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उत्तर प्रदेश: अस्पताल परिसर में सूअर द्वारा मृत बच्चे को खाते हुए पाया गया

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Image Credits: India Today

January 11, 2019

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उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में, लाला लाजपत राय मेमोरियल (एलएलआरएम) मेडिकल कॉलेज के परिसर में एक सुअर को एक मृत पैदा हुए बच्चे के शव को खाते हुए पाया गया. सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में मृत बच्चे को सूअर द्वारा खाते हुए देखे जाने पर इस घटना का पता चला. अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल के आसपास आवारा पशुओं को घूमने देने के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया है.

 

घरवालों ने बच्चे को गिराया

द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अस्पताल ने दावा किया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त के साथ कई शिकायतें दर्ज की हैं; हालाँकि, आयुक्त ने उनमें से किसी पर भी ध्यान नहीं दिया.

पूरी घटना के बारे में बताते हुए अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आरसी गुप्ता ने कहा, ” शम्मो नामक मरीज़ ने पीएल शर्मा जिला अस्पताल में एक मृत बच्चे को जन्म दिया, शम्मो को मेडिकल कॉलेज में रेफर किया गया, और बच्चे को परिवारजनों को सौंप दिया गया. जिसकी एक रसीद भी हमारे पास उपलब्ध है.”

गुप्ता ने कहा कि शिशु का मृत शरीर, हालांकि, अस्पताल परिसर के अंदर रिश्तेदार से गलती से फिसल गया और फिर सुअर ने इसका सेवन किया. प्रिंसिपल ने दावा किया कि महिला के रिश्तेदार इतनी जल्दी में थे कि उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उन्होंने मृत बच्चे को गिरा दिया है.

 

पिता ने भी यही कहा

मृतक शिशु के पिता इल्मास ने भी लिखित स्पष्टीकरण में यही कहा है कि बच्चे का शव गलती से इलमास की मां ने गिरा दिया था. लिखित शिकायत में कहा गया है कि “मेरी माँ के हाथ से बच्चा गलती से गिर गया था चूँकि हम लोग शम्मो को अस्पताल में भर्ती करवाने की जल्दी में थे.”

डॉक्टर गुप्ता ने आगे कहा कि निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के बाद कैंपस अथॉरिटी ने एक व्यक्ति को नियुक्त किया है जो बंदरों को भागने के लिए कैंपस में एक लंगूर लेकर आता है.

गुप्ता ने यह भी कहा कि अस्पताल के अधिकारियों के लिए कुत्तों और सूअरों सहित अन्य जानवरों को परिसर से दूर रखना बहुत मुश्किल है.

इसके विपरीत, शहर की मेयर सुनीता वर्मा ने दावा किया कि उन्हें मेडिकल कॉलेज की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है. हालांकि, उसने कहा कि वह इस मामले की जांच करेंगी.

 

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र खराब है

इस तू-तू मैं-मैं के बीच यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह घटना राज्य की खराब स्वास्थ्य प्रणाली पर भी प्रकाश डालती है. जब से योगी सरकार सत्ता में आई है तब से सीएम ने मंदिर और राम जन्मभूमि को अपनी प्राथमिकता बनाया है. सीएम अयोध्या में लोगों से “एक दीया जलाने” के लिए कह रहे हैं, बाकी राज्य अभी भी अंधेरे में हैं.

अन्य राज्यों में यूपी की सबसे बड़ी आबादी है. हालांकि, यह स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति सिर्फ 452 रुपये खर्च करता है, जो बाकी राज्यों द्वारा औसत व्यय से 70 प्रतिशत कम है, जैसा कि फाइनेंशियल एक्सप्रेस द्वारा बताया गया है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2015-16 (एनएफएचएस -4) के अनुसार, राज्य में दो बच्चों में से एक का पूरी तरह से टीकाकरण नहीं किया गया है. मंदिरों की स्थिति में भारत की दूसरी उच्चतम मातृ मृत्यु दर (प्रति 100,000 जीवित जन्मों में 258 मौतें) और उच्चतम शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000 जीवित जन्मों में 64 मौतें) हैं.

उस समय जब यूपी स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सबसे बुनियादी समस्या का संकट झेल रहा है, सरकार को इन मुद्दों पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए.

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