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नागपुर व्यवसायी के बेटे हरसाहेब बवेजा के तथाकथित हत्या के पीछे की गुत्थी 4 साल बाद भी अनसुलझी है

तर्कसंगत

Image Credits: Facebook/ Harsaheb Baweja

January 14, 2019

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नागपुर कड़बी चौक के निवासी हरसाहेब बवेजा (24) की तथाकथित हत्या की गुत्थी आज तकरीबन 4 साल बाद भी नहीं सुलझी है. इस घटना में अभियुक्त बनाये गए 5 आरोपियों पर मुकदमा गोवा कोर्ट में चल रहा है. मृतक के परिजन पुलिस के रवैय्ये और शुरूआती जांच में की गयी ढिलाई को अभी तक किसी ठोस निर्णय पर न पहुँच पाने की वजह मान रहे हैं. साथ ही इसमें केस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को नज़रअंदाज़ करने की शिकायत भी कर रहे हैं.

बता दें कि हरसाहेब बवेजा की लाश संदिग्ध और काफी बुरी अवस्था में गोवा के केरी अरम्बोल पहाड़ी पर 31 दिसंबर 2015 को मिली थी.

 

घटनाक्रम

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार हरसाहेब अपने 4 दोस्त और ड्राइवर के साथ 25 दिसंबर 2015 को गोवा पहुँचने के बाद अगले दो दिन कैसिनो और बाकि जगहों पर घूमते है. 28 दिसंबर 2015 की सुबह वह अपने दोस्तों के साथ अरम्बोल स्थित स्वीट वाटर लेक गए. पुलिस के रिपोर्ट के अनुसार वहां पहुँचने पर दो दोस्त गाड़ी में ही रुक जाते हैं, और ड्राइवर सहित बाकि 4 लोग समुद्र तट की तरफ जाते हैं, और उसके बाद गौरांग जैन और हरसाहेब पहाड़ पर चढ़ने का फैसला करते हैं. इसके बाद दोपहर तकरीबन 12 बजे ड्राइवर विशाल को गौरांग का फ़ोन आता है कि हरसाहेब लापता है जिसके बाद शाम 5.30 बजे पुलिस में हरसाहेब की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई जाती है. 30 दिसंबर को पुलिस द्वारा सख्ती से दोस्तों से पूछताछ करने पर दोस्त ये क़ुबूल करते हैं कि गौरांग 28 दिसंबर 2015 को शाम 4 बजे जब पहाड़ी से नीचे आया तो उसने बताया कि हरसाहेब की मृत्यु उसके सामने हुई, और डर के कारण इन लोगों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा कर पुलिस को गुमराह किया. 31 दिसंबर को हरसाहेब की लाश उसी पहाड़ के 10 * 15 फ़ीट के गड्ढे में झाड़ियों से ढकी हुई मिलती है और जूते दो अलग अलग जगहों पर पाए जाते हैं. 

पोस्ट मोर्टेम की रिपोर्ट में हरसाहेब के शरीर पर किसी भी तरह की चोट की पुष्टि नहीं हुई है. हरसाहेब के विसेरल ऑर्गन की मेडिकल जांच गोवा के मेडिकल कॉलेज और हैदराबाद में करवाए जाने पर भी मौत के कारण का पता नहीं चल पाया है जो की अपने आप में एक चौंकाने वाली बात है.

 

 

