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कोलकाता की यह टीम बिना किसी सहारे के आवारा कुत्तों को स्वस्थ जीवन देने के लिए काम कर रही है

तर्कसंगत

January 18, 2019

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ऐसे समय में जब कुत्तों के प्रति अमानवीय क्रूरता हमें शर्मसार कर रही है, उत्तरी कोलकाता के एक छोटे से क्षेत्र में कुछ लोग मिलकर कुत्तों की देखभाल करके इस धरना को गलत साबित कर रहे हैं. मज़े की बात ये है कि ये लोग किसी एनजीओ के साथ पंजीकृत नहीं हैं. उन्हें इसके बदले में कुछ नहीं मिलता है. आवारा कुत्तों के लिए कुछ अच्छा करने का उनका प्रयास इन जानवरों के लिए उनके प्यार के ही कारण है.

तापसी डे, रोनिता बनर्जी, स्निग्धा चक्रवर्ती, महुआ दत्ता और शांतनु डे ऐसे पांच लोग हैं, जिन्होंने ‘एंजल्स इन रफ’ नाम से एक स्वतंत्र संगठन बनाया है और आवारा कुत्तों के कल्याण के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं. सौ से अधिक कुत्तों को खिलाने से लेकर उन सभी को टीका लगाने तक, बीमार लोगों को चिकित्सा प्रदान करने से लेकर उन्हें खुशहाल घर दिलाने तक, ये सबकुछ कर के ये लोग वास्तव में एक मिसाल कायम कर रहे हैं.

 

ख़ुराक और टीका लगाना

तर्कसंगत से बात करते हुए रोनिता ने कहा “हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे इलाके में कोई भी कुत्ता ख़ाली पेट न सोये, हम एक एनजीओ के साथ पंजीकृत नहीं हैं और हम इस काम के बदले किसी चीज़ की उम्मीद नहीं करते हैं, हम ऐसा करते हैं क्योंकि हमें ऐसा करना पसंद हैं. ये कुत्ते हमारे बच्चों से कम नहीं हैं.

100 से अधिक कुत्तों के लिए, ये लोग अपने घरों में भोजन तैयार करते हैं. ये सभी डॉग लवर हैं और किसी ना किसी मौके पर एक-दूसरे से मिलते रहते हैं. आपस में जुड़ने से पहले, यह सभी अपने सामर्थ्य के हिसाब से कुत्तों  की देखभाल करते थे, लेकिन अब एक टीम में होने के नाते, इनके इस काम को और मज़बूती मिली है.

“सिर्फ चार या पांच कुत्तों से, हमने 10 और फिर 20 को खिलाना शुरू किया, आज हम 100 से अधिक कुत्तों को पालते हैं. मैं एक कार्यालय में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक काम करती हूं, जिसके बाद मैं लगातार इलाके में कुत्तों को खिलाने, टीका लगाने, कुत्तों का इलाज करने जाती हूं. मेरा कार्यक्रम व्यस्त है, लेकिन मैं अपने काम का आनंद लेती हूं.” रोनिता ने कहा.

स्निग्धा के पिता के घर पर, उसने एक छोटा से बेड़ा बनाया है जहाँ वह उन कुत्तों को रखती है जो बीमार हैं और जब तक वे ठीक नहीं हो जाते हैं, उन्हें वहीँ रखा जाता है. उसके बाद, कुछ लोग उन्हें गोद ले लेते हैं.

तर्कसंगत के साथ बातचीत में स्निग्धा कहती हैं “जब आप हर दिन इतने सारे कुत्तों को खिलाने जाते हैं, तो यह स्वाभाविक है कि आप उनमें से कई को चोट लगी होती है. वे सड़कों पर रहते हैं, एक-दूसरे से लड़ते हैं और अक्सर चोट गहरी होती है. हम लगातार घावों की ड्रेसिंग करते हैं. हम सभी के घर या कार्यालय में काम होता है, लेकिन हम अपने काम के प्रति इतने भावुक हो गए हैं कि अब कुछ भी मायने नहीं रखता है.”

