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लज़्ज़तदार: असम का यह गांव ताजे पके हुए चूहे के मांस काफी पसंद से खाता है

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Image Credits: Eenadu India

January 9, 2019

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मसालेदार ग्रेवी में पका चूहे का मांस असम के बक्सा जिले में एक स्वादिष्ट भोजन है. गुवाहाटी से 90 किमी दूर कुमारिकाटा गांव में, हफ्ते में एक बार लगने वाले बाज़ार में चूहों की भरमार रहती है. उबला हुआ या कच्चा, यहाँ चूहे का मांस हर रूप में उपलब्ध है, जो भुने पके हुए से लेकर छिले हुए, तलने को तैयार. चूहों का ये बाज़ार फसल की कटाई से शुरू हो जाता है.

किसान खुद चूहों को पकड़ कर बाजार में बेचते हैं. असम में गरीबों और कई आदिवासियों के लिए, स्थानीय बाजारों में चूहों को बेचना पैसे कमाने का अच्छा साधन है. एक किलोग्राम चूहा 200 रुपये तक में बिकता है जो पोर्क या मटन के दाम के बराबर है.

एक विक्रेता के अनुसार, वे अपने खेतों को नुकसान से बचाने के लिए जाल लगाते हैं और चूहों का शिकार करते हैं क्योंकि ये चूहे लोगों की धान की फसल खराब कर देते हैं.

 

चूहे ही क्यों ?

रविवार के बाजार में, पूरे कुमारिकाटा गाँव चूहे के मांस से भर जाते हैं, यहाँ तक कि सूअर का मांस या चिकन की भी अनदेखी होने लगती है. विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से चूहे के मांस का आनंद लेने वाले लोगों की बाजार में भीड़ बढ़ती जाती है.

किसानों के अनुसार, हाल के वर्षों में चूहे की आबादी में भारी वृद्धि हुई है, और वे धान और चावल की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए, फसल के मौसम के दौरान, किसानों ने उन्हें पकड़ने के लिए चूहे के छेद के सामने बांस के जाल लगाए. व्यापारियों ने कहा कि वे हर रात 10-20 किलो चूहे इकट्ठा करते हैं.

द हिंदू से एक चूहे बेचने वाले सांबा सोरेन ने कहा, “हम खेतों में जाल लगाते हैं क्योंकि चूहे लोगों के धान खाते हैं.” विक्रेता यह सुनिश्चित करने के लिए रात में शिकार करते हैं कि अन्य जानवर मृत चूहों को पहले नहीं खा जाएं.

यह चलन न केवल आदिवासियों को सर्दियों के दौरान कुछ अतिरिक्त धन कमाने का मौका देती है जब उनके पास चाय बागानों में काम करने के लिए बहुत कम काम होता है, बल्कि भूटान के पास चावल के खेतों की भी रक्षा इससे हो जाती है.

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