परिवारवालों का पक्ष

तर्कसंगत से बात करते हुए मृतक के मौसेरे भाई मनप्रीत ने बताया कि नागपुर स्थित 55 वर्षीय व्यापारी हरपाल सिंह बवेजा के एकलौते बेटे 24 वर्षीय हरसाहेब बवेजा, 23 दिसंबर 2015 की शाम नागपुर से रवाना हो कर 24 दिसंबर की सुबह पुणे पहुंचे और दोपहर में अपने 4 दोस्तों (गौरांग जैन 19, आयुष दीपक भरद्वाज 18, समर्थ बजाज 19, रोहन गुप्ता 19) के साथ महेंद्रा एक्सयूवी (MH-40-AC-9188, ड्राइवर विशाल जावेरचंद सावला, 33) से गोवा के लिए रवाना हुए. 24 दिसंबर 2015 से लेकर 27 दिसंबर तक वह अपने परिवार के संपर्क में थे. 28 दिसंबर 2015 को उन्हें शाम 6.30 बजे पुणे से वापस नागपुर के लिए ट्रैन पकड़नी थी, इसलिए हरसाहेब की मां यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह समय पर पुणे पहुंचे और अपनी ट्रेन में सवार हो जाए हरसाहेब को फोन करती हैं. शुरू में हरसाहेब कॉल का जवाब नहीं दे रहे थे बार बार कॉल करने पर चारों में से एक दोस्त आयुष दीपक भारद्वाज ने फ़ोन उठाकर कहा कि “हरसाहेब अभी आस पास नहीं है और जब आएगा तो वह कॉल करेगा.”  बाद में सारे दोस्तों के नंबर स्विच ऑफ आने लगे. वापस से शाम 6.30 बजे आयुष भरद्वाज द्वारा ने फोन कर के बताया कि हरसाहेब नहीं मिल रहा है.

मनप्रीत के अनुसार यह खबर मिलते ही हरसाहेब के परिवार वाले 29 दिसंबर को सुबह 7.15 बजे अरम्बोल पुलिस स्टेशन पहुँच गए, जहाँ उन्हें बताया गया कि हरसाहेब के दोस्त भी आने वाले हैं जिसके बाद हरसाहेब की खोज की जाएगी, मगर उनके दोस्त दोपहर तक नहीं आते, इस बीच पुलिस का एक दल मनप्रीत के साथ उस पहाड़ी पर खोजबीन करने जाता है जहाँ सारे दोस्त अंतिम बार गए थे, मगर पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगता. हरसाहब को खोजने की कोशिश अगले दो दिन और चलती है, जब उनके दोस्त पुलिस दल के साथ केरी अरम्बोल पहाड़ी पर जाते हैं और उन्हें ढूंढने की कोशिश करते हैं मगर हरसाहेब का कोई पता नहीं लगता. खोजने के दौरान परिवारवालों का आरोप है कि गौरांग बार बार उन सबको गुमराह करने की कोशिश करता है. 31 दिसंबर 2015 पुलिस के खोज करने के तरिके से असंतुष्ट परिवार वाले जब एफआईआर लिखवाने की बात करते हुए पहाड़ी पर से नीचे उतर कर डीजीपी ऑफिस जा रहे होते हैं तभी उन्हें रास्ते में खबर मिलती है कि हरसाहेब की लाश मिल गयी है, जिसे संदेह के नज़र से देखा जा रहा है. मनप्रीत ने यहाँ तक बताया कि जिस जगह पर मनप्रीत की लाश मिली उस जगह से वे लोग कई बार गुज़रे थे मगर उस समय गौरांग ने उस जगह के बारे में नहीं बताया था.

 

वह जगह जहाँ पर हरसाहेब की लाश पाई गई. स्रोत: नागपुर टुडे

 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार 3 दिसंबर 2015 को गोवा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चारों दोस्त और ड्राइवर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया जिसमें दफा 304 (लापरवाही के कारण मृत्यु), 201 (साक्ष्य को मिटाना), 177 (पुलिस को गुमराह करना), 34 (सामान्य इरादा) के तहत अभियुक्त बनाया गया है. चार्जशीट में पुलिस ने गौरांग, आयुष, समर्थ, रोहन और ड्राइवर विशाल पर जान बूझकर 24 वर्षीय हरसाहेब को मेडिकल सहायता नहीं देने के लिए दोषी ठहराया. पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि उन सबों ने हरसाहेब को भूम प्लेटो के जंगल में गुम होने की बात कर पुलिस को गुमराह किया तथा साथ ही साक्ष्य को मिटाने की कोशिश की.

