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ट्राई का नया आदेश: हर घर का अपना अलग चैनल पैकेज होगा और केवल उसी के पैसे देने होंगे

Kumar Vibhanshu

December 28, 2018

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने स्पष्ट किया है कि नए आदेश के लागू होने पर मौजूदा सब्सक्राइब्ड टीवी चैनलों पर कोई रोक नहीं लगेगी. ट्राई ने मार्च 2017 में ब्रॉडकास्टिंग और केबल सेवाओं के लिए नए नियामक ढांचे को अधिसूचित किया था, और इसको लागू करने के लिए 3 जुलाई, 2018 को एक अलग से अधिसूचना ज़ारी की गयी, लाइव मिंट की ख़बर के अनुसार.
जब से नए नियम के लागू होने की तारीख तय हुई है, अधिकारियों ने यह देखा है की मीडिया में इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं कि 29 दिसंबर से केबल सुविधाएं बंद हो जाएगी. जबकि 26 दिसंबर को ही ट्राई ने आश्वासन दिया कि मौजूदा सब्सक्राइब्ड चैनलों में कोई व्यवधान नहीं होगा.

“अथॉरिटी ने इस मामले को ध्यान में रखता है इसके साथ ही सलाह देता है कि सभी ब्रॉडकास्टर / डीपीओ (वितरण प्लेटफॉर्म ऑपरेटर) / एलसीओ (स्थानीय केबल ऑपरेटर) यह सुनिश्चित करें कि कोई भी उपभोक्ता जो आज जितने चैनल देख रहे हैं, वह 29 दिसंबर को बंद न हो.”ट्राई ने कहा.

 

एक नया ढाँचा क्यों?

नए आदेश का उद्देश्य ग्राहकों को कम कीमत में सभी सब्सक्राइब चैनल उपलब्ध कराना है. यह उपभोक्ताओं को तय करने की भी अनुमति देता है कि वे किन चैनलों को देखना चाहते हैं और उन्हें केवल उन चैनलों के लिए ही पैसे देने होंगे जो वह देखते हैं या देखना चाहते हैं. पहले प्रसारणकर्ता और वितरण मंच संचालक (डीपीओ) जैसे केबल और डीटीएच ऑपरेटर कुछ चैनल मुफ्त में दिखाया करते थे. लेकिन अब, प्रसारकों को चैनल दरों को प्रकाशित करना होगा और साथ ही  केबल ऑपरेटरों और डीटीएच सेवा ऑपरेटर ग्राहकों को सभी चैनल दिखाने का ऑफर दे सकते हैं लेकिन अधिकतम 19 रूपये प्रति चैनल के शुल्क पर. नए आदेश के साथ, उपभोक्ताओं को 100 फ्री-टू-एयर चैनलों (एसडी) के लिए न्यूनतम रुपये 130 रूपये देने होंगे.

साथ ही, उपभोक्ता केवल 20 रुपये अधिक देकर 25 और एसडी चैनल देख सकते हैं. उपभोक्ता अब पूरे पैकेज के लिए पैसे दिए बिना अपने पसंदीदा चैनलों का आनंद ले सकते हैं. ट्राई के नए आदेश के अनुसार, ब्रॉडकास्टर्स पेड चैनलों के साथ मुफ्त चैनलों को बंडल नहीं कर सकते हैं और न ही वे एसडी के साथ हाई डेफिनिशन चैनलों को मिला सकते हैं.

ब्लूमबर्ग क्विंट से बात करते हुए पुनीत मिश्रा,चीफ एक्सक्यूटिव अफसर, डोमेस्टिक ब्राडकास्टिंग बिज़नेस ज़ी इंटेर्टेन्मेंट, ने कहा कि “संक्षेप में, कहें तो हर घर का अपना एक अलग चैनल पैकेज होगा, जिसे वे अपने हिसाब से बना सकते हैं.”

नए टैरिफ में यह भी कहा गया है कि हर चैनल को इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड का उपयोग करके टीवी स्क्रीन पर अपने एमआरपी को प्रदर्शित करना होगा और यह ब्रॉडकास्टर्स और वितरकों को चैनल पैकेज प्रदान करने की भी अनुमति देता है, लेकिन कीमतों को पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है और इसे टीवी स्क्रीन पर प्रदर्शित करना पड़ेगा.

 

क्या आपको अपनी जेब ढीली करने की जरूरत है?

नए नियमों के तहत, उपभोक्ताओं को 100 चैनलों के लिए नेटवर्क कैपेसिटी फ़ी के रूप में अधिकतम 130 रुपये देने होंगे, जिसमें प्रसार भारती के 24 अनिवार्य चैनल शामिल होंगे. इसके साथ ही सब्सक्राइबर अपनी पसंद के अनुसार फ्री-टू-एयर चैनल या पे चैनल का विकल्प चुन सकते हैं. पे चैनलों के लिए, केवल चैनलों के लिए कीमतों को अलग से भुगतान करने की आवश्यकता है और अतिरिक्त कुछ भी नहीं. यदि ग्राहक 100 से अधिक चैनलों देखना चाहता है, तो अतिरिक्त नेटवर्क कैपेसिटी फी लिया जाएगा जो 25 चैनलों के लिए 20 रुपये है.

वर्तमान में, उपभोक्ता एक पैकेज के लिए पैसे देते हैं और वे उसमें उन चैनलों के लिए भी पैसे भरते हैं, जिन्हें वे देखना भी नहीं चाहते हैं या देखते भी नहीं हैं. लेकिन नए आदेश के साथ, उपभोक्ता पैसे बचा सकते हैं क्योंकि उन्हें केवल उन चैनलों के लिए भुगतान करने की आवश्यकता होती है, जिनकी वे सब्सक्रिप्शन लेते हैं देखने के लिए.

 

कुछ डीपीओ नए टैरिफ से खुश नहीं हैं

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, जबकि कई मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) और कुछ डीटीएच ऑपरेटर नए आदेश के साथ खुश हैं, कुछ थोड़ी और समय की माँग कर रहे हैं. लेकिन, ट्राई के चेयरमैन ने समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है.

“ग्राहकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए, और बिना रुकावट के चलने वाली व्यवस्था बनाए के लिए, प्राधिकरण सभी मौजूदा ग्राहकों के लिए एक विस्तृत माइग्रेशन प्लान बना रही है। माइग्रेशन प्लान प्रत्येक ग्राहक को अपने हिसाब से पैक बनाने का मौक्ला देगी.” ट्राई ने कहा.

 

 

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