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कर्नाटक: केंद्र ने बंदीपुर टाइगर रिजर्व में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण पर रोक लगायी

तर्कसंगत

Image Credits: The News Minute

January 12, 2019

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पर्यावरणविदों और वन्यजीव कार्यकर्ताओं के लिए राहत की खबर है. केंद्र ने यह फैसला किया है कि बंदीपुर टाइगर रिजर्व में एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की कोई परियोजना शुरू  नहीं की जाएगी.

शीर्ष अदालत में कर्नाटक सरकार द्वारा इस कदम का विरोध किए जाने के तीन दिन बाद, केंद्र का फैसला आया. कर्नाटक सरकार ने इस बात पर जोर दिया था कि यह कदम एशियाई हाथियों, बाघों और अन्य जानवरों के लिए हानिकारक हो सकता है.

 

प्रतिबन्ध

द न्यूज मिनट ने बताया कि केंद्र को पहले ही मार्च 2018 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी द्वारा सलाह दी गई थी कि वह 100 बाघों सहित कई जंगली जानवरों के आवास के लिए कितना हानिकारक होगा, इस बात को ध्यान में रखते हुए परियोजना को आगे न बढ़ाएं.

केरल से जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद रहे वीरेंद्र कुमार के एक सवाल का जवाब देते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री महेश शर्मा ने राज्यसभा में इस मुद्दे को शांत किया. केंद्र सरकार द्वारा उस क्षेत्र के यात्रा प्रतिबन्ध को दूर करने के लिए जंगल से होते हुए सड़क बनाने के फैसले पर सवाल उठाया गया था.

“कर्नाटक सरकार ने बंदीपुर टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले NH-212 पर नौ घंटे के रात्रि यातायात प्रतिबंध को लगाने और साथ ही सड़क निर्माण का विरोध किया था. वास्तव में, हमने थिथीमठी-गोनिकोप्पा-कुट्टा से गुजरने वाले वैकल्पिक मार्ग को मजबूत करने का सुझाव दिया है“ मंत्री ने इसके जवाब में कहा.

 

कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन

‘सेव बंदीपुर’ बैनर के नीचे कई कार्यकर्ताओं ने इस कदम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. भारतमाला परियोजना के एक हिस्से के रूप में, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा, राष्ट्रीय राजमार्ग 766 पर 1 किमी के चार एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाने थे.

अगस्त 2018 में सड़क मंत्रालय और परिवहन सचिव वाईएस मलिक और कर्नाटक के मुख्य सचिव के बीच एक निश्चित संवाद के बाद कार्यकर्ताओं में खलबली मच गई थी. पत्र में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पीडब्ल्यूडी मंत्री एचडी रेवन्ना के बीच परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक मौखिक समझौते के बारे में बात की गई थी.

रात्रि यातायात प्रतिबंध (9 बजे से शाम 6 बजे) के वापस लेने का भी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था. 2009 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रतिबंध लागू हुआ था. इसी राजमार्ग पर 2004 से 2007 के बीच न्यूनतम 215 जानवर मारे गए थे.

तर्कसंगत केंद्र के निर्णय की सराहना करता है. हमारे देश की जैव विविधता खतरनाक दर से नष्ट होने के साथ, इन जानवरों को बचाने का एक तरीका वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

 

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