मेरी कहानी

मेरी कहानी: मुसीबत में आखिर इंसान ही इंसान के काम आता है

तर्कसंगत

January 28, 2019

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कहते हैं कि अगर आप किसी मुसीबत में हैं और उपरवाले को मदद करनी होती है तो वह फरिश्ते के रूप किसी न किसी को आपकी मदद के लिए ज़रूर भेज देता है. बीते दिनों मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.  

मैं नोएडा में एक एमएनसी में काम करता हूं और आम तौर पर अपना काम ख़त्म कर ऑफिस से रात 11 बजे के बाद निकलता हूं और जनकपुरी अपने घर जाता हूं. 14 जनवरी सोमवार को, मैं अपने कार्यालय से लगभग रात 11:15 बजे रवाना हुआ और एम्स के पास पहुंचा था कि मेरी स्कूटर अचानक से रुक गयी, मैं एम्स दिल्ली के पास लगभग रात के 11:45 बजे अकेला खड़ा था, और समझ नहीं पा रहा था कि स्कूटर रुकी कैसे और सर्दियों की रात में क्या करूँ?

 

अचानक, एक सरदारजी मोटरसाइकिल पर मेरे पास से गुजरे, पहले मैंने उनपर ध्यान नहीं दिया, 200 मीटर आगे जाकर वो वापस आए और मुझसे इतनी रात गए ठण्ड में खड़े होने का कारण पूछा. मुझे उस वक़्त नहीं मालूम था कि क्या खराबी हुई थी. उन्होनें स्कूटर की खराबी का पता लगने तक इंतज़ार किया, फिर काफी कोशिश के बाद मुझे स्कूटर के ख़राब होने का कारण पता चला – उसकी बेल्ट टूट चुकी थी. तब तक हम दोनों में थोड़ी जान पहचान हो चुकी थी, उन्होंने बताया कि उनका नाम कमलदीप सिंह है और वो फोर्टिस फार्मेसी में काम करते हैं.

 

उन्होनें मोतीबाग में एक मैकेनिक की दुकान तक मेरी स्कूटी को धकेलने की पेशकश की. हम वहाँ पहुँचे और पाया कि मरम्मत की दुकान केवल टायर पंक्चर के लिए है. उन्होंने मेरी स्कूटी को मेरे आवास के पास जनकपुरी इलाके तक धकेल कर पहुँचाया. मैं उनके इस तरह के हेल्पिंग नेचर से शॉक में था, मैं दिल्ली का निवासी नहीं हूं और मैंने सुना है कि जब आपको सड़क पर मदद की जरूरत होती है तो लोग आपको कैसे नजरअंदाज कर देते हैं. मैंने इस आदमी को एक फरिश्ता ही समझ लिया और मैंने उन्हें धन्यवाद दिया, बदले में उन्होंने कहा “इन्सान ही  इन्सान के काम आता है, अगर आपको कोई मदद चाहिए, तो मुझे कॉल करना.”

 

कमलदीप सिंह जी ने दिल्ली के बारे में मशहूर उस कहावत को सच कर दिया कि “दिल्ली दिल वालों की है”

 

मैं उनके मदद को कभी भी नहीं भूल पाउँगा. आप में से कुछ लोगों के लिए यह कोई बड़ी बात या घटना नहीं होगी या इससे भी बड़ी मुश्किल के समय को देखा होगा. मगर मेरे लिए इस वाक़्या का ज़िक्र करना इसलिए ज़रूरी है क्यूंकि कई बार हम ऐसे हालात में फंसते हैं और कोई न कोई हमारी मदद करता है, इस कहानी के माध्यम से मेरी कोशिश है कि हम कभी भी मुसीबत में मदद करने वालों को न भूलें और दूसरी कोशिश यह है कि इस कहानी को पढ़कर शायद किसी के लिए आप ‘कमलदीप सिंह’ बन जाएं या कोई बुरे वक़्त में आपके लिए ‘कमलदीप सिंह’ बन जाये. हमारा इंसानियत पे भरोसा बना रहे, क्यूंकि “आखिर इंसान ही इंसान के काम आता है.”   

 

कहानी: आशुतोष मिश्रा

फोटो: आशुतोष मिश्रा / कमलदीप सिंह

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