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AAP सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसानों के लिए MSP को लागु करने का फैसला किया

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Image Credits: NDTV
12/17/18, 10:40 AM

January 30, 2019

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दिल्ली के विकास मंत्री गोपाल राय ने सोमवार, 28 जनवरी को कहा कि, दिल्ली सरकार ने किसानों के लिए एमएस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) शुरू करने का फैसला किया है. मामले पर चर्चा करने के लिए, 29 जनवरी मंगलवार को सरकार द्वारा कृषि विशेषज्ञों के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी.

 

 स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एमएसपी को पेश किया जाएगा

देश की राजधानी में लगभग 20,000 किसानों हैं, ये फैसला लोकसभा चुनावों से कुछ समंय पहले ही आया है. राय ने संवाददाताओं से कहा कि आयोग की रिपोर्ट को पूर्ववर्ती कांग्रेस की यूपीए सरकार या एनडीए सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया है.

एनडीटीवी के अनुसार “हम कल इस मुद्दे पर एक सम्मेलन आयोजित करेंगे. तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को विशेषज्ञों के सामने रखा जाएगा कर उनसे भी राय ली जाएगी, इसके बाद एमएसपी को अंतिम रूप देने के बाद, सरकार द्वारा किसानों के साथ बैठकें की जाएंगी, और एक बार उनके विचार मांगे जाने के बाद, इसे कैबिनेट को भेजा जाएगा” गोपाल राय ने कहा.

इससे पहले, यह राष्ट्रीय किसान आयोग के अध्यक्ष एमएस स्वामीनाथन द्वारा कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) को सुझाव दिया गया था कि वे औसत उत्पादन लागत से 50% अधिक MSP तय करें, हालांकि, किसी ने भी इसे नेशनल पालिसी फॉर फार्मर्स, 2007 में इसे जगह नहीं दी.

हालाँकि, हाल ही में, 2018-2019 के सीज़न के लिए सभी खरीफ और रबी फसलों के फसलों के लिए एमएसपी को बढ़ा दिया गया है, उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50% की रिटर्न के साथ. यह बात केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में एक बयान में कही थी.

हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि इसी महीने, दिल्ली सरकार ने भी रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई थी और मंगलवार को किसानों की बैठक में विशेषज्ञों और हितधारकों के सामने निष्कर्ष रखे जाने थे. “समिति ने बताया है कि उत्पादन की लागत की गणना दिल्ली के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए, जैसे कि श्रम की बढ़ी हुई मजदूरी, राष्ट्रीय राजधानी के बाजार में इनपुट और संबद्ध घटकों की लागत,” मंत्री ने कहा इस बीच, समिति ने पहले ही दिल्ली में गेहूं, धान और सरसों के उत्पादन की लागत की गणना की है.

 

स्वामीनाथन कमीशन क्या है?

18 नवंबर 2004 को, भारत सरकार द्वारा नेशनल कमीशन फॉर फॉर्मर्स (NCF) का गठन किया गया था, और इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन कर रहे थे. इसके द्वारा सरकार को पांच रिपोर्ट सौंपी गई, पहली दिसंबर 2004 में और दूसरी 4 अक्टूबर, 2006 को प्रस्तुत की गई. रिपोर्ट में किसानों के लिए “तेज और अधिक समावेशी विकास” का सुझाव दिया गया था, जैसा कि योजना आयोग के दृष्टिकोण में 11 वीं पंचवर्षीय योजना में था.

पांचवीं रिपोर्ट, जाहिर तौर पर सबसे महत्वपूर्ण था जिसके अनुसार, कृषि क्षेत्र के साथ-साथ किसानों के समावेशी विकास का सुझाव दिया गया था. NCF के स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट का मूल उद्देश्य अनाज की पौष्टिकता को बनाये रखना, कृषि क्षेत्र में स्थिरता लाना और खेती में उपयोग किये जाने वाले सामानों के सस्ता करने के तरफ ध्यान देना और कृषि ऋण के बारे में फैसला लेने का था साथ ही उत्पादों को बेचने के लिए मंडी में कुछ बदलाव करने की थी.

स्वामीनाथन द्वारा सरकार से अनुरोध किया गया था कि अनाज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने के लिए रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के लिए, छोटे किसानों के हित की रक्षा करें और एक पेशे के रूप में कृषि