सप्रेक

हर महीने वह 1,50,000 दिल्ली के निवासियों की प्यास बुझाने के लिए 60,000 लीटर पानी मटकों में भरते हैं

तर्कसंगत

January 7, 2019

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2013 में, जब अलगरथनम नटराजन ने दक्षिण दिल्ली में अपने घर के बाहर पहला वाटर कूलर लगाया, तो उन्हें अपने सभी पड़ोसियों से विरोध सहना पड़ा, सभी पढ़े लिखे लोग थे मगर वे नाराज थे क्योंकि “सभी प्रकार के लोग” वहाँ पर पानी पीन आयेंगे. उनकी अस्वीकृति के बावजूद, भी नटराजन पीछे नहीं हटे और कहा कि, “सभी प्रकार के लोगों को पानी की आवश्यकता है.” एक वह दिन था और एक आज का दिन है, आज दिल्ली नटराजन को उनके प्रिय ‘मटका मैन’ के रूप में जानती है – जिन्होनें गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए 80 मटके उन्होंने पूरे दक्षिण दिल्ली में लगा रखे हैं.

 

पहले कैंसर पर विजय प्राप्त की

24 साल के एक युवा के रूप में, अलगरथनम नटराजन ने अपनी जन्मभूमि बेंगलुरु को लंदन के लिए छोड़ दिया, और वहाँ एक सफल बिजनेसमैन बने. वो बताते हैं “मैं हमेशा विलासिता से भरा जीवन जीने की आकांक्षा रखता था, जो भव्य घरों, कारों और फर्नीचर से घिरा हुआ हो; और मैंने अपने सपने पा लिए थे. हालांकि, पचास-पचपन की उम्र के पास आते आते  एक दिन मेरे लिए जीवन की परिभाषा बदल गयी.”

लगभग 56 वर्ष की आयु में, नटराजन को पेट के कैंसर का पता चला. ” कैंसर का पता जल्दी लगने के कारण मैं बच गया, लेकिन, यह मेरे जीवन की बचत का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो गया, मेरे पास भारत लौटने के अलावा कोई चारा नहीं था.

 

वापस आ कर वह दक्षिण दिल्ली में बस गए और एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने लगे. उन्होंने कहा, “मैंने एक कैंसर रोगियों की सेवा की, एक अनाथालय में स्वेच्छा से सेवा करता था और गरीब लोगों के अंतिम संस्कार किया करता था” दो सिख भाइयों के साथ मिलकर प्रतिदिन दो हजार से अधिक लोगों के लिए लंगर का आयोजन किया करता था.

“अक्सर, मैं इस आधुनिक युग में भी वे दर्द और गरीबी से ग्रस्त लोगों को देख कर भावुक हो जाता हूँ. मैंने देखा कि शहर में दूर-दूर से जीने की उम्मीद लिए बिना पैसे के इलाज कराने चले आते हैं, उनकी दुर्दशा ने मुझे जीवन के वास्तविक मूल्य सिखाए.

 

 

वह मटका मैन कैसे बने

एक प्रख्यात उद्योगपति के घर के बाहर स्थापित वाटर कूलर को देख प्रेरित होकर, नटराजन ने 2013 में अपने घर पर भी ये पहल की, दिनों के भीतर, कुछ ही दिन में पड़ोस के सुरक्षा गार्ड, मजदूरों और मज़दूर पानी पीने आने लगे. “आप इस गर्मी में क्यों चलते हैं और पानी के लिए इतनी दूर क्यों आते हैं?” नटराजन ने उत्सुकता से एक दिन एक गार्ड से पुछा, “आदमी ने खुलासा किया कि उसका मालिक पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं करता है. मुझे एहसास हुआ कि शुद्ध पेयजल हमारे समाज के इन अतिपिछड़े और कम खर्च वाले लोगों के लिए भी एक लक्जरी है” नटराजन साझा करते हैं, और इस तरह वह “मटका मैन” बने.

