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39 साल से यह रिटायर्ड आईटीआई अधिकारी स्कूली बच्चों को किताबें, जूते और स्वेटर दे रहे हैं

तर्कसंगत

January 28, 2019

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बेंगलुरु में कोडिगेहल्ली के इलाके में 80 छात्रों और तीन शिक्षकों से बना एक सरकारी स्कूल है. इस स्कूल में पढ़ने वाले 80 छात्र ज्यादातर गरीब हैं. उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और उन्हें निजी स्कूलों में भेजने का खर्च नहीं उठा सकते. इसी इलाके के एक सज्जन पुरुष  एच. वेंकटेश, इन बच्चों के स्कूल में शिक्षित होने का मुख्य कारण हैं. वेंकटेश पिछले 39 वर्षों से स्कूल के मेंटेनेंस और डेवलपमेंट कमिटी के प्रेसिडेंट हैं. उन्हें छात्रों के माता-पिता द्वारा चुना गया है. स्कूल एक प्राथमिक स्कूल है और इसमें कक्षा I से V तक की पढ़ाई होती है.

वेंकटेश बच्चों की मदद कैसे करते हैं

“मैं एक गरीब परिवार में जन्मा हूँ, मुझे पता है कि गरीब परिवार में रहते हुए प्राथमिक शिक्षा मिलनी कितनी मुश्किल होती है. मैं उन बच्चों की मदद करना चाहता हूँ जो पैसे की कमी के कारण पढ़ाई नहीं कर पाते. मैं दोस्त, परिवार और कुछ डोनर्स की मदद से बच्चों को कपड़े, किताबें, जूते, स्टेशनरी, सब मुहैया करवा पा रहा हूँ.”  

इतना ही नहीं वेंकटेश के बेटे ने स्कूल को 15,000 रुपये की कीमत वाला वाटर प्यूरीफायर मुहैया कराया और वेंकटेश की बेटियों ने इसे छात्रों को खाने के लिए स्टील की प्लेट्स दी हैं. एक ट्रस्ट की मदद से, वेंकटेश ने छात्रों के लिए मिड डे मील की व्यवस्था की है, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें दूध सहित पौष्टिक भोजन मिले. गरीब परिवारों से आने वाले बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है और जो कुछ भी मिलता है वह पर्याप्त पौष्टिक नहीं होता है.

 

 

“बच्चों के लिए जो कुछ भी मैं कर रहा हूं, उसके अलावा, मैं यह उल्लेख करना चाहता हूं कि मेरे लिए आज तक अपने जीवन में 78 बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया है और यह अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है. मैं इसे हर साल दो बार, गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर फहराता हूं” वेंकटेश ने कहा.

कुछ डोनर्स की मदद से, उन्होंने तीन लाख रुपये के स्कूल में अतिरिक्त कमरे बनाए हैं और 5 लाख रुपये की रीडिंग डेस्क भी दी हैं. प्रत्येक छात्र को साबुन और डिटर्जेंट भी दिए गए हैं ताकि वे स्वच्छता बनाए रखना सीख सकें. वह कोडिगेहल्ली लेआउट्स वेलफेयर एसोसिएशन नामक एक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, जो कब्रिस्तान और झीलों के अवैध अतिक्रमण के खिलाफ लड़ रहे हैं.

“स्कूल के पास एक बस्ती है जिसमें लगभग 100 परिवार रहते हैं. इन परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. उनमें से कुछ भीख माँगने के लिए भी जाया जरते थे. इसलिए हम उस बस्ती में गए और उनके माता-पिता को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राज़ी किया.  हमने एक महिला को नियुक्त किया है जो हर दिन उन्हें स्कूल लाती है,अगर वे खुद से नहीं आते ” वेंकटेश ने कहा.

 

 

वेंकटेश ने खुद एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है और वह बीए ग्रेजुएट है. वह एक रिटायर्ड आईटीआई अधिकारी और पूर्व ग्राम पंचायत उपाध्यक्ष भी हैं.

“मेरे एक बेटा और तीन बेटियाँ हैं, जो सभी शिक्षित हैं. मैंने उन्हें एक बच्चे के रूप में आई कठिनाइयों का सामना नहीं करने दिया, और उन्हें शिक्षित और ईमानदार नागरिक बनने में मदद की.”

तर्कसंगत एच. वेंकटेश को उनकी शिक्षा को प्राथमिकता देने के प्रयास के लिए सराहना करता है और उम्मीद करता है की बच्चे भी आगे चल कर एक सभ्य नागरिक बनेंगे.

 

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