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यूएई: 17 महीने से अधिक बिना वेतन के, 8 भारतीय नाविक त्यागे हुए जहाज में फंसे, मदद की गुहार लगा रहे हैं

तर्कसंगत

January 16, 2019

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तंजानिया और सूडान के दो अन्य समुद्री नाविकों सहित शारजाह लंगर में आठ भारतीय नाविक एक परित्यक्त (त्याग दिए गए) जहाज में फंस गए हैं. यूएई के तट रक्षक ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं और जहाजों के प्रबंधन वाली कंपनी ‘एलीट वे मरीन सर्विसेज’ द्वारा उनका वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है.

सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक, शाहीन सैय्यद, ‘जस्टिस अपहेल्ड’ के साथ काम करती हैं, वह इन नाविकों की सक्रीय रूप से मदद कर रहीं हैं, अपने ट्विटर हैंडल पर उन्होनें वीडियो पोस्ट किया है और सभी से उनकी मदद करने का आग्रह कर रही हैं. इन नाविकों की मदद के लिए एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किया जा सकता है.

 

जहाज में फंसे नाविक 

जिस जहाज में नाविक फंसे हुए हैं, वह ‘एम वी अज़राकमोइया’ है, यह एक डेक जहाज है, जहाँ से लोगों को अभी तक बचाया नहीं जा सका है. आठ भारतीय चालक दल के सदस्य कैप्टन अय्यपन स्वामीनाथन, रमेश गडेला, याला राव चेक्का, भरत हरिदास, गुरुनाथन गणेशन, आलोक पाल, नस्कर सौरभ और राजीब अली हैं.

उनके पासपोर्ट 15 अप्रैल, 2018 को जब्त कर लिए गए थे. सभी चालक दल के दस्तावेज और जहाज के मूल दस्तावेज भी एकत्र कर लिए गए हैं. कई सदस्यों के वेतन का भुगतान नियमित रूप से नहीं किया गया है. शुरुआत में, उन्हें दो से तीन महीने का वेतन दिया गया था, लेकिन बाद में उनके वेतन को पूरी तरह स रोक दिया गया था.

कैप्टन अय्यपन स्वामीनाथन ने तर्कसंगत से बात करते हुए कहा कि उनके जहाज को हिरासत में लिया गया है क्योंकि कंपनी को बंकर की आपूर्ति करने वाली कंपनी को $ 144K देना था. बंकर आपूर्ति कंपनी के अदालत में जाने के बाद, जहाज को हिरासत में लिया गया है.

 

 

धन की कमी के कारण, जहाज प्रबंधन ने  जहाज को किसी भी गंतव्य जगह पर तैनात नहीं किया है. जहाज मूल रूप से एक तेल टैंकर है. जहाज प्रबंधन द्वारा नाविकों को तट पर कदम रखने की अनुमति नहीं दी गयी है,

 

दूसरे त्यागे हुए जहाज

कंपनी ने 17 अन्य जहाजों को भी छोड़ दिया है. उनमें से, दस जहाज सक्रिय हैं, जिनमें से छह शारजाह लंगर में हैं, उनमें से एक शारजाह लंगर से बीस मील दूर और दो हमारिया बंदरगाह में और एक खोरफाकन में है. इन सभी जहाजों में करीब 40 लोग फंसे हुए हैं, जिनमें 31 भारतीय शामिल हैं.

खोराफक्कान के सहिया अरुण जेवियर ने तर्कसंगत से बातचीत में कहा, “कंपनी अगस्त 2016 तक नियमित रूप से वेतन का भुगतान कर रही थी, लेकिन बाद में समस्याएं शुरू होने लगीं.”  उन्होंने आगे कहा कि कंपनी ने उन्हें बताया था कि अब्दुल्ला जहाज को बेच दिया गया है, और उस पैसे के साथ, वे उनके वेतन का भुगतान करेंगे.

“भारतीय मूल्य के अनुसार, हम सभी के वेतन मिलकर 70 करोड़ होंगे, लेकिन जहाज को स्क्रैप में बेचने के बाद भी  2.5 करोड़ से अधिक नहीं मिलेगा.” उन्होंने इन वादों को फर्जी बताया है.

नाविकों की समस्याएँ

जहाज भयानक स्थिति में हैं. कंपनी को सूचित किए जाने के बावजूद आवश्यक दवाएं नहीं दी गयी हैं, जहाज की सभी दवाएं समाप्त हो गई हैं और नई दवाओं की आवश्यकता है. चालक दल के सदस्यों को शायद ही कोई सुविधा मिल रही  है और साफ पानी और ईंधन की भी कमी है. उनमें से कुछ तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं.

फारवर्ड सीमैन यूनियन ऑफ़ इंडिया ने अपनी ओर से लिखे पत्र में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से, 18 महीने से  जहाज में फंसे नाविकों की स्थिति के बारे में बताते हुए मदद मांगी है. 

 

 

“जहाज पर हालत गंभीर है, हमें पर्याप्त अनाज  ताजा पानी या दवाएं नहीं मिल रही है.” नाविक पंकज दिगारी ने कहा. टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह भी बताया कि पंकज के भाई अजय दिगारी ने दावा किया कि उनका परिवार वित्तीय संकट का सामना कर रहा है और जहाज में, उनका भाई अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है. जहाज में पर्याप्त डीजल की आपूर्ति नहीं होने के कारण कई घंटे ऐसे होते हैं जब पूरी तरह से अँधेरा रहता है.

 

तर्कसंगत अधिकारियों से नाविकों की मदद करने और उन्हें जल्द से जल्द अपने परिवार के पास वापस भेजने में मदद करने का आग्रह करता है.

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