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भारत की पहली ट्रांसजेंडर भरतनाट्यम नृत्यांगना नर्तकी नटराज को पद्मश्री से सम्मानित किया जायेगा

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Image Credits: India Ahead News

January 29, 2019

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भरतनाट्यम नर्तकी नटराज पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली भारतीय ट्रांसजेंडर बन गयी  हैं. 54 वर्षीय भरतनाट्यम नर्तकी मदुरै की एक ट्रांस एक्टिविस्ट हैं और तंजावोर की नायकी भाव स्टाइल में माहिर हैं.

 

शुरूआती ज़िन्दगी

अपने समुदाय के अन्य ट्रांसजेंडरों की तरह, नर्तकी नटराज का जीवन भी मुश्किलों से भरा था. उनका जन्म जुलाई 1964 में तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था. उन्होनें उस समय में भरतनाट्यम सीखने का फैसला किया जब भरतनाट्यम केवल महिलाओं के बीच ही पॉपुलर था और पुरुष इसमें कोई खासी रूचि नहीं लेते थे.

गरीबी और सामाजिक दबाव से जूझते हुए, उन्होंने अपने बचपन के दोस्त शक्ति से वित्तीय सहायता ली. कम उम्र में, उन्होनें अपने पर्सनालिटी में स्त्री पक्ष को पहचाना, जाहिर है उसके बाद उन्हें हीन भावना का सामना किया समाज उनसे भेदभाव रखने लगा. लेकिन वह इससे कमज़ोर नहीं हुई. उन्होनें 12 साल की उम्र में घर छोड़ दिया. अपनी गुज़र बसर के लिए छोटी मोटी नौकरियां की.

 

भरतनाट्यम की शुरुआत

बचपन से,वह एक डांस टीचर की खोज में थीं. अंत में, वह 17 वीं शताब्दी के तंजावुर चौकड़ी के वंशज, तंजावार किट्टप्पा पिल्लई से मिलीं, उन्होनें अपने दोस्त शक्ति के साथ भरतनाट्यम की बारीकियों को सीखते हुए अपने गुरु के साथ 15 साल बिताए. उन्होंने तमिलनाडु में तंजौर तमिल विश्वविद्यालय में अपने गुरु किट्टप्पा पिल्लई की सहायता भी की है.

अपने जुनून को आगे बढ़ाते हुए, नर्तकी नटराज ने तमिलनाडु में एक नृत्य विद्यालय की स्थापना की, जहाँ वह भरतनाट्यम सिखाती हैं. दुनिया भर में अनुसंधान क्षेत्र और नृत्य प्रदर्शन में उनके योगदान के लिए उन्हें काफी नाम मिला है उनके डांस परफॉर्मन्स की दुनिया भर में काफी तारीफ़ हुई है वे और ट्रांसजेंडर समुदाय की प्रतिनिधि भी हैं.

अपने गुरु के साथ अपने सफर को याद करते हुए, नर्तकी कहती है, “मैंने 15 साल तक उनसे नृत्य सीखा. मैं तंजावुर तमिल विश्वविद्यालय में उनके शोध के वक़्त में बताये गए नृत्य के अलग अलग डांस पोज़ के लिए एक डेमो आर्टिस्ट भी थी. मैंने शोज काफी किये मगर, लेकिन शुरुआत में मुझे स्वीकृति नहीं मिली.”

अपने प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए, उन्होनें बताया  कि वह नृत्य करते समय एक ट्रान्स स्टेट में चली जाती है और अपने आसपास की चीजों के बारे में भूल जाती है. उसी समय, वह जेंडर स्टीरियोटाइप को पीछे छोड़ अपने भावों और हरकतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है.

 

उपलब्धियां

नर्तकी ने दुनिया भर में महत्वपूर्ण इवेंट्स में परफॉर्म किया है. उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला है और भारत सरकार के संस्कृति विभाग से फैलोशिप द्वारा  प्राप्त करने वाली पहली ट्रांसजेंडर हैं.

उन्हें कालीमणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो तमिलनाडु सरकार का सर्वोच्च सम्मान है और 2009 में श्रीकृष्ण गण सभा की नृ्त्य चूड़ामणि पुरस्कार भी माल है. उनकी जीवन कहानी तमिलनाडु की स्कूली पुस्तकों में भी चित्रित की गई है.

वह अपने भारतीय और विदेशी छात्रों को अपने खुद के डांस स्कूल वेलिअंबलम स्कूल ऑफ डांस में सिखाती हैं जिसकी संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और नॉर्वे में ब्रांचेज हैं. हाल ही में, यह घोषणा की गई है कि उन्हें अपने क्षेत्र में योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा.

पद्म पुरस्कार भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार हैं जिसे गणतंत्र दिवस से पहले घोषित किया जाता है और उन्हें दिया जाता जिन्होनें कला, इंजीनियरिंग, व्यापार, सामाजिक कल्याण, चिकित्सा, साहित्य, खेल, नागरिक विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो.

ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा हर साल मार्च-अप्रैल के महीने में राष्ट्रपति भवन में दिए जाते हैं.

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