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#अनजज: कोलकाता की पहली ह्यूमन लाइब्रेरी जहाँ किताबें नहीं लोग पढ़े जाते हैं

तर्कसंगत

January 11, 2019

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कभी एक किताब के बारे में सोचा है जो वास्तविक जीवन में आपके छिपे हुए प्रश्न का उत्तर देती है? जब हम काल्पनिक या गैर-काल्पनिक कहानियों के लिए पुस्तकों में डूबे हुए हैं, इस कड़ी में एक रोमांचक नयी कड़ी जुड़ी है – एक मानव पुस्तकालय (ह्यूमन लाइब्रेरी) जी हाँ, मानव पुस्तकालय आपने सही पढ़ा. इस तरह के लाइब्रेरी 2000 में डेनमार्क, कोपेनहेगन में शुरू हुए थे, और अब ये 80 से अधिक देशों में सक्रिय है. कोलकाता के पुस्तक प्रेमियों को आखिरकार एक व्यक्ति से बात करने और उनकी कहानियों के बारे में जानने का रोमांचक अनुभव हुआ.

 

शुरुआत कैसे हुई?

पुस्तकालय की संस्थापक और पुस्तक डिपो प्रबंधक, देबलीना साहा ने, पुस्तकालय को शुरू करने के लिए पहल की और उसकी स्थापना के लिए एक साल तक संघर्ष किया. इसके बारे में ऑनलाइन पढ़ने के बाद, लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं थी. तर्कसंगत के साथ अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा, “जब मैंने एक मानव पुस्तकालय के बारे में पढ़ा, तो मैं इसे एक पाठक के रूप में अनुभव करना चाहती थी. इसे जानने के बाद, मुझे पता चला कि किसी ने भी इसे यहां शुरू करने के बारे में नहीं सोचा है. मैंने 2017 के मध्य में लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था लेकिन आखिरकार 2019 में पहला अध्याय शुरू करने की मंजूरी मिल गई.”

 

 

एक संचार फर्म में काम करते हुए, साहा एक परियोजना का नेतृत्व कर रही हैं, जिसके माध्यम से लोग अपने आंतरिक पूर्वाग्रहों और रूढ़ीवादी सोच को चुनौती देने में सक्षम होंगे. साहा तर्कसंगत को बताती है, “मानव पुस्तकालय एक ऐसी जगह है जहां हमारे समाज में प्रचलित विभिन्न कलंक और पूर्वाग्रहों के बारे में संवाद शुरू किया जा सकता है. यह पाठकों को उन लोगों से सीखने की अनुमति देता है जिन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में ऐसे अनुभवों का सामना किया है. यह उन्हें विभिन्न मुद्दों पर एक नए दृष्टिकोण से देखने का मौका देगा.”

 

यह लाइब्रेरी कैसी होती है?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस लाइब्रेरी में ‘किताबें’ वास्तविक पाठकों के साथ बातचीत में शामिल हो सकती हैं. इस पुस्तकालय में आप अपने किताब से सवाल जवाब भी कर सकते हैं और आपको उसके जवाब भी मिलेंगे. यहां, प्रत्येक व्यक्ति को एक ’पुस्तक’ के रूप में माना जाता है जिसे एक पाठक द्वारा लगभग 25 मिनट के लिए ऋण लिया जा सकता है. प्रत्येक पाठक को इस घटना में दो पुस्तकें उधार लेने की अनुमति है. निर्धारित समय अवधि के भीतर, पाठक विभिन्न कलंकित धारणाओं के बारे में जानने के लिए उनसे सवाल कर सकते हैं , चीजों को देखने के नए तरीके हासिल कर सकते हैं या अपनी कहानियों से प्रेरणा भी ले सकते हैं. यह 6 जनवरी को न्यू टाउन के रवीन्द्र तीर्थ में आयोजित किया गया था.

 

 

पहले अध्याय में, ह्यूमन लाइब्रेरी ने ट्रेलब्लेज़र, उत्तरजीवी और संभावित रोल मॉडल जैसे लोगों को लाने का प्रयास किया है. जिन्होंने हिम्मत के साथ अपने जीवन की चुनौतियों का सामना किया है और शानदार ढंग से पार किया है. तर्कसंगत के साथ सफल आयोजन के बारे में और जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा, “पाठक काफी खुश थे हमने 16 से 70 आयु वर्ग के लोगों को इस घटना का हिस्सा बनते देखा. मानव पुस्तकों को सुनने के बाद, वे यह समझने में सक्षम थे कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में क्या सामना किया है. यह हमारे समुदाय में ऐसे किसी भी सदस्य के प्रति लोगों को अधिक दयालु बनाएगा.”

हालाँकि ऐसे लोगों का चयन करना जो अपनी व्यक्तिगत कहानियाँ सुनाने के लिए आगे आयें, साहा के लिए एक कठिन काम था. उन्होनें अपने निजी जान पहचान के लोग और एनजीओ से मदद ली. कुल चौदह पुस्तकों का चयन किया गया था और वे सभी समाज के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित थे.

 

 

पाठकों से मिली प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर,उन्होनें बताया कि, “लोग प्रेरित थे, खुश थे और सवाल पूछने के लिए स्वतंत्र थे. यह सबसे अच्छी बात थी. किसी तरह, मुझे लगता है कि जिन लोगों ने भाग लिया, वे किसी के बारे में कोई भी सोच बनाने से पहले कम से कम दो बार सोचेंगे. हम कहते हैं कि किसी पुस्तक को उसके कवर से मत आंकिए तो उम्मीद है कि आगे चलकर हम यह सोच लोगों के ज़ेहन में डालने में सफल होंगे.’

पाठकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने के बाद, वह आगामी अध्यायों के लिए और अधिक आकर्षक विषय लाने की योजना बना रही है. वह अपनी सफलता का श्रेय अपनी टीम को देती है जिसने इसे बनाने के लिए समन्वय और कड़ी मेहनत की. मानव पुस्तकों के माध्यम से हो रही इस तरह की उत्तेजक बातचीत के साथ, उसका उद्देश्य लोगों की धारणा को बदलना है ताकि वे कहानी के दूसरे पक्ष को जाने बिना दूसरों का न्याय न करें.

 

 

तर्कसंगत  द ह्यूमन लाइब्रेरी के निर्माण के लिए देबलीना साहा के प्रयासों को सलाम करता है, जहां महत्वपूर्ण संवाद और बातचीत शुरू की जा सकती है और हमारे पूर्वाग्रहों पर सवाल उठाया जा सकता है.

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