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असम सिंगर जुबीन गर्ग ने सीएम से पुछा “क्या 2016 में मेरी आवाज से आपको जो वोट प्राप्त हुए उन्हें वापस ले सकता हूँ”

तर्कसंगत

Image Credits: NDTV

January 15, 2019

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असम के लोकप्रिय गायक जुबेन गर्ग ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मांग की कि वह “वोट” उन्हें वापस लौटाए जाएं जो उन्होनें 2016 के चुनाव के वक़्त गा कर बीजेपी के लिए माँगा था. उन्होंने एक खुले पत्र द्वारा मुख्यमंत्री से नागरिक विधेयक पर रोष व्यक्त करते हुए यह बात कही.

न्यूज़18  के रिपोर्ट के अनुसार गर्ग ने अपने आधिकारिक पेज पर एक फेसबुक पोस्ट में, गीत गाने के लिए मिले पारिश्रमिक को भी वापस करने की पेशकश की है.

 

गर्ग की फेसबुक पोस्ट

राज्य भर में काले झंडे द्वारा किये जा रहे विरोध का जिक्र करते हुए उन्होनें लिखा “प्रिय सर्बानंद सोनोवाल दा, आपको कुछ दिन पहले एक पत्र लिखा था. लगता है कि आप जवाब देने के बजाय काले झंडे गिनने में बहुत व्यस्त हैं ” उनका यह पोस्ट 45 मिनट से भी कम समय में, 800 से अधिक शेयर के साथ वायरल हो गया.

गर्ग ने अपनी पोस्ट में आगे  कहा “क्या मुझे 2016 में मेरी आवाज़ का उपयोग करके आपने जो वोट प्राप्त किये वो वापस मिल सकते हैं? मैं पारिश्रमिक वापस करने के लिए तैयार हूं.” उनके 8.58 लाख से अधिक फेसबुक फॉलोअर्स हैं.

 

राज्य भर में विरोध प्रदर्शनों के साथ, गर्ग ने धमकी दी थी कि अगर नागरिक (संशोधन) विधेयक सात दिनों के भीतर वापस नहीं लिया गया तो वह खुद आंदोलन शुरू करेंगे. मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए एक भावनात्मक पत्र पोस्ट करते हुए, गायक ने अपने हाथ में पत्र के साथ अपनी एक तस्वीर भी पोस्ट की थी. “मैं एक सप्ताह के लिए असम में नहीं रहूँगा. मेरे लौटने से पहले सरबदा कुछ कार्रवाई करे तो अच्छा रहेगा. अन्यथा इस बार, मैं अपने दम पर आंदोलन करूंगा. मैं क्या करूंगा, मुझे नहीं पता, ”उन्होंने लिखा.

 

यह कहते हुए कि बिल ने असमिया लोगों की भावनाओं को आहत किया है, बॉलीवुड के पार्श्व गायक पापोन ने भी इसका विरोध किया है.

 

नागरिकता (संशोधन) विधेयक

8 जनवरी को, लोकसभा ने नागरिक (संशोधन) विधेयक 2019 पारित किया, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की मांग कर रहा था. गृह मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, इससे हिंदुओं, जैनियों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए धार्मिक अल्पसंख्यकों को मदद मिलेगी. भारत में छह साल के निवास के बाद, उन्हें देश में स्थायी नागरिकता मिल सकती है.

हालाँकि, इस बिल के पारित होने के बाद, पूरे असम और उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए. ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) द्वारा 8 जनवरी को 11 घंटे के असम बंद का आह्वान किया गया, साथ ही 30 और स्वदेशी संगठनों को भी शामिल किया गया. नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ, दिल्ली और असम के तिनसुकिया में किसानों और युवाओं द्वारा नग्न विरोध प्रदर्शन किया गया.

 

 

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