मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैंने देखा कि एक आदमी खून से लथपथ पड़ा है और कोई उसकी मदद नहीं कर रहा है.

तर्कसंगत

January 7, 2019

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एक सुबह लगभग 9.45 पर जब मैं एल्फिंस्टन में अपने ऑफिस की ओर जा रहा था, तो मुझे शिव मंदिर के पास एल्फिंस्टन स्टेशन के ठीक सामने एक आदमी खून से लथपथ, बेहोश पड़ा हुआ मिला उसके चेहरे से काफी खून बह रहा था. चोट का कारण मालूम नहीं था, लेकिन चोट काफ़ी गहरी थी. कोई भी मदद के लिए नहीं आ रहा था. मैंने मंदिर से पानी ले कर उसके मुंह पर छींटे मारे और पास के दुकान से कुर्सी ले कर उसे बैठाया, वह होश में नहीं था कर खून काफी बह रहा था.

मैंने 108 को फोन किया, हेल्पलाइन में उपस्थित व्यक्ति बहुत नम्र और मददगार था. उसने एम्बुलेंस ड्राइवर के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल लगाई ताकि जगह का सही से पता लग सके. अगले 5-7 मिनट में एम्बुलेंस आ गई. एम्बुलेंस में डॉक्टर ने मुझे उनके साथ जाने के लिए कहा क्योंकि किसी को सरकारी अस्पताल में प्रवेश प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने की आवश्यकता है.

उस वक़्त रवीराज सोंटाके नाम का एक व्यक्ति मेरे साथ निकटतम केईएम अस्पताल जाने के लिए खुद से राज़ी हुआ. हम केईएम अस्पताल पहुंचे, उस आदमी को तुरंत इमरजेंसी / कैजुअल्टी वार्ड में ले गए. हमसे कुछ फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाए गए, और हमने एंट्री फॉर्म भरी, एक पुलिस अधिकारी ने अस्पताल में घटना की एफआईआर दर्ज की. इन सब के दौरान, अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा रोगी की देखभाल की गई. उस व्यक्ति को घटनास्थल से अस्पताल ले जाने और फॉर्म वगैरह भरने के फॉर्मेलिटी के बाद भी यह सब कुछ एक घंटे से कम समय में हुआ.

पुलिस ने यह ध्यान रखा कि हमें कोई परेशानी न हो और वास्तव में, हमारे सूझबूझ की सराहना की. मैं अपने ऑफिस की मेज पर सुबह 11.15 बजे तक वापस आ गया था, किसी और दिन के तरह ही.

इस लंबे पोस्ट को लिखने का एकमात्र कारण लोगों को जागरूक करना है कि दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद करने में बहुत अधिक समय नहीं लगता है.
अस्पताल में प्रवेश प्रक्रिया आसान थी.
पुलिस और डॉक्टर ने काफी मदद की.
कोई परेशानी नहीं थी.
दोस्तों आप सभी के लिए एक सामान्य अपील है कि आगे बढ़ें और उस घायल व्यक्ति की मदद करें, उस दुर्घटना के शिकार व्यक्ति की मदद करें, एक घंटे की आपकी मदद उस व्यक्ति के जीवन में बहुत अंतर ला सकती है.
#KEMHOSPITAL को धन्यवाद, #108HELPLINE को धन्यवाद, और कोई भी परेशानी नहीं होने देने के लिए #MUMBAIPOLICE को भी धन्यवाद.

आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मेरी इस पोस्ट को शेयर करके जागरूकता पैदा करें और मुंबई को रहने के लिए एक बेहतर स्थान बनाएं.

पीएस : मैंने उपरोक्त किसी भी काम के लिए अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं किया.

 

कहानी: आलोक मेहता

 

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