 

 

उन्होंने पारंपरिक पानी के बर्तनों या मटकाओं का उपयोग किया, जो प्रभावी रूप से लंबे समय तक पानी को ठंडा रखते हैं और अपने घर से सटे मुख्य सड़क के किनारे तीन पेयजल स्टैंड स्थापित किये “इस पहल से इतने सारे प्यासे लोग लाभान्वित हुए कि मैंने इसे बड़े पैमाने पर शुरू करने का फैसला किया. तीन वर्षों में, मैंने लगभग अस्सी मटके बीस से अधिक स्थानों पर स्थापित किए हैं. प्रत्येक दिन लगभग दो हजार लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है, जो लगभग चार से पांच हजार लोगों की प्यास बुझाता है.”

 

मटका मैन, वास्तविक जीवन के सुपरहीरो

हर सुबह 5 बजे, आप मटका मैन को अपने पालतू कुत्ते, स्नोपी के साथ अपनी कार में 800 लीटर टैंक, एक पंप और एक जनरेटर के साथ पानी के बर्तन को भरने के लिए निकलते देख्नेगे, कुछ स्थानों पर, वह मजदूरों और श्रमिकों को गर्म नाश्ता भी करवाते हैं, लंबी दूरी तक साइकिल चलाकर साइटों पर पहुंचने वाले श्रमिकों को नटराजन से मुफ्त में साइकिल की घंटी और साइकिल चलाने का तेल मिलता है, वह कम दरों पर साइकिल टायर, ट्यूब और पंप भी बेचते हैं.

 

 

नटराजन भी हर हफ्ते लगभग चालीस से पचास किलोग्राम मौसमी फल और सब्जियाँ मजदूरों में वितरित करते हैं. वह खुद अक्सर स्वादिष्ट भोजन बना कर उन मज़दूरों को खिलाते हैं.

“मैं इनमें से अधिकांश श्रमिकों को अपने भोजन को पॉलीथिन बैग में लाते हुए देखता था और खाने के बाद इन्हें इधर-उधर फेंक देते थे. मैंने महसूस किया कि हर इंसान को गरिमा के साथ अच्छे भोजन का आनंद लेने की इच्छा होती है. इसलिए अब हर महीने मैं इन लोगों को लगभग सौ स्टेनलेस स्टील के लंच बॉक्स दान करता हूँ.

 

 

सारा खर्च खुद उठाते हैं

चैरिटी के लिए उनका ज्यादातर खर्च खुद की बचत और पेंशन से आता है. वह समय-समय पर कुछ योगदान प्राप्त करते हैं लेकिन नियमित रूप से अपनी पहल को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है. दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी में, पानी की मांग बहुत अधिक है. फिर भी जब उन्हें मटका खाली होने का कॉल आता है 69 वर्षीय नटराजन एक मटके को फिर से भरने के लिए निकलते हैं. यदि आप मटका मैन के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो आप उनकी वेबसाइट पर जा सकते हैं http://www.matkaman.com/alag/

 

आज के समाज का स्याह पक्ष

“मेरे जीवन के अधिकांश अनुभव दुखद हैं. मुझे याद है एक बार मैंने एक दिव्यांग आदमी को देखा, जो एक असंवेदनशील भीड़ द्वारा पत्थरों से मार खा रहा था उसका मजाक उड़ा जा रहा था. उनकी भयभीत अभिव्यक्ति ने मुझे अपनी बहन की याद दिला दी, जो एक डॉक्टर थी और बाद में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से परेशां थी. तुरंत, मैंने उसे बचाने के लिए लोगों को रोका, उसे भोजन की पेशकश की और उसे कुछ पैसे दिए. लेकिन उस घटना को मेरे दिमाग में गहराई से उकेरा गया है ताकि मुझे याद दिलाया जा सके कि आज समाज कितना बर्बर और निराशाजनक हो गया है. अगर मैं अपने साथी मनुष्यों की मदद करने के लिए थोड़ा बहुत कर सकता हूँ, तो मैं खुद को भाग्यशाली समझूँगा, ”मटका मैन अपनी कहानी से हमें अपने अंदर झाँकने को विवश कर देते हैं.

 

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