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तमिलनाडु: जल्लीकट्टू महोत्सव के पहले तीन दिनों में 70 से अधिक घायल

तर्कसंगत

January 18, 2019

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रिपोर्ट के अनुसार, जल्लीकट्टू त्योहार के तीन दिनों के भीतर तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में लगभग 76 लोग घायल हो चुके हैं. न्यूज टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पलामेडु जिले में, 16 जनवरी, 2019 को त्योहार के कारण उन्नीस लोगों को चोटें आई हैं. इस क्षेत्र में बुल-टैमिंग उत्सव के लिए लगभग 165 बैल सम्मलित किए गए हैं. क्षेत्र में उत्सव का उद्घाटन अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईडीएमके) के विधायक मणीकम ने किया.

मणीकम ने एएनआई को बताया कि अलंगानल्लूर और पलामेडु में होने वाले जल्लीकट्टू कार्यक्रम विश्व प्रसिद्ध हैं. तमिलनाडु सरकार ने राज्य में कुछ स्थान तय किये हैं जहाँ त्योहार पूरे महीने विभिन्न तिथियों में आयोजित किए जा सकते हैं. थचनचुरिची, कीलापनैयूर, वन्नियनिविदूथी, मंगथेवनपट्टी और विरालीमालई जैसे क्षेत्रों में पहले से ही त्योहार आयोजित किए जा चुके हैं.

 

थचनुरिची में भाग लेने वालों की स्वास्थ्य जांच की गयी

14 जनवरी, 2019 को, इस त्यौहार का पहला दिन था और  इस आयोजन को सरकार की स्वीकृति मिली हुई थी. इसी दिन पुदुक्कोट्टई जिले के गंधर्वकोट्टई तालुक के थचनूरिची गांव में लगभग 13 लोग घायल हो गए. द हिंदू के रिपोर्ट के अनुसार, इस दिन उत्सव में 454 बैल देखे गए और यह आयोजन लगभग पांच घंटे तक चली. राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने  उत्सव में भाग लेने वाले इच्छुक लोगो के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाए थे. चेक-अप के बाद, उनमें से 279 को कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति दी गई, और बाकी को उच्च रक्तचाप सहित विभिन्न चिकित्सा आधारों पर खारिज कर दिया गया. क्षेत्र में कुछ एंबुलेंस तैनात की गईं. सोमवार को इस घटना में चार घायलों को तंजावुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और नौ अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया गया.

 

मदुरै में रिंग में प्रवेश करने से पहले जीवन बीमा के लिए नामांकन करने वाले प्रतिभागी

न्यूज़ मिनट के रिपोर्ट के अनुसार अवनीपुरम में, मदुरै जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जल्लीकट्टू कार्यक्रम में लगभग 44 लोग घायल हो गए. इसमें हैंडलर, बुल टैमर और साथ ही आम जनता भी शामिल थे. इनमें से आठ को जिले के सरकारी राजाजी अस्पताल ले जाया गया. वे खतरे से बाहर हैं.  टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि मदुरै जिला प्रशासन ने बुल टेमर को भाग लेने से पहले आकस्मिक मृत्यु के लिए 2 लाख रुपये की कवरेज के साथ अनिवार्य बीमा योजना करवाई गयी, यह पहली बार था कि प्रशासन की ओर से इस आयोजन में लोगों का जीवन बिमा कराया गया हो.

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने त्योहार के दौरान होने वाली अत्यधिक पशु क्रूरता की शिकायत मिलने के बाद त्योहार पर प्रतिबंध लगा दिया था हालांकि, 2017 में, लोकप्रिय मांग के कारण, राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करने के लिए एक कानून पेश किया.

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