ख़बरें

छोटे व्यवसायों के लिए राहत: जीएसटी छूट सीमा 20 लाख रुपये से 40 लाख रुपये कर दी गयी

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express

January 12, 2019

SHARES

माल और सेवा कर (GST) परिषद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME), को राहत देते हुए 11 जनवरी को उद्यमों पर कर के बोझ को कम करने के साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. लाइवमिंट के अनुसार परिषद के अध्यक्ष और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जिन फैसलों की घोषणा की उनमें मुख्य हैं -छूट की सीमा को दोगुना करना, छोटे सेवा प्रदाताओं के लिए कंपोजिशन स्कीम का विस्तार करना और केरल को आपदा राहत के लिए उपकर एकत्र करने की अनुमति देना शामिल है.

अधिकांश राज्यों के लिए जीएसटी छूट की सीमा दोगुनी करके 40 लाख और उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी राज्यों के लिए 20 लाख कर दी गई है. वर्तमान में यह सीमा अधिकांश राज्यों के लिए 20 लाख और उत्तर-पूर्वी और पहाड़ी राज्यों के लिए 10 लाख है. इसका मतलब यह है कि ज्यादातर राज्यों में 40 लाख तक का सालाना कारोबार और दूसरे राज्यों में 20 लाख तक कारोबार करने वालों को जीएसटी का भुगतान करने की छूट है, अगर वे ऐसा करना चाहते हैं. जिन राज्यों को डर है कि इससे राजस्व में भारी गिरावट आ सकती है और टैक्स जुटाने का दायरा घट सकता है. वह जीएसटी परिषद सचिवालय को एक सप्ताह के भीतर सूचित कर मौजूदा 20 लाख छूट की सीमा पर रहने का विकल्प चुन सकते हैं.

जीएसटी कंपोजिशन स्कीम के लिए सीमा जिसके तहत छोटे व्यापारी और व्यवसाय टर्नओवर के आधार पर 1 प्रतिशत कर का भुगतान करते हैं, को वर्तमान सीमा से 1.5 करोड़ तक बढ़ा दिया गया है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी है. 50 लाख तक के सालाना टर्नओवर वाले छोटे सर्विस प्रोवाइडर भी 6% टैक्स रेट पर कंपोजीशन स्कीम का लाभ उठा सकते हैं.

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, जेटली ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “जीएसटी का एक बहुत ही बड़ा हिस्सा औपचारिक क्षेत्र और बड़ी कंपनियों से आता है. इनमें से प्रत्येक निर्णय एसएमई (स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज) की मदद करने के लिए है. हमने उन्हें विभिन्न विकल्प दिए हैं. यदि वे सेवा क्षेत्र में हैं, तो वे 6 प्रतिशत कंपाउंडिंग प्राप्त कर सकते हैं, यदि वे मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग क्षेत्र में हैं तो 1.5 करोड़ रुपये तक का व्यापार करते हैं, तो उन्हें 1 प्रतिशत कंपाउंडिंग मिल सकती है. वे 40 लाख रुपये तक की छूट का उपयोग कर सकते हैं.”

राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे ने स्पष्ट किया कि अंतर-राज्यीय लेनदेन के लिए छूट की सीमा लागू नहीं है. उन्होंने कहा कि छूट की सीमा को दोगुना करने से राजस्व में बड़ी कमी नहीं होगी, क्योंकि जब सीमा 20 लाख थी, 20 लाख से नीचे के लगभग 10.93 लाख करदाता करों का भुगतान करते थे.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, केरल बाढ़ से हुए भारी नुकसान को ध्यान में रखते हुए, परिषद ने केरल को अंतर-राज्य आपूर्ति पर दो साल तक के लिए 1% तक उपकर लगाने की अनुमति दी है.

चूंकि अचल संपत्ति और लॉटरी पर कर की दर के बारे में कोई सहमति नहीं बनाई जा सकती है, इस मामले को देखने और परिषद के लिए अपना मूल्यांकन पेश करने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया गया था.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...