सप्रेक

एचआईवी पॉजिटिव युवाओं द्वारा चलाए जाने वाला यह कैफे चाय, कॉफी और खुशी भी देता है

तर्कसंगत

January 21, 2019

SHARES

कैफे पॉजिटिव – एशिया का पहली कॉफी शॉप है जो पूरी तरह से एचआईवी पॉजिटिव लोगों द्वारा चलाया जाता है. दक्षिण कोलकाता में जोधपुर पार्क के प्रमुख स्थान पर स्थित, इस दुकान का उद्देश्य लोगों के मन में एचआईवी के खतरे को कम करना है. साथ ही साथ दूसरे एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से स्वतंत्र होने का एक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है.

यह कैफे संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने वाले सामाजिक उद्यमी कल्लोल घोष के समावेशी सोच की उपज है. तर्कसंगत के साथ बातचीत में, वह कैफे पॉजिटिव के पीछे की कहानी बताते हैं.

‘ऑफ़र’ बंगाल की एक प्रसिद्ध एनजीओ है, जो अपने शहरी केंद्रों में से एक आनंदघर, को वैसे अनाथ बच्चों के लिए समर्पित कर रखा है जो एचआईवी पॉजिटिव हैं. आनंदघर वर्तमान में, 75 अनाथ बच्चों और किशोरों का घर है.

लगभग चार साल पहले, जापान सरकार ने उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों और अवयवों के साथ संगठन परिसर में एक बेकरी यूनिट पित की थी. लगभग दस किशोरों का एक समूह बनाकर इकट्ठा किया गया जहाँ उन्हें स्वादिष्ट बेक्ड सामान तैयार करने के लिए बेकरी यूनिट में पेशेवर रूप से प्रशिक्षित किया गया था.

हालाँकि, कुछ नकारात्मक टिप्पणियां जल्द ही सामने आने लगीं कि उन बच्चों को अठारह साल से अधिक अनाथालय में नहीं रखा जा सकता है और उन्हें एक अच्छी आजीविका कमाने के लिए मुख्यधारा के समाज में स्वीकार नहीं किया जाएगा.

इसके बाद श्री घोष ने 18 साल के उम्र के इन बच्चों के लिए एक व्यावसायिक उद्यम शुरू करने की एक विस्तृत योजना बनाई, जो आखिरकार ‘कैफे पॉजिटिव’ के रूप में हक़ीक़त में बदली.

श्री घोष के निर्देशन में समूह ने अपने सपनों की कॉफी की दुकान शुरू करने के लिए एक जगह किराए पर लेने के लिए छह महीने तक कड़ी मेहनत की. मगर जैसे ही उनके एचआईवी पॉजिटिव स्टेटस के बारे में पता लगता तो लोग जगह देने से इंकार कर देते, दूसरे लोग इस तरह के बहाने बनाते कि भले ही उनको कोई दिक्कत नहीं मगर, उनके परिवार या पड़ोसियों इससे नाराज़ हो जायेंगे. अंत में, एक सज्जन ने अपने छोटे गेराज की जगह को भाड़े पर देने के लिए राज़ी हो गए. एक कॉफी मशीन और कुछ कुर्सियों और मेज़ों के साथ कैफ़े पॉजिटिव 14 जुलाई 2018 को शुरू हो गयी. इसके इंटीरियर्स को उन संदेशो से सजाया गया था जो यहाँ काम करने वाले युवा समाज को देना चाहते हैं.

 

कैफ़े ही क्यों ?

“कॉफी हमारे सामाजिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है. लोग कॉफी पर मिलते हैं और घंटों अपनी बातें करते हैं, इसलिए हमारा मक़सद कॉफी के माध्यम से लोगों में जागरूकता पैदा करना था कि एचआईवी-एड्स किसी और वायरल संक्रमण की तरह ही है. ”श्री घोष ने बताया.

उनका मानना है कि यदि लोग कॉफी पीते हैं और एचआईवी पॉजिटिव लोगों द्वारा तैयार भोजन खाते हैं, तो वे दुनिया को दिखा सकते हैं कि एचआईवी कुछ भी नहीं है, बल्कि हमारी गलत धारणाओं से जन्मा एक अधूरा तथ्य है. एचआईवी पॉजिटिव लोग किसी से अलग नहीं हैं, और वे भी हमारे समाज का एक अभिन्न अंग हैं.