समूह में बचाव और गोद लेने की कई कहानियाँ हैं. एक पिल्ला, मणि, बुरी तरह से घायल एक गली में पाया गया था उसे बचाया गया, दवा दी गई, और आज, उसे एक प्यार करने वाला, देखभाल करने वाला घर मिला है.

“कई मौकों पर, हमने कुछ कुत्तों को खो दिया है. ऐसे उदाहरण हैं जब हम उनकी मदद नहीं कर सकते, लेकिन हमने हमेशा पर्याप्त प्रयास किया है.” महुआ ने कहा.

तापसी, जो मैथ्स ट्यूटर हैं, ने तर्कसंगत से बात करते हुए कहा, “शुरू में, जब मैं उन डॉक्टरों के साथ काम करती थी जो हमारे समूह की मदद करते थे, तो मुझसे ख़ून और घाव बर्दाश्त नहीं होते थे. मैं बीमार हो जाया करती थी. लेकिन उन लोगों के लिए कुछ अच्छा करने की चाह बीमारी पर ध्यान नहीं जाने देती. आज, मैं बहुत मजबूत हूं, अब मैं घावों को स्टिच करने और नियमित रूप से कुत्तों को दवा देने में मदद करती हूं.”

 

 

डॉक्टर राया सरकार और शशांक त्रिपाठी उपचार में सहायता करते हैं. तापसी ने कहा कि “नीलू नाम के पिल्ले को किसी ने बुरी तरह से मारा था. हम नहीं जानते कि यह कैसे हुआ, लेकिन हमें संदेह है कि किसी ने उसे चोट पहुंचाने की कोशिश की.  चोट इतनी ज़्यादा थी कि वह मर गया होता , लेकिन हम पूरी रात उसके घाव की देख भाल करते रहे जब तक कि वह सो नहीं गया. हमारे प्रयास अपना काम किया आज, वह स्वस्थ है.

 

पैसे कहां से आते हैं?

एक एनजीओ के रूप में पंजीकृत नहीं होने के कारण, समूह को कोई धन नहीं मिलता है. भोजन और उपचार में जाने वाले सभी पैसे समूह द्वारा स्वयं जुटाए जाते हैं. कभी कुछ पड़ोसी मदद करते हैं; उनमें से एक, सर्बनि सेन, हर महीने दवाओं का खर्च खुद उठाती हैं.

“इस अच्छे काम के लिए, हम अपने दम पर पैसा जमा करते हैं. हम कपड़े और रेस्तरां में इतना पैसा खर्च कर देते हैं, तो जहाँ इसकी आवश्यकता है, उसके लिए कुछ क्यों नहीं करते हैं? हमारी अधिकांश मेहनत की कमाई कुत्तों के इलाज और भोजन में चली जाती है, लेकिन मेरा मानना है कि हम इसका बेहतर उपयोग नहीं कर सकते थे, ”महुआ ने कहा.

 

 

वो अपनी तरफ से कितनी भी कोशिश करें पैसों की दिक्कत आ ही जाती है, उनकी मदद करने के लिए व्यावहारिक रूप से कोई नहीं है.

रोनिता कहती हैं कि “यही कारण है कि हम तुलनात्मक रूप से छोटे क्षेत्र तक ही सीमित हैं. हम दूसरे जगह पर रहने वाले जानवरों की भी मदद करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए हमें और मदद की जरूरत होगी. अंत में, हम पाँच लोगों की एक टीम ही तो हैं.”

हालाँकि, शांतनु के पास कहने के लिए कुछ अलग था “हाँ, एक समूह के रूप में हम छोटे हैं और बड़े क्षेत्रों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है. लेकिन व्यक्तिगत रूप से, मैं कोलकाता के हर क्षेत्र में कुत्तों की मदद करता हूं. मैं और कुछ नहीं करता. मेरे दिन के 24 घंटे इन असहाय प्राणियों की मदद करने में गुजरते हैं. मैं बस शहर के किसी भी हिस्से से कॉल का इंतजार करता हूं, और वहां इनकी मदद करने पहुँच जाता हूँ.

