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महाराष्ट्र: सेक्रेटेरिएट में वेटर के 13 पद के लिए 7000 आवेदन, ज़्यादातर कैंडिडेट ग्रेजुएट हैं

तर्कसंगत

Image Credits: IndianExpress/Zee News

January 24, 2019

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भारत में नौकरी की कमी की समस्या पर रौशनी डालने वाली एक अन्य घटना सामने आई, जब महाराष्ट्र सेक्रेटेरिएट ने अपनी कैंटीन में वेटरों के लिए 13 वेकन्सी निकालीं, तो 7,000 उम्मीदवारों ने इस पद के लिए आवेदन किया, इस पद पद के लिए केवल क्लास 4 पास होने की ज़रूरत है, मगर ज़्यादातर कैंडिडेट ग्रेजुएट हैं, एक सरकारी अधिकारी ने खुलासा किया.

 

विपक्ष को क्या कहना था

सरकारी अधिकारी ने बताया कि हाल ही में, इस पद के लिए 100 मार्क्स का रिटेन एग्जाम कराया गया. परीक्षा से जुड़ी कार्रवाई 31 दिसंबर को पूरी हो गई और अभी जॉइनिंग प्रोसेस चल रही है. चुने गए 13 कैंडिडेट्स में से आठ पुरुष और बाकी महिलाएं हैं.

राज्य के साथ-साथ केंद्रीय भाजपा पार्टी की निंदा करते हुए, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता नवाब मलिक ने कहा कि राज्य में युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने में भाजपा “विफल” रही है. NDTV ने उन्हें यह कहते हुए रिपोर्ट किया कि महाराष्ट्र की स्थिति पूरी तरह से संकट में है और पश्चिमी राज्य में कोई भी नई प्रोजेक्ट या फैक्ट्री नहीं चल रहे हैं.

विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने भी राज्य सरकार की खिंचाई की और कहा कि सरकार को ऐसे शिक्षित व्यक्तियों की सेवाएं लेने में शर्म आनी चाहिए. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से उन्होनें कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब पदों के लिए एलिजिबिलिटी क्लास 4 पास होना है, तब ग्रेजुएट लोगों का चुनाव हुआ है.” उन्होंने यह भी पूछा कि “डबल ग्रेजुएट द्वारा कैंटीन में उन्हें खाना दिए जाने के दौरान मंत्री और सचिव कैसा महसूस करेंगे?”

इस बीच, महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि सरकार लोगों को पदों के लिए आवेदन करने से नहीं रोक सकती है और महाराष्ट्र में पर्याप्त नौकरियां है. हालांकि, NDTV के अनुसार, रोजगार के आंकड़े मंत्री के दावों का समर्थन नहीं करते हैं.

 

भारत में जॉब क्राइसिस

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बेरोजगारों की संख्या 2016 में 33.56 लाख से बढ़कर इस साल 42.2 लाख हो गई, जबकि लाभकारी रोजगार प्राप्त करने वालों की संख्या उन दो वर्षों के भीतर 17,000 तक गिर गई है.

हालाँकि, यह कोई नई घटना नहीं है, जहाँ पढ़े लिखे ग्रेजुएट लोगों ने चपरासी और निचले स्तर के सरकारी नौकरी के लिए एप्लाई किया है.

2014 के आम चुनावों के अपने चुनाव प्रचार के दौरान, पीएम मोदी ने वादा किया था कि अगर चुने गए, तो उनकी सरकार हर साल 10 मिलियन नए रोजगार पैदा करेगी.

2016-17 का आर्थिक सर्वेक्षण देश में बेरोजगारी दर में 2013-14 में 4.9% से 5% की वृद्धि को दर्शाता है, जिसमें लगभग 20,000 नौकरियों 2016 तक घट गयीं. क्वार्ट्ज इंडिया के अनुसार, हर साल लगभग 17 मिलियन लोग नौकरी के लिए तैयार होते हैं, लेकिन केवल नौकरियां केवल 5.5 मिलियन ही उपलब्ध है.

 

तर्कसंगत का तर्क

सरकारी नौकरी में कैंडिडेट की इतनी अधिक संख्या तो सरकारी नौकरी की सुरक्षा के कारण है. यह देश के पढ़े लिखे रिसोर्स की एक तरह से बर्बादी है कि निम्न स्तर की नौकरियों के लिए ऐसे पढ़े लिखे लोगों को काम दिया जा रहा है. हमारे नेताओं को आंकड़ों से छिपने के बजाय यथार्थ को समझ कर उसके हिसाब से उपाय खोजने चाहिए.

 

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