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तमिलनाडु: पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए, यह डॉक्टर अपने मरीजों के लिए जैविक फसलें उगाते हैं

तर्कसंगत

December 31, 2018

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तमिलनाडु के थंजावुर जिले के पेरुवुरानी तालुक में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में चिकित्सा अधिकारी डॉ.वी.सौंदराजन किसानों के परिवार से हैं. एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी 28 वर्षों की सेवा के दौरान, उन्होंने मातृ और शिशु मृत्यु के बारे में बहुत कुछ सीखा, उनका मानना है कि इसका मुख्य कारण एनीमिया है. आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन युक्त भोजन की कमी के कारण एनीमिया होता है और बहुत सारी गर्भवती महिलाएं इससे अनजान होती हैं.

सौंदराजन का उद्देश्य इस मुद्दे के बारे में जागरूकता पैदा करना था और लोगों को यह बताने का प्रयास करना था कि एनीमिया से होने वाली महिलाओं की मृत्यु को रोका जा सकता है.

 

गर्भवती महिलाओं की मदद के लिए सौंदराजन का प्रयास

हर मंगलवार, लगभग 50 गर्भवती महिलाएँ चेक-अप के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आती हैं, और जो पीएचसी नहीं आ पाती हैं, वे नियमित रूप से डोर-टू-डोर चेक-अप प्राप्त करती हैं. मंगलवार को जो चेक-अप के लिए महिलाएं आती हैं उन्हें कैल्शियम, प्रोटीन और खनिजों से भरपूर भोजन तैयार कर के दिया जाता है.

“हम अक्सर माताओं को अपने जैविक उद्यान में लाते हैं और उन्हें यह बताने का प्रयास करते हैं कि वे कम लागत पर घर पर इन फसलों को कैसे उगा सकती हैं. हमारा यह प्रयास उनको समझाने का है कि गर्भावस्था के दौरान पोषण कितना महत्वपूर्ण है ” सौंदराजन ने तर्कसंगत के साथ बातचीत में कहा.

अपने जैविक उद्यान में, वह गायों और मुर्गियों को दूध और अंडे के लिए पालते हैं, जो पोषण के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. और उनसे प्राप्त दूध और अंडों को महिलाओं के बीच वितरित किया जाता है.

 

 

“इसके अलावा, कई महिलाएं हैं जो मेरे पास नहीं आ सकती हैं क्योंकि उन्हें रोज़ाना काम पर जाना पड़ता है, और पैसे की कमी के कारण भी. हम पिछले तीन महीनों से इन महिलाओं के घर जा रहे हैं और उन्हें बिना कुछ शुल्क लिए दूध, अंडे, गुड़ और हरी पत्तेदार सब्जियां प्रदान कर रहे हैं. दूध और गुड़ में आयरन होता है और एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं.

एनीमिया को रोकने के अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक भोजन शिशु की मृत्यु दर को भी रोकता है. सौंदराजन के ऑर्गेनिक गार्डन में, पालक, लाल ऐमारैंथ, स्टेम ऐमारैंथ, इंडियन पेनीवॉर्ट, धनिया, पुदीना, सहजन की पत्तियां, बैंगन, कद्दू, लौकी, करेला, भिंडी और खीरे जैसी सब्जियां उगाई जाती हैं. वे प्रति सप्ताह 50 महिलाओं को यह सब कुछ बाँटते हैं, प्रति माह 200 महिलाएं और अगस्त 2017 से, उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा केंद्रों के कर्मचारियों की मदद से 3,400 महिलाओं की मदद की है.

 सौंदराजन की भविष्य की योजना

जब उनसे उनकी भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “मैं दिल का दौरा, स्ट्रोक, मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों को कम करने की पूरी कोशिश करूँगा. हमारे द्वारा बनाए गए वॉकिंग ट्रैक को जल्द ही बेहतर बनाया जाएगा.” बच्चों में मोटापे के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, उन्होंने बच्चों को यह एहसास दिलाने के लिए एक पार्क का निर्माण किया है साथ ही यह बताने का भी प्रयास किया है कि मधुमेह की रोकथाम की जा सकती है.

“मेरा मानना है कि सभी पीएचसी को जैविक उद्यान बनाने के लिए संसाधन मिलने चाहिए, और गायों और मुर्गियों को पालना चाहिए ताकि अधिक से अधिक महिलाएं पोषण से लाभान्वित हो सकें. सरकार को पीएचसी के लिए धन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. गर्भवती महिलाओं को सब्सिडी प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे अपने घर में एक जैविक उद्यान बना सकें.

 

 

एएनसी (एंटे नेटल केयर) माताओं के लिए, उन्होंने 2006 से भोजन उपलब्ध कराया है. उसी वर्ष से, सरकार द्वारा तमिलनाडु सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य एएनसी आहार कार्यक्रम नाम से एक योजना के रूप में इसका पालन किया गया है.

“मुझे लगता है कि हमारी पहल के बारे में सबसे अच्छा बात यह है कि हमारे स्वास्थ्य सेवा केंद्र में, हम एक निजी अस्पताल की तरह ही मरीजों का इलाज करते हैं ” सभी उपकरण न केवल सरकार द्वारा प्रदान किए गए हैं, बल्कि कई स्थानीय लोगों द्वारा भी प्रदान किए गए हैं.”

तर्कसंगत डॉ.वी. सौंदराजन की सराहना करता है. उन्होंने जरूरतमंदों की मदद करने के अलग तरह का और कारगर प्रयास किया है और उम्मीद करते हैं कि सरकार की तरफ से उनकी सहायता की जाएगी और उनके इस तरीके को देश की बाकी जगहों पर भी लागू किया जायेगा.

 

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