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व्हीलचेयर पर होने के बावजूद, इस पैरा स्विमर ने कई विश्व रिकॉर्ड तोड़े हैं

तर्कसंगत

January 2, 2019

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लगभग आठ साल पहले, मुंबई की विशाल बस्ती धारावी में रहने वाले मोहम्मद शम्स आलम शेख का एक ही लक्ष्य था – कराटे चैंपियन बनना. 40 से अधिक पदक और एक ब्लैक बेल्ट के हौसले के साथ, शम्स अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने रास्ते पर अच्छी तरह से बढ़ रहे थे. मगर, 2010 में एक स्पाइनल ट्यूमर ने उन्हें उनके सपनों से दूर करते हुए उन्हें सीने के नीचे से लकवाग्रस्त कर दिया.

भले ही अगले कुछ साल सर्जरी के माध्यम से उन्होनें अपने ट्यूमर से छुटकारा पा लिया, लेकिन कराटे की दुनिया में अपनी छाप छोड़ने का उनका सपना टूट गया. हालाँकि, इस चीज़ ने उन्हें दूसरे मौके खोजने से नहीं रोका. 2013 में तैराकी प्रतियोगिता पर अपना ध्यान केंद्रित करने के बाद, शम्स ने खूब वाहवाही लूटी, और नए विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने में सफल रहे.

 

तैराकी में आनंद मिला

तर्कसंगत ने पैरा-तैराक से बात की, जिन्होनें कई बाधाओं को दूर कर अपने जैसे कई अन्य लोगों के लिए आशा की किरण के रूप में एक मिसाल बने हैं. एमबीए की डिग्री के साथ मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक शम्स ने तैराकी के लिए अपने प्यार को पहचानते हुए अपनी कंपनी की आकर्षक नौकरी छोड़ने का फैसला किया. उन्होंने कहा, “मैं पहले अपनी विकलांगता से निराश था, लेकिन जल्द ही, मुझे इससे निपटने का एक तरीका मिल गया.”

रिहैबिलिटेशन के एक हिस्से के रूप में और फिजियोथेरेपी शुरू करने के लिए, शम्स ने मुंबई में पैरापेलिक फाउंडेशन में जाना शुरू किया. यहीं पर शम्स  की मुलाकात राजाराम घाग से हुई, जो एक व्हीलचेयर पर चलने वाले तैराक थे, जिन्होंने 1988 में इंग्लिश चैनल पार किया था. उन्होंने कहा, “मैं बचपन में तैरता था मगर राजाराम सर ने मुझ जैसे लकवाग्रस्त व्यक्ति में भी तैरने के प्रति आत्मविश्वास जगाया.”

 

 

उनके घर के पास स्विमिंग पूल में विशेष रूप से विकलांग लोगों को तैरने की अनुमति नहीं थी, पर लगातार प्रयास करने के बाद शम्स को पहले 25 मीटर के पूल में अभ्यास करने की अनुमति मिली थी. उस पूल में तैरकर विश्वास बढ़ने के बाद, 2012 से, शम्स ने प्रतिस्पर्धात्मक रूप से तैराकी शुरू कर दी और कई राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी जीत हासिल की.

भारत में विभिन्न स्तरों पर उनकी सफलता ने शम्स को उच्च लक्ष्य के लिए प्रेरित किया. यद्यपि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना चाहते थे, धन और स्पांसर की कमी के साथ-साथ एक उचित कोच के अभाव में वह ऐसा करने में असमर्थ थे. शम्स को तैराकी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए, अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी, जिससे उनकी पैसों की दिक्कत और बढ़ गयी.