 

स्रोत: नागपुर टुडे

 

परिवारवालों का गौरांग जैन तथा बाकियों पर शक

तर्कसंगत से बात करते हुए मनप्रीत ने चारों दोस्तों, ड्राइवर और पुलिस के भूमिका पर संदेह व्यक्त करते हुए कुछ महत्वपूर्ण मसलों पर प्रकाश डालने की कोशिश की है. उनका मानना है कि यह लापरवाही के कारण होने वाली मृत्यु नहीं है बल्कि हरसाहेब की हत्या हुई है. उनके द्वारा उठाये गए कुछ संदेहास्पद सवाल:

  1. गौरांग और बाकी दोस्तों ने हरसाहेब के गुमशुदा होने की खबर घरवालों को शाम 6 बजे क्यों दी, जबकि उसके घर वाले लगातार उनके फ़ोन से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे?
  2. जब हरसाहेब नहीं मिला तो उसके दोस्तों ने स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद क्यों नहीं ली, जब उनकी गलती नहीं थी तो उन्हें डरने का भी कोई सवाल नहीं बनता था ?
  3. गौरांग जैन के बार बार व्यक्तव्य बदलने पर भी पुलिस ने समय रहते उससे सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की?
  4. पुलिस द्वारा जमा किये गए रिपोर्ट के अनुसार 30 दिसंबर को हरसाहेब के दोस्तों ने कुबूला कि गौरांग ने अपने सामने हरसाहेब की मृत्यु की बात बताई, तो उसी वक़्त गौरांग को हिरासत में लेकर उस जगह का पता क्यों नहीं लगाया गया?
  5. परिवार का दावा है कि उनके गोवा पहुँचने से पहले गौरांग जैन के परिवार वाले उनसे पहले कैसे और क्यों पहुंचे हुए थे?
  6. पहले दिन से ही डॉग स्क्वाड की मांग करने पर भी परिवारवालों की मांग क्यों नहीं सुनी गई?
  7. शव के पास मिले 4-5 पानी के बोतल की फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं कराइ गयी?
  8. हरसाहेब का बटुआ आज तक नहीं मिला है उसका फ़ोन गौरांग के पास कैसे पाया गया ?
  9. हरसाहेब के फ़ोन रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच क्यों नहीं की गयी?
  10. हरसाहेब के जूते उसके पाए जाने वाले जगह से अलग अलग जगहों पर कैसे पाए गए?
  11. हरसाहेब की पतलून कमर से काफी नीचे खिसकी हुई थी जैसे कि उसे घसीटा गया हो, पुलिस ने इस और ध्यान क्यों नहीं दिया?
  12. गौरांग के शरीर पर चोट और छिलने के निशान थे, पुलिस ने उसकी मेडिकल जांच क्यों नहीं करवाई ?
  13. हरसाहेब के घरवालों का कहना है कि इस मामले में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाले ड्राइवर विशाल की डेथ सर्टिफिकेट कोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है, मगर उसमें भी उसके मौत का कारण नहीं दिया गया है?
  14. हरसाहेब के घरवालों का दावा है कि ड्राइवर अभी भी ज़िंदा है मगर पुलिस उनकी इस मामले में सहायता नहीं कर रही है.

इस पूरे प्रक्रिया से हताश और निराश हो कर हरसाहेब के रिश्तेदारों ने सीबीआई जांच की मांग की है, मगर जब तक गोवा कोर्ट किसी नतीजे पर नहीं आती उनकी यह मांग भी पूरी नहीं हो सकती. कोर्ट की अपनी विभन्न  प्रक्रिया के कारण हरसाहेब अभी तक न्याय से वंचित है.

 

तर्कसंगत  ने इस पूरे विषय में और जानकारी तथा पुलिस के पक्ष को जानने के लिए अरम्बोल पुलिस, पेरियम पुलिस से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की मगर उन्होनें बताया कि केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर की जा चुकी है और इसके अलावे वह और कोई भी जानकारी नहीं दे सकते.

 

तर्कसंगत अपने माध्यम से यह कोशिश करता है कि इस केस में हरसाहेब के रिश्तेदारों द्वारा उठाये गए सवाल की जांच हो, केस से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर तवज्जो दी जाये, और हरसाहेब के तथकथित हत्या के पीछे की सच्चाई सामने आये साथ ही इस चीज़ की भी सीबीआई जांच हो कि हरसाहेब की फॉरेंसिक रिपोर्ट में मृत्यु का कारण कैसे स्पष्ट नहीं है?

 

 

 

   

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