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रिपोर्ट: टेक्नोलॉजी के अधिक इस्तेमाल से छोटे बच्चों में पेंसिल पकड़ने की और लिखने की क्षमता घट रही है

तर्कसंगत

January 16, 2019

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वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा हाल में किये गए एक अध्ययन के जारी किये गए रिपोर्टों से पता चला है कि बढ़ते टेक्नोलॉजी के साथ, बच्चों को पेन और पेंसिल पकड़ना मुश्किल हो रहा है.

रिपोर्टों में कहा गया है कि टचस्क्रीन फोन और टैबलेट के अधिक उपयोग के कारण, बच्चों की उंगली की मांसपेशी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो रही है.

द गार्जियन से बात करते हुए हार्ट ऑफ़ इंग्लैंड फाउंडेशन एनएचएस ट्रस्ट के हेड पेडियेट्रिक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट सैली पैन ने कहा “आज के बच्चे दस साल पहले के बच्चों की तरह, हाथ की ताकत और निपुणता के साथ स्कूल नहीं आ रहे हैं, स्कूल में आने वाले बच्चों को पेंसिल दी जा रही है, लेकिन वे इसका सही से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है. क्यूंकि उनमें वो बेसिक मूवमेंट स्किल ही नहीं है.”

“एक पेंसिल को सही से पकड़कर लिखने के लिए, आपको अपनी उंगलियों के मांसपेशियों पर मजबूत नियंत्रण की आवश्यकता होती है; उस कुशलता को विकसित करने के लिए बच्चों को काफी अभ्यास करने की आवश्यकता है.”

पैन ने कहा कि पिछली पीढ़ियों के मुकाबले आज के समय में खेलने का स्वरूप बदल गया है, आज एक बच्चे को आईपैड देना ज्यादा आसान है बजाये इसके कि उसे मांसपेशियों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाए जैसे बिल्डिंग ब्लॉक, काटना और चिपकाना, या खिलौने और रस्सी को खींचना. इस वजह से,वो कुशलता विकसित नहीं कर रहे हैं जो उन्हें एक पेंसिल को पकड़ने में मदद करती है.”

नेशनल हैंड राइटिंग एसोसिएशन की वाइस चेयरमैन मेलिसा प्रुनटी, जो लंदन के ब्रुनेल यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च क्लिनिक चलाती हैं, उन्होंने कहा, “एक समस्या यह है कि लिखावट हर बच्चे में अलग अलग तरह से विकसित होती है.”

प्रुनटी एक पेडियेट्रिक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट है जो बच्चों में लिखावट की कठिनाइयों को समझने में माहिर है. वह चिंतित है कि बच्चों में देर से लिखावट की कुशलता विकसित होने के पीछे टेक्नोलॉजी का अत्यधिक उपयोग है.

“शोध के बिना, हम इस बारे में बहुत सी धारणाएँ बना लेते हैं कि बच्चा अपेक्षित उम्र में क्यों नहीं लिख पा रहा है और जब टेक्नोलॉजी से जुड़ा कोई कारण होता है तो हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं” उन्होनें कहा.

रॉयल कॉलेज ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट के सहायक निदेशक करिन बिशप ने द गार्जियन को बताया, “इस बात में कोई दो राय नहीं है कि टेक्नोलॉजी ने दुनिया को बदल दिया है जहाँ टेक्नोलॉजी के उपयोग के कई सकारात्मक पहलू हैं, वहीं एक पहलु यह भी है कि स्थायी जीवनशैली के कारण बच्चे घर पर सोशल मीडिया में ज़्यादा व्यस्त रहने लगे हैं और खेल कूद में उनकी भागीदारी कम होती जा रही है.

यह एक गंभीर समस्या है जब घर में बच्चे फोन और टैबलेट का उपयोग करते हुए अपना अधिकांश समय बिताते हैं भारत में, इस मुद्दे पर प्रकाश डाला जाना बाकी है.

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