 

विश्व रिकॉर्ड बनाना और तोड़ना

एक सामान्य घर से आने वाले, 31 साल के शम्स को कम साधन के साथ अपनी आकांक्षाओं को हासिल करना था. हालाँकि, उन्होनें अपनी लगन को कम नहीं होने दिया. स्विमिंग पूल से, शम्स ने अपना ध्यान समुद्र की तैराकी की ओर डाला. 2013 में, उन्होंने एक समुद्री तैराकी प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसे वह पूरा नहीं कर सके. उन्होनें 2014 कोलाबा मुंबई में नौसेना दिवस ओपन सी तैराकी प्रतियोगिता में  दिव्यांगों की श्रेणी में भाग लिया, और हर किसी को आश्चर्यचकित करते हुए, उन्होंने 1 घंटे, 40 मिनट और 28 सेकंड में 6 किमी की दूरी तय की. इससे उन्हें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह मिली क्योंकि ऐसा करने वाले 100% विकलांगता के साथ वह पहले पैराप्लेजिक व्यक्ति थे.

 

2017 में, सभी बाधाओं को पार करते हुए, शम्स ने 4 घंटे और 4 मिनट में 8 किमी तैरकर, गोवा में सिनकिरीम-बागा-कैंडोलिम समुद्र में तैराकी की. इस कीर्तिमान ने संयोग से उनके द्वारा स्थापित पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने में मदद की. उन्होंने कहा कि उन्हें हाल ही में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से अपने रिकॉर्ड की पुष्टि मिली है.

अपने विश्वविद्यालय के निदेशक के स्पॉन्सरशिप के मदद के साथ, शम्स ने कनाडा में 2016 स्पीडो कैन-एम पैरा-तैराकी चैंपियनशिप में भाग लिया कांस्य पदक जीता. इसके अलावा, तैराकी प्रतियोगिताएं में लगातार हिस्सा लेना और अच्छा प्रदर्शन करने के कारण से, उन्हें उनकी श्रेणी (100 मीटर बैकस्ट्रोक) में एशियाई रैंकिंग में पहला स्थान मिला.

 

आगे बढ़ते हुए

2018 में, पैरा एशियन गेम्स में प्रतिस्पर्धा करने का उनका सपना तब पूरा हुआ जब अक्टूबर में सात तैराकी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए क्वालीफाई किया. उन्होंने कहा, “मैं मात्र कुछ सेकंड के अंतर से पदक नहीं जीत सका, हालांकि, मैं एक इवेंट में चौथे स्थान पर रहा, जबकि मैं अन्य सभी में शीर्ष आठ में था.” यह उपलब्धि इस तथ्य को देखते हुए विशेष रूप से प्रशंसनीय है कि उन्होंने ऐसा किसी भी उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण शिविर या स्पॉन्सरशिप के बिना हासिल किया. उन्होंने कहा, “हालांकि, बैंगलोर में एक कोचिंग कैंप था, मगर मैं उसमें भाग नहीं ले सकता था क्योंकि वह मेरे लिए दुर्गम था.”

 

 

तैराकी की दुनिया में खुद के लिए नाम कमाने के अलावा, शम्स दिव्यांग लोगों के लिए भी काम करते हैं, सार्वजनिक स्थानों को और अधिक सुलभ बनाने से लेकर, सरकार से आग्रह करने के लिए प्रेरक शिविरों के आयोजन तक, शम्स दूसरों के जीवन को आसान बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, “दृढ़ संकल्प के साथ, कोई भी कुछ भी हासिल कर सकता है जो वे चाहते हैं, खेल में या कॉर्पोरेट सर्कल में.”

शम्स के लिए अगला लक्ष्य 2019 में विश्व पैरा-तैराकी चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करना है. उन्होंने कहा, “इसके लिए क्वालीफाई करना कठिन है और यदि मैं ऐसा करता हूँ, तो मैं ऐसा करने वाला भारत का पहला लकवाग्रस्त व्यक्ति बन जाऊँगा.”

तर्कसंगत शम्स को न केवल अपने जीवन में सफल होने के लिए, बल्कि दूसरों के जीवन को भी सशक्त बनाने के लिए शुभकामनायें देता है.

 

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