पर्यावरण

ईकोपोस्रो: गोवा का पहला ज़ीरो-वेस्ट स्टोर, जिसका मूल मंत्र है प्लास्टिक पॉल्युशन को रोकना

तर्कसंगत

January 22, 2019

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गोवा के सुहाने मौसम में पले बढ़े बचपन के दो दोस्त जोनाह और एल्ड्रिज अपनी ज़मीन को धीरे धीरे प्लास्टिक में जकड़ते हुए देख रहे थे, वो ये अच्छी तरह से समझ रहे थे कि ये सब कुछ हमारी प्लास्टिक पर निर्भर लाइफस्टाइल के कारण हो रहा था, साथ ही सलीके की वेस्ट मैनजमेंट की कमी थी. एक गेस्ट हाउस के मालिक जोनाह और एक रेस्टोरेंट के मालिक, एल्ड्रिज, हमेशा पर्यावरण के प्रति जागरूक थे. उन्होंने इस बात को समझा कि कैसे उनके बिज़नेस के कारण प्लास्टिक की बोतल, बैग और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के रूप में अपनी निशान छोड़ रहे हैं.

इस के खतरे को कम करने के लिए, दोनों ने अपने शहर सियोलिम में सफाई अभियान का आयोजन शुरू किया और जीरो वेस्ट लाइफस्टाइल को अपनाना शुरू किया. अधिक लोगों को अपने से जोड़ने के लिए, दो दोस्तों ने ईकोपोस्रो की शुरुआत की, जो कि गोवा का पहला जीरो-वेस्ट ऑल-पर्पस स्टोर है. जोनाह ने तर्कसंगत को बताया, “ईकोपोस्रो, (कोंकणी में पोस्रो का मतलब है ‘छोटी स्थानीय दुकान’) एक ऐसी जगह है जहां कोई भी आसानी से एक छत के नीचे हर चीज की खरीदारी कर सकता है.”

 

 

शुरुआत कैसे हुई?

“जब हमने जीरो वेस्ट मॉडल अपनाने का फैसला किया, तो हमने महसूस किया कि प्लास्टिक पैकेजिंग को छोड़ना और अच्छे सामानों की खरीदना कितना मुश्किल था. मान लीजिए कि अगर हमें बिना प्लास्टिक के दस सामान की ज़रूरत है तो उसे खोजते हुए हमें दस दूकान के चक्कर काटने पड़ते थे – इससे हमें खुद का जीरो वेस्ट मॉडल शुरू करने का मन बना लिया.” जोनाह बताते हैं.

अप्रैल 2018 में शुरू हुआ, ईकोपोस्रो स्थानीय लोगों के बीच पॉपुलर और उनकी पहली पसंद बन गया है, जो खुद जीरो वेस्ट मॉडल दूकान से खरीददारी कर महसूस कर रहे हैं.

जोनाह कहते हैं, “जब हमारे ग्राहक खुशी से कहते हैं कि अब उन्हें तीन सप्ताह में केवल एक बार कचरा निकालने की जरूरत है, तो हम गर्व महसूस करते हैं. खुद हमने व्यक्तिगत रूप से, कुछ ही महीनों में हमारे कचरे में 75% की कमी देखी है.”

 

ईकोपोस्रो कैसे काम करता है

बाद बाकी ‘गो ग्रीन’ टैग वाले बिज़नेस या स्टोर ये अलग है क्यूंकि यहाँ शुरआत से अंत तक जीरो वेस्ट मॉडल पर ध्यान दिया जाता है. सामानों को खरीदने से लेकर ग्राहक को बेचने तक जोनाह और एल्ड्रिज इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं.

वह लोकल दुकानदारों और किसानों से भी ईकोपोस्रो की तरह उत्पादन के दौरान प्लास्टिक से बचने के लिए अनुरोध करते हैं. वे जूट के बोरों और टिन कंटेनरों में दुकान की सामग्री लाते हैं; और उन्हें सुंदर ग्लास जार या नारियल के कटोरे में रख कर अलमारियों पर सजाते हैं. ग्राहकों को अपने स्वयं के कागज या कपड़े के बैग लाने के लिए कहा जाता है और उन्हें किराने का सामान घर ले जाने के लिए  ग्लास जार या रिसाइकिल पेपर पैक दिए जाते हैं.

 

 

जोनाह बताते हैं कि “हमें बस इतना करना था कि हमें हमारे दादा-दादी के जैसे खरीदारी थी, वे खुद के कंटेनरों को दुकानों में ले कर जाया करते थे, और बचे सामान को कागज या कपड़े में लपेटा लाया करते थे. हम भी ठीक यही सब वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं.”

