मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैं उस जलते रेस्तरां से दौड़ कर निकल गयी मगर मेरा दोस्त और उसके रिश्तेदार बाहर नहीं निकल पाए

तर्कसंगत

January 8, 2019

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“मेरा सबसे अच्छा दोस्त, धैर्य अमेरिका से आ रहा था. मैं खुश थी – हम महीनों बाद मिल रहे थे! वह मेरे हर समय का साथी था, जब मेरी शादी होने वाली थी, तब भी मैं उससे सलाह लेने गयी थी. तब उसने कहा था कि वो मेरे लिए हमेशा मौजूद रहेगा.

28 दिसंबर 2017 को, उसकी आंटी ने कमला मिल्स में 1Above होटल में रात के खाने का प्लान बनाया. आधी रात तक सभी तरफ़ हंसी मज़ाक चल रही थी, तभी किसी ने देखा कि एक कोने से धुआं उठ रहा है – हमारे ऊपर के तम्बू ने आग पकड़ ली थी. मुझे याद है कि सभी लोग बाहर निकलने के लिए दौड़ रहे थे.

आग बढ़ती जा रही थी. रेस्तरां के बीम गिर रहे थे और बाहर निकलने वाले रस्ते पर बौखलाए लोगों की भीड़ थी. हम में से कुछ ने एक दूसरे दरवाजे से निकलने का फैसला किया, यह उम्मीद करते हुए कि वो बाहर जाने का रास्ता था. लेकिन हमने पाया कि वह एक वॉशरूम था. धैर्य, उसकी आंटी, उसका भाई, मैं और मेरे पति एक साथ वहाँ फंसे थे.

मैं बहुत डर गयी थी, धैर्य ने यह देखा और मुझे भरोसा दिलाया कि हम सब बाहर निकल जायेंगे. वॉशरूम में धुआं भरने लगा था साथ ही और ज्यादा लोग घुस आये थे. हम बाहर के लोगों के लगातार संपर्क में थे जो हमें आश्वस्त कर रहे थे. मेरा दम घुट रहा था मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी.

मैं पानी पीने के लिए बेसिन की तरफ बढ़ी लेकिन फिर मुझे याद है कि मैं वॉशरूम से आग की लपटों में घिरी भाग रही थी. मैं अपने पति को चिल्लाते हुए सुन सकती थी और वह मेरे पीछे दौड़ने लगे. मेरे पैर में चोट लगी और मेरे चारों तरफ आग थी. लेकिन मुझे परवाह नहीं थी, मैं दौड़ती रही और बाहर निकल आयी.

मैंने पलट कर देखा कि मेरे पति मेरे पीछे थे. मेरे तलवे जल गए थे और मुझे अस्पताल ले जाया गया. मैंने अपने अच्छे दोस्त के बारे में पुछा तो पति ने बताया कि वे लोग वाशरूम में ही थे.

लेकिन जब मुझे पता चला कि धैर्य, उसका भाई और आंटी समय पर मदद न मिलने के कारण दम घुटने से मर गए मुझे विश्वास नहीं हुआ. मैं टूट चुकी थी. वह कैसे जा सकता था? उस समय के बाद मैंने कई बार सोचा कि वो अचानक मेरे कमरे मैं आएगा और मुझे सरप्राइज देगा. मगर इस सच्चाई को मुझे समझने में काफी समय लगा कि अब वो कभी नहीं आएगा.

उस दिन का हर एक मंज़र मेरे दिमाग पर छप गया है – मैंने उसे अपने ज़ेहन में कई बार दोहराया बस कि एक छोटी सी चीज़ बदल जाये जो मेरे सबसे अच्छे दोस्त को वापस ला सके. अगले हफ्ते में, मैंने समाचार पत्र में रेस्तरां के लिए बीएमसी द्वारा मान्यता प्राप्त नक्शा देखा – जो वास्तविक स्थान से पूरी तरह से अलग था. वहाँ कोई फायर एग्जिट नहीं थी.

इस वजह से मुझे और उस रात के अन्य सभी पीड़ितों को इसके परिणाम भुगतने पड़े. अब, मैं कभी उसका चेहरा नहीं भूल सकती, जब उसने मुझसे कहा कि सब ठीक हो जायेगा मैं तुम्हारे साथ हूँ और हमेशा रहूँगा – मुझे पता है कि वह मुझे हमेशा देख रहा है.”

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