मेरी कहानी

मेरी कहानी: मुझे आराम की ज़रूरत थी और मेरी बहू के अलावे किसी ने यह नहीं समझा

तर्कसंगत

Image Credits: Representational Image

January 22, 2019

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जब मेरा बेटा सुल्ताना को घर पर लाया, तो हर कोई गुस्से में था. कोई भी उसे घर के बहु के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था. मैंने अपनी बहू का चेहरा देखा और देखा कि उसमें कोई मासूमियत नहीं है, परिपक्वता और बहादुरी है. मेरी बेटियों, पति और सभी लोगों ने मुझे चेतावनी देना शुरू कर दिया कि लड़की कितनी खतरनाक हो सकती है. जिस दिन वह घर पहुंची, मेरी रसोई में आग लग गई. मेरी साड़ी चूल्हे से सट गई और रसोई में आग लग गई थी. मगर सुल्ताना ने ही बाल्टी में रेत भर का लाया और आग बुझाया. मेरी बेटियां मुझे बता रही थीं कि ये एक बुरा शगुन था, उन्होंने कहा कि नई दुल्हन के कारण से आग लगी है, मैंने उन्हें समझाया कि उसने कितनी बहादुरी से हमें बचाया. उसने पहली बार में मेरा दिल जीत लिया. लेकिन किसी ने भी उसे पसंद नहीं किया क्योंकि सुल्ताना काफी गरीब परिवार से आयी थी. मैंने किसी की नहीं सुनी क्योंकि वह अपने पूरे दिल और मेहनत से मेरे घर को खुशियों से भर रही थी.

लेकिन तीन साल हो गए कोई बच्चा नहीं हुआ. सभी को उसके माता-पिता के घर पर भेजने का एक वैध कारण मिल गया. लेकिन मैं उसकी ढाल बनकर कड़ी रही मैंने देखा कि वह भी एक बच्चे की जरूरत में बुरी तरह से पीड़ित थी. उसने मुस्कुराना बंद कर दिया था . एक दिन सुबह सुबह मैंने उसे तैयार होने को कहा, मैंने घर में सबसे कहा कि मैं सुल्ताना को लेकर अपनी बहन के घर जा रही हूँ, मैंने सभी से झूठ बोला था, मैं उसे ले कर कम्युनिटी क्लिनिक गयी, और वहां उसका इलाज कराया. छह महीने के बाद मेरी बहू गर्भवती हुई, जब मेरा पोता पैदा होने वाला था तो मेरी बहू ने मुझसे कहा कि अगर उसके साथ कुछ हो जाता है, तो मैं उसके बच्चे को किसी और को न सौंप दूँ. मैंने उससे कुछ कहाँ नहीं मगर उस पूरे वक़्त मैं उसके साथ थी, मेरी बहु ने मुझे एक खूबसूरत पोता दिया.

मुझे चालीस साल हो गए हैं, मेरे शरीर के हर इंच में हर मिनट दर्द होता है. लेकिन मेरे द्वारा कमाया गया पैसा मेरे बीमार पति और परिवार के लिए ज़रूरी है. मुझे अपने पोते के साथ खेलने का समय नहीं मिलता था. कुछ दिनों पहले सुल्ताना ने बताया कि उसे मेरे लिए और उसके लिए एक नई नौकरी मिल गई है. मैंने जब उससे पूछा कि नौकरी क्या है उसने मुझे मेरे पोते को सौंप दिया और मुझे बताया कि मैं उसकी देखभाल करूँ यही मेरी नौकरी है. मैंने मुस्कुराते हुए कहा, हमें अपने परिवार को चलाने के लिए पैसे की जरूरत है तब उसने मुझे एक कार्ड दिखाया, मैं पढ़ नहीं सकी मैं कभी स्कूल नहीं गयी थी. तो उसने मुझे समझाया, उसने कपड़ों की फैक्ट्री में नौकरी मिल गयी है तो अब मैं रिटायर हो सकती हूं. कुछ दिन हुए, उसे काम शुरू किये हुए. कल मैंने अपनी मजदूर की नौकरी छोड़ दी. सुबह से मैं एक बच्चे की तरह महसूस कर रही हूँ, मुझे नहीं पता कि यह लंबा दिन कैसे गुजरेगा. जब भी मेरा पोता मेरे साथ हँसता खेलता है मेरी आँखों में आंसू आ जाते हैं. मुझे इस आराम की ज़रूरत थी और मेरी बहू के अलावे किसी ने यह नहीं समझा, जिसे हर कोई बेकार समझता है, मगर मेरे लिए वो मेरी माँ है. 

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