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1946 में अलग हुए, केरल दंपत्ति सात दशक बाद फिर से मिले

तर्कसंगत

Image Credits: Times Of India

January 3, 2019

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ईके नारायणन नांबियार जो अपनी ज़िन्दगी के नब्बे बसंत देख चुके हैं, उनकी मुलाक़ात उनकी पहली पत्नी, शारदा से 1946 में अलग होने के बाद पहली बार कुछ दिनों पहले हुई, जैसा कि एनडीटीवी की रिपोर्ट ने बताया. यह दृश्य किसी हिंदी फिल्म के दृश्य से अलग नहीं था, मगर यह रोमांटिक दृश्य भी नहीं था, ये दो आत्माओं का मिलन था जो अंग्रेजों और सामंती प्रभुत्व द्वारा उत्पीड़न के शिकार थे. ईके नारायणन नांबियार, जो अब 93 वर्ष के हैं, उनको 1946 केरल के कावुम्बाय गाँव में हुए ऐतिहासिक किसान विद्रोह में भाग लेने के जुर्म में जेल में बंद कर दिया गया था. उन्होंने शारदा से शादी 1946 में की थी वह अब 89 साल की हो चुकी हैं. नारायणन और शारदा क्रमशः 18 और 13 साल के थे, जब वे दोनों  शादी के बंधन में बंधे.

नियति के खेल के कारण शादी के दस महीने बाद ही दोनों अलग हो गये थे. नारायणन और उनके पिता थलील रमन नांबियार, जिन्होंने कावुम्बाय आंदोलन का नेतृत्व किया, भूमिगत हो गए. इन दोनों को दो महीने बाद पुलिस ने पकड़ लिया और भूमि संघर्ष में भाग लेने जुर्म में जेल में डाल दिया. नारायणन के जेल जाने के बाद, नई दुल्हन को उसके माता-पिता के घर भेज दिया गया, क्योंकि मालाबार स्पेशल पुलिस ने नारायणन और रमन की तलाश में कभी भी रात में उनके घर आ धमकती थी.

नारायणन के भतीजे ने पीटीआई को बताया कि उनके घर में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गई. नारायणन को आठ साल के लिए जेल भेज दिया गया था. उन्हें वियूर, सलेम और कन्नूर में तीन जेलों में बारी बारी से रखा गया था. फरवरी 1950 में, उनके पिता की सलेम जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. कुछ वर्षों के बाद, शारदा के परिवार ने उसकी शादी किसी अन्य व्यक्ति से कराने का फैसला किया. 1957 में रिलीज़ होने के बाद नारायणन ने भी शादी कर ली.

हालांकि, कई सालों के बाद, शारदा के बेटे भार्गवन जो की एक जैविक किसान हैं उनकी मुलकात नारायणन के एक रिश्तेदार हुई और उन्हें पता चला कि दोनों परिवार का एक ही इतिहास रहा है, तब यह योजना बनाई गई थी कि दो खोए हुए जोड़े को मिलवाया जाए.

नारायणन शारदा से मिलने के लिए भार्गवन के घर आए. शारदा ने नारायणन से मिलने के लिए मना कर दिया, बाद में बहुत अधिक प्रयास के बाद, वह मान गई. दोनों कुछ देर तक शांत रहे और अपने आंसू पोंछते रहे. भार्गवन के परिवार ने नारायणन के लिए ‘साध्या ’(विभिन्न प्रकार के पारंपरिक शाकाहारी व्यंजनों से युक्त एक भोज) की व्यवस्था की और दोनों परिवार जल्द ही फिर से मिलने के लिए सहमत हुए. शारदा 30 साल पहले विधवा हो गई थी और अपने छह बच्चों में से चार के साथ रहती है.

तर्कसंगत शारदा और नारायणन के दोबारा मिलने पर खुशी व्यक्त करता है, साथ ही उनके लिए स्वस्थ लंबे जीवन की आशा करता है.

 

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