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मिलिए ब्रिटेन से ऑर्विले आये संगीतकार और जैविक किसान कृष्ण मैकेंजी से

तर्कसंगत

January 8, 2019

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1993 की बात है जब कृष्णा मैकेंज़ी ब्रिटेन से भारत के पुदुचेरी आये थे. उस वक़्त मेकेंजी को नहीं पता था कि कुछ साल बाद, वह ऑर्विले की छोटी सी जगह में जैविक खेती के चैंपियन और इको-फ्रेंडली के एक तरह से सफल उदाहरण बन जायेंगे.

यूके में अपने जे. कृष्णमूर्ति स्कूल से भारतीय संस्कृति से प्रेरित, मैकेंज़ी ने भारत में कदम रखने का मन बना लिया था. आज, वह तमिल व्यंजनों और संस्कृति का आनंद लेते हुए खेती में खुश हैं.

 

कृष्णा मैकेंजी दूसरों के लिए उदाहरण हैं

45 वर्षीय मैकन्जी किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं हैं. तर्कसंगत ने कृष्ण मैकेंजी से प्राकृतिक खेती के प्रति उनके प्रेम के बारे में बात की, जिससे वे लोगों को हरियाली का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं. उन्होंने कहा, “मनुष्य ने प्रकृति के साथ अपना संबंध खो दिया है और इसलिए, हम उस जगह को भूल चुके हैं जहाँ से हमारा भोजन आता है.”

मासानोबु फुकुओका (एक किसान जो प्राकृतिक खेती का चैंपियन माने जाते हैं) से प्रेरित, कृष्णा मैकेंजी ने कुछ अन्य लोगों के साथ 1996 में सॉलिट्यूड फार्म की शुरुआत की थी. सॉलिट्यूड फार्म को प्राकृतिक खेती के विचारों के साथ विकसित किया गया था. आज, मैकेंज़ी का खेत छह एकड़ में फैला हुआ है और स्थानीय पौधों की 140 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं.

उन्होंने कहा, “वर्षों से, हमारी भोजन की आदतों में बहुत बदलाव आया है और उन आदतों को पूरा करने के लिए हम प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पौधों जैसे कि यम, बैंगन, फूलों की खेती को भूल गए हैं जो तमिलनाडु के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्राकृतिक हैं.”  मैकेंज़ी ने सॉलिट्यूड फ़ार्म कैफे की शुरुआत की, जो खेत के ताजे उत्पादों से बना भोजन और स्थानीय व्यंजन परोसता है. सॉलिट्यूड फार्म को अद्वितीय बनाने वाला तथ्य यह है कि  जैविक होने के आलावा वह किसी भी तरह के कीटनाशक या रासयनिक उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करते.

 

 

औद्योगीकरण के धुन में, हम पारंपरिक भोजन के महत्व को भूल गए हैं. मैकेंजी ने कहा कि सॉलिट्यूड फार्म पर उगाए गए उत्पादों में से कई ऐसे उत्पाद है जो अब औद्योगिक कृषि समाज में उगाये नहीं जाते हैं, और इसलिए, हमारे भोजन की आदतों को लंबे समय से भुला दिया गया है. उनका उद्देश्य इन लुप्त हुए पौधों और सब्जियों को फिर से खोज कर हमारे से जोड़ना है, जिससे हम उसके पौष्टिक, औषधीय, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक मूल्यों का समझ पाएं.

 

संगीत और खाने का मिश्रण

खेत में समय बिताने के अलावा, मैकेंज़ी एक संगीतकार, शिक्षक और एक अभिनेता भी हैं. वह न केवल लोगों को प्राकृतिक खेती के महत्व और लाभों को समझने में मदद करते हैं, मैकेंज़ी कई सेमिनार और कार्यशालाएं भी आयोजित करते हैं. “मैं लोगों को सिखाता हूँ कि वे अपने आसपास स्थानीय रूप से उगाए गए भोजन की प्रचुरता और मूल्य को पहचानें और समझें और इसका उपयोग कैसे करें, तैयार करें और खाएं,” उन्होनें अपने वेबसाइट पर लिखा है.

 

 

बैंड एमर्जेंस के फ्रंट-मैन के रूप में, मैकेंज़ी ने हमेशा प्रकृति के लिए अपने प्यार को संगीत के माध्यम से बताने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा, “संगीत वह है जो लोगों और संस्कृतियों को एक साथ बांधता है. “लाइवली अप योर अर्थ (LUYE) इको-म्यूजिक फेस्टिवल मैकेंज़ी की सपनों का परिणाम है, जो 12 जनवरी को आयोजित होने वाला है. जन्म से एक अंग्रेज़ मैकेंज़ी का दिल और आत्मा भारत में निहित है और पूरी तरह से हमारी सदियों पुरानी संस्कृति में डूबा हुआ है. उन्होंने कहा, “मैं एक पगड़ी पहनता हूँ, मैं खेती करता हूँ और मैं तमिल बोलता हूँ. हालांकि यह लोगों के लिए असामान्य हो सकता है, और इसका आकर्षण जल्द ही फीका हो जाएगा, हालांकि, लोग उन आदर्शों को याद रखेंगे जो मैं दे रहा हूँ.”

भारत में जैविक खेती में अचानक वृद्धि के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि लोगों ने अब पारंपरिक कृषि पर लौटने के महत्व और इसके होने वाले लाभों को महसूस करना शुरू कर दिया है.

तर्कसंगत  कृष्णा मैकेंज़ी के अथक प्रयासों और भारत में प्राकृतिक खेती को फिर से शुरू करने के लिए की गई पहल के लिए उनकी सराहना करता है.

 

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