

“उनके इस काम ने मुझे इतना प्रेरित किया कि मैंने अपने दो महीने के वेतन को एक स्कूल के नवीकरण के लिए दान कर दिया. दिवाली के दौरान, स्कूलों के नवीनीकरण के लिए मेरे द्वारा एक ऑनलाइन क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया गया था. कई लोगों की मदद और योगदान के साथ, मैंने जिस स्कूल के लिए अपना वेतन सुंदर और बढ़िया दिखने के लिए दान दिया था, वह परियोजना सफल रही” उन्होंने कहा. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और ऐसे सैकड़ों स्कूलों का नवीनीकरण करना होगा. “शिक्षा हर चीज का हल है. यदि आप पढ़े-लिखे हैं और आपके पास नौकरी है और अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम हैं, तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको रोक सके.

 

तर्कसंगत स्वप्निल ताम्बे को उनके दृढ़ प्रयास और बदलाव लाने के संकल्प के लिए सलाम करता है, और उन्हें आगे की परियोजनाओं के लिए शुभकामनाएं देता है.

 

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...