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मुंबई पुलिस चोरी के लैपटॉप और चोरों के रैकेट का पता लगाने के लिए यूपी तक पहुंची

तर्कसंगत

January 28, 2019

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जिसकी आबादी 133.92 करोड़ है. ऐसे में हमारी आपकी कीमती सामानों की सुरक्षा एक बड़ा सवाल है, हम सभी में से किसी न किसी ने कभी न कभी अपने कीमती गैजेट्स लैपटॉप, स्मार्ट फ़ोन, आई पॉड्स कर पता नहीं क्या क्या खोया भी होगा और पुलिस में रिपोर्ट दर्ज़ करा कर भूल चुके होंगे. हम पुलिस को भी कुछ हद तक दोष नहीं दे सकते क्योंकि उनके पास इन छोटी मोटी चोरी के अलावा जांच के लिए और भी कई अपराध हैं.

हालाँकि, मुंबई के गोवंडी पुलिस स्टेशन ने लैपटॉप खोजने के लिए एड़ी चोटी एक कर के सफलता हासिल की. धरम वालिया, जो एक फिल्म कंपनी के मालिक हैं, उन्होनें सितंबर 2018 में अपना लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान खो दिया था. आखिरकार 21 जनवरी, 2019 को गोवंडी पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों की मदद से उन्हें अपना लैपटॉप और अपना बैकपैक वापस मिल गया.

एक सितंबर की रात चेंबूर में रहने वाले धरम एक फिल्म देखने गए. उन्होंने अपना बैकपैक कार की पिछली सीट पर रखा था जिसमें लैपटॉप (मैकबुक प्रो), एक जोड़ी हेडफोन, स्पीकर और अन्य दस्तावेज थे. फिल्म के बादजब वह बाहर आये तो देखा कि किसी ने खिड़की का शीशा तोड़ कर बैग चुरा लिया है. धरम ने कहा, “सीटों पर टूटे हुए कांच गिरे थे, और जो बैग मैंने पिछली सीट पर राखी वह गायब था.”

परेशान होकर धरम गोवंडी पुलिस स्टेशन में अपराध की रिपोर्ट करने के लिए पहुंचे. दो जासूस उसी रात धरम के साथ उस जगह जांचने आए थे, मगर पता लगा कि कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है, एफआईआर दर्ज की गई.  घटना के कुछ दिनों बाद, धरम को एक ऑटो चालक का फोन आया, जिसने धरम के कुछ दस्तावेज अपनी ऑटो सीट के पीछे पाए थे. धरम ने पुलिस को सूचित किया और उन्होंने  ऑटो ड्राइवर को पूछताछ के लिए बुलाया. हालाँकि, ड्राइवर से कोई काम की जानकारी हाथ नहीं लगी. धरम ने कहा, “मैंने अपनी सारी उम्मीदें खो दी थीं. मुझे केवल इस बात का दुःख था कि मेरा लैपटॉप एकदम नया था और मुझे लगा कि वह मुझे वापस मिलने वाला नहीं था.”

इस मामले की जांच के कुछ दिनों बाद, धरम को पुलिस ने चेंबूर के एक स्थान से मिले कुछ बैग की पहचान करने के लिए बुलाया. धरम ने अपनी बैग तो पहचान ली मगर वह खाली थी. पुलिस उस अपराधी को नहीं पकड़ पाई , जिसके जगह से बैग मिली थी.

गोवंडी पुलिस स्टेशन की टीम ने अपनी जांच जारी रखी और एक सुराग मिलने के बाद उत्तर प्रदेश जा पहुंची. यूपी पहुंचने के बाद टीम को पता चला कि अपराधी ने लैपटॉप किसी को बेच दिया था.

धरम ने कहा, “मुझे पुलिस से फोन आया कि मैं लैपटॉप की पहचान करने के लिए थाने आऊँ, मैं खुश था और मैं पुलिस स्टेशन पहुंचा, घटना के 5 महीने बाद पुलिस से फोन आया था.”  धरम ने आखिरकार सीरियल नंबर के साथ अपने लैपटॉप की पहचान की. “मैंने कभी नहीं सोचा था कि एफआईआर दर्ज करने के बाद मुझे अपना लैपटॉप मिल पायेगा.” अन्य सभी गैजेट अभी भी गायब हैं, और पुलिस अभी भी जांच कर रही है.

जब तर्कसंगत ने गोवंडी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारी, इंस्पेक्टर माने से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें लगभग चार खोए हुए लैपटॉप मिले हैं. “जांच अभी भी चल रही है और हम इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के करीब हैं.” उन्होंने कहा कि इस केस से जुड़े दो लोग वांटेड थे, एक को गिरफ्तार कर लिया गया है और दूसरा भागा हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि टीम जल्द ही चेंबूर क्षेत्र से और अधिक चोरी किए गए लैपटॉप ढूंढ लेगी.

 

तर्कसंगत पुलिस की इस काम के लिए सराहना करता है, ऐसे काम करने के कारण ही पब्लिक का पुलिस पर विश्वास बढ़ता है. हम आशा करते हैं कि गोवंडी पुलिस स्टेशन के कर्मी अच्छे काम को जारी रखें और अन्य पुलिस स्टेशन इससे प्रेरणा लें.

 

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