 

ईकोपोस्रो में क्या क्या मिलता है?

रोजमर्रा की आवश्यक चीजों जैसे कि अनाज, मसाले, खाना पकाने के तेल, और यहां तक कि स्थानीय उत्पाद जैसे नारियल का सिरका, सेंधा नमक और गुड़ से लेकर दूध और अन्य डेयरी उत्पाद, स्थानीय अंडे और ब्रेड, ईकोपोस्रो में उपलब्ध है इतना ही नहीं उनके पास जीरो वेस्ट डिटर्जेंट, क्लीनर और टॉयलेटरीज़ जैसे कि हाथ से बने साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, टॉयलेट पेपर, क्लॉथ सैनिटरी पैड आदि हैं. प्राकृतिक रूप से बनाए गए आर्गेनिक कॉस्मेटिक भी ईकोपोस्रो में आसानी से मिल जाती है. “घरेलू सामान के अलावा, हम स्टील टिफ़िन, तांबे की पानी की बोतलें, टेट्रा पैक और रीसायकल कागज से बने कुछ स्टेशनरी आइटम रखते हैं.” जोनाह बताते हैं कि इस तरह से जीरो वेस्ट मॉडल को अपनाना बिलकुल भी मुश्किल नहीं है.

 

 

ईकोपोस्रो में बेची जाने वाली सब्जियां के बारे में बताना यहाँ न ज़रूरी है क्योंकि वे पूरी तरह से स्थानीय आर्गेनिक फार्मिंग द्वारा उगाये जाते हैं – बीना किसी केमिकल फ़र्टिलाइज़र या इंसेक्टिसाइड के. उनके इस आईडिया का लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया है, जीरो वेस्ट के तरफ ध्यान देने के साथ साथ उनके द्वारा क्लीन ड्राइव में हिस्सा लेकर, गोवा के लोगों ने  के ईकोपोस्रो का गर्मजोशी से स्वागत किया है.

 

 

प्लास्टिक छोड़ना उतना आसान नहीं है

प्लास्टिक आज हमारे जीवन का पर्याय है. सस्ता, टिकाऊ, वाटरप्रूफ, सुविधाजनक और आसानी से उपलब्ध – यह अस्वीकार करना मुश्किल है कि प्लास्टिक किराने के उत्पादों को लंबे समय तक ताजा रखने में मदद करता है. इसलिए, शुरू में, जोनाह और एल्ड्रिज ने इसके अभाव में नमी के कारण चावल, दाल और अनाज के अपने स्टॉक गँवा दिए. फिर उन्होंने बड़े बूढ़ों से मदद मांगी, जो पुराने दिनों में प्लास्टिक मुक्त ज़िन्दगी जीते थे.

“उदाहरण के लिए, हमने अपने दादा-दादी से सीखा कि ‘हिंग’ के टुकड़े को चावल में डालकर हम एक साल तक उसे ताजा और सुगंधित रख सकते हैं. आपको ईकोपोस्रो में संरक्षण के कई अन्य पारंपरिक तरीकों का उपाय मिलेगा” जोहान ने खुलासा किया.

 

 

आगे की योजनाएं

ईकोपोस्रो ने पहले से ही पारा गांव में और उसके आसपास एक आर्गेनिक बाजार को बढ़ावा दिया है, जहां छोटे पैमाने पर स्थानीय उत्पादक अपने स्टाल लगाते हैं और सामान बेचते हैं. इन दोनों का लक्ष्य एक ऐसे समाज को बनाना है जहाँ पर्यवरण को नुक्सान पहुँचाने वाली चीज़ों का कम से कम उपयोग हो. दुकान के ठीक सामने एक पर्माकल्चर फार्म भी बनाने की योजना है.

जोनाह और एल्ड्रिज  एक आरामदायक रेस्तरां का सपना भी देखते हैं, जहां लोग अपनी फैमिली रेसिपी को तैयार करके और लोगों को खिलाएंगे.

 

 

सभी के लिए संदेश

“आंकड़ों के अनुसार, 2050 तक, मछली की तुलना में समुद्र में प्लास्टिक ज़्यादा पाए जायेंगे, उस समय तक हम 60 साल के हो जाएंगे. हम ऐसा नहीं होने देना चाहते.” जोनाह ने कहा.

उन्होंने कहा, “ग्लास और पेपर जैसे विकल्पों में क्रमशः वजन और मज़बूती जैसे प्रतिबंध हैं, लेकिन अगर हम पर्यावरण की खातिर एक भारी बैग घर ले जाने के लिए तैयार नहीं हैं, तो हमें अपनी प्राथमिकताओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.” उन्होंने कहा.

 

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