दूसरी ओर, अत्यधिक भेदभाव के कारण, एचआईवी पॉजिटिव लोगों का दर्द कोई नहीं समझता, कैफे पॉजिटिव उन पीड़ितों की तरफ अपना हाथ बढ़ाना चाहते हैं, और उन्हें कौशल-आधारित प्रशिक्षण और प्रोत्साहन समाज की मुख्य धारा से जोड़ना चाहते हैं.

 

 

कैफे पॉजिटिव में ताज़ी लवाज़ा कॉफ़ी और बंगाल की पसंदीदा चाह (चाय) को  मेनू में शामिल किया गया है, साथ ही साथ मफिन, कुकीज़ और सैंडविच जैसे रोजमर्रा के पसंदीदा चीज़ भी उपलब्ध हैं.

 

सभी कामगार पेशेवर रूप से प्रशिक्षित हैं

बेकिंग के अलावे, ये दस लोग अपने दम पर कैफे के प्रबंधन और संचालन भी अच्छी तरह से कर लेते हैं. ग्राहकों को भोजन, प्रबंधन और सेवा के लिए तीन टीमों में बँट कर काम करते हैं. प्रबंधन और खरीद टीम को तीन महीने का सर्टिफिकेट बिजनेस मैनेजमेंट प्रशिक्षण भी प्राप्त हुआ है. उसके बाद, उन्हें कोलकाता के दो अन्य उल्लेखनीय रेस्तरां – ट्रैवलिस्तान और स्नैकिंग्स में इंटर्न के रूप में रखा गया.

 

 

भविष्य की योजनाएं

श्री घोष ने कहा, “कोलकाता के लोगों ने हमारा गर्मजोशी से स्वागत किया है”, कैफे में हर दिन कम से कम 35 से 50 लगाते हैं. उनके अद्वितीय उद्यम को न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और लगभग सभी राष्ट्रीय समाचार पत्रों जैसे अंतर्राष्ट्रीय अखबारों ने छापा है. बीबीसी और सीएनएन ने भी कैफे पॉजिटिव कहानी को कवर किया है – जिसने श्रमिकों को अपने ईमानदार प्रयासों को जारी रखने के लिए प्रेरित किया है.

अगले कुछ वर्षों में, लगभग 30-40 ग्राहकों के लिए बैठने की व्यवस्था के साथ कैफे का विस्तार करने की योजना है.

 

यादगार लम्हे

उनकी अप्रत्याशित सफलता के बीच, दो घटनाओं ने श्री घोष और उनकी टीम को गहराई से छू लिया है. “एक बार दिल्ली से ग्यारह लोगों का एक समूह विशेष रूप से कैफे पॉजिटिव में कॉफी और स्नैक्स का आनंद लेने के लिए कोलकाता आया था और हाल ही में, एक युवा जोड़े ने हमारे कैफे में शादी करने की इच्छा व्यक्त की”, श्री घोष खुशी से बताते हैं. उन्होनें अपने मेनू चार्ट पर टैगलाइन के रूप में “कॉफी फॉर ए कॉज” का इस्तेमाल किया है. श्री घोष हमारे पाठकों से अपील करते हुए कहते हैं कि “मैं सभी को कैफे पॉजिटिव में आमंत्रित करना चाहता हूँ, आइये और हमारी कॉफी का आनंद बिना किसी झिझक के लीजिये.”

उनका दृढ़ विश्वास है कि सभी हाशिए के लोगों को हमारे समाज का हिस्सा बनने का पूरा अधिकार है. यह हम जैसे शिक्षित लोगों का कर्तव्य है कि हम उनका खुले बाँहों से स्वागत करें.

 

तर्कसंगत का पक्ष

तर्कसंगत की टीम एचआईवी-एड्स से जुड़े कलंक को सफलतापूर्वक तोड़ने और दुनिया को एक मजबूत संदेश भेजने के लिए कैफे पॉजिटिव टीम की सराहना करता है, और उम्मीद करता है कि देश के अन्य भागों में भी लोगों को इससे प्रेरणा मिले.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...