 

बंध्याकरण

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की देखरेख में कई स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी की जाती है. हालाँकि, इस समूह के एक NGO के साथ संबंध हैं, जिसके सदस्य वास्तव में कुत्तों की नसबंदी करने के लिए व्यक्तिगत देखभाल करते हैं.

“मैं खुद नसबंदी प्रक्रिया का हिस्सा रही हूं, और वे कुत्तों की देखभाल अपने बच्चों की तरह करते हैं. अन्य संगठनों के हाथों में, हम सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं. आज तक, इस NGO ने जिन कुत्तों की भी नसबंदी की है, वो सभी स्वस्थ हैं, “अनुष्का लाहा ने कहा, जिन्होंने विप्रो में काम करने से पहले समूह के लिए बहुत मदद की है, अब उन्हें अक्सर रात भर काम करना पड़ता है और इसलिए इन दिनों समूह की मदद के लिए समय नहीं मिलता है.

“नसबंदी पर बहुत बहस हुई है. मुझे यह कहते हुए लोगों के साथ बहुत आलोचना का सामना करना पड़ा है वह कहते हैं कि ये अमानवीय है, यह एक जानवर के सामान्य यौन जीवन को नुकसान पहुँचाता है, और फिर भी वही लोग कुत्तों के अतिव्यापी होने की शिकायत करते हैं. यदि आप जनसंख्या को नियंत्रित करना चाहते हैं लेकिन नसबंदी का समर्थन नहीं करते हैं, तो क्या आपको लगता है कि NRS में जो हुआ वह उचित है? यह महत्वपूर्ण है कि हम उनकी आबादी को नियंत्रित करें, इसका बड़ा कारण क्रूर लोगों द्वारा उनको नुकसान पहुँचाना है. यदि ओवरपॉपुलेशन हुई, तो क्या हर कोई आगे आएगा और उन्हें खिलाएगा, टीकाकरण करेगा और उनका इलाज करेगा? वे वैसे भी मर जाएंगे. आप एक कुत्ते के प्रेमी नहीं हो सकते हैं, लेकिन कम से कम उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाइये.” तापसी ने कहा.

 

 

तापसी ने खुद कई पिल्लों को अपनाया मगर उनमें से केवल एक ही बच पाया है, जम्पु तापसी का बच्चा और सबसे अच्छा दोस्त है.

तापसी ने सभी से एक और निवेदन किया है. “यदि आप एक पालतू जानवर रखना चाहते हैं, तो महंगी नस्लों पर ध्यान देने के बजाय रोड के कुत्तों को अपनाएं. उन्हें भी अच्छे घरों और देखभाल करने वाले माता-पिता की आवश्यकता होती है. मैंने हमेशा महसूस किया है कि उनकी आंखें बोलती हैं और उनके साथ मेरा एक अजीब संबंध है.”

महुआ कहती है कि एक दिन घर लौटते समय, उसने एक घायल पिल्ले को देखा और उसे मदद करने के लिए दूसरों को बुलाया. यही उसके सफर की शुरुआत हुई. उन्होनें महसूस किया कि वहाँ बहुत सारे अन्य कुत्ते पिल्ले पीड़ित हैं, और कोई भी उनकी मदद करने के लिए कुछ भी नहीं करता है. तब से, समूह की मदद से, इलाके का हर कुत्ता स्वस्थ है. एक छोटी सी टीम के प्रयास से जिनके पास अपने काम के बदले कोई भौतिक लाभ नहीं है, एक विशेष इलाके में कई संघर्ष के साथ एक स्वस्थ जीवन दे रहे हैं. जहां एक ओर अपराधी जानवरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह एन्जिल्स इन रफ्फ़ हैं, जो उनके कल्याण के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं.

तर्कसंगत उनके प्रयास, निस्वार्थ स्वभाव और हमें यह विश्वास दिलाने के लिए सलाम करता है कि दुनिया में अच्छे लोगों की कोई कमी नहीं है.

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