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पानीपत के दंपति ने अपनी शादी की चौथी सालगिरह पर ग़रीब बच्चों के लिए मुफ्त में स्कूल शुरू किया

तर्कसंगत

January 5, 2019

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शिक्षा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है. आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए, योगेश गुप्ता और उनकी पत्नी माया गुप्ता ने यह बीड़ा अपने सर उठाया है. पानीपत क्षेत्र के संजय चौक के पास स्थित एक मंदिर में शाम 4 बजे के बाद शिक्षा के मंदिर में तब्दील हो जाती है.

30 वर्षीय योगेश गुप्ता पानीपत के निवासी हैं. उनके  परिवार वाले पानीपत में मशहूर मिठाई की दुकान चलाते हैं, योगेश ने मॉडल टाउन इलाके के गरीब बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा अपने सर उठाया है. वह खुद बिना किसी दबाव के पढ़ाई करना चाहते थे, मगर 17 साल की उम्र में ही उन्हें पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ना पड़ा. इसके बावज़ूद भी उन्होनें पोलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की.

तर्कसंगत से बात करते हुए योगेश बताते हैं कि “मुझे अपने निवास पर उचित वातावरण न मिलने के कारण अपने स्नातक के दिनों में पढ़ाई करने के लिए एक फ्लैट किराए पर लेना पड़ा.” उन्होंने कहा कि “शिक्षा एक राष्ट्र की आवाज़ है और यह सभी तक पहुँचनी चाहिए.”

 

सरकारी स्कूलों की हालत ने उन्हें ये पहल करने के लिए मजबूर किया

योगेश के मन में इन बच्चों के भविष्य के बारे में सवाल और चिंता तब हुई , जब उन्होंने अपने एक दोस्त के अनुरोध पर एक सरकारी स्कूल का दौरा किया, जो उस स्कूल में पढ़ाते थे. स्कूल की स्थिति देखकर वह दंग रह गए. स्कूल से ज्यादा, वह यह देखकर हैरान थे कि कक्षा छठी और सातवीं के छात्र अपना नाम भी नहीं लिख पा रहे थे. उन बच्चों में व्याकरण और गणित के बुनियादी ज्ञान का अभाव था. उनके मित्र ने उन्हें बताया कि यह राज्य के अधिकांश सरकारी स्कूलों की स्थिति है.

इस बात को जाँचने के लिए, उन्होंने पानीपत के एक अन्य सरकारी स्कूल का भी दौरा किया और पाया कि सब जगह वही स्थति है. उन्होंने यह भी महसूस किया कि लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या हमेशा अधिक थी. सरकारी स्कूलों की इस नई तस्वीर ने योगेश को परेशान किया जो खुद पानीपत के एक प्रसिद्ध निजी स्कूल के छात्र रह चुके थे. अतीत को याद करते हुए, उन्होंने कहा, “मेरे दोस्त ने मुझे इस स्थिति के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन मैंने इतनी खराब स्थिति की कल्पना नहीं की थी.”

 

लड़कियों को शिक्षा के लिए सुरक्षित अवसर देना

उन्होनें इलाके के बच्चों को पढ़ाने की ठान ली. जो बच्चे कभी स्कूल नहीं गए या किसी सरकारी स्कूल में दाखिला नहीं लिया, वह सब धीरे धीरे उनके स्कूल में आने लगे. उन्होंने इस नेक कार्य के लिए एक आदर्श स्थान के रूप में मंदिर को चुना. मंदिर, संजय चौक के पास है, और मॉडल टाउन से 3-4 किमी दूर है,  स्थान की पसंद के बारे में पूछने पर, योगेश ने कहा, “मुझे लगता है कि लड़कियां मंदिर जाने के लिए सुरक्षित महसूस करेंगी. मंदिर क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध भी है तो यहाँ पहुँचने में भी दिक्कत नहीं होगी.”

 

 

 

खुद के खर्च से शुरुआत की

अब तक, योगेश 25 से अधिक छात्रों को पढ़ाने का खर्च खुद से उठा रहे हैं, लेकिन छात्रों की संख्या बढ़ने पर भविष्य में सहयोग लेने की योजना है. उनकी पत्नी माया गुप्ता, और उनकी बहन नैना गुप्ता इन बच्चों को बुनियादी व्याकरण और गणित सिखाने में उनकी मदद कर रही हैं. बच्चे एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज जैसे रंगोली बनाने और ड्रॉइंग में भी हिस्सा लेते हैं, योगेश ने अपनी शादी की चौथी सालगिरह की पूर्व संध्या पर 2 दिसंबर, 2018 से बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है, वह चाहते हैं कि अन्य शहरों के छात्र भी  कार्य भाग लें और बच्चों को पढ़ाने में अपना समय दें.

 

 

अपने जीवन के आदर्श के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने स्वामी विवेकानंद द्वारा कही गई एक बात को दोहराया और कहा कि, “जीतें वही है जो दूसरों के लिए जीते हैं”

तर्कसंगत ऐसे उदार कार्यों की सराहना करता है और आशा करता है कि अधिक बच्चे और स्वयंसेवक आने वाले समय में स्कूल से जुड़ेंगे और स्कूल का विस्तार करने में मदद करेंगे.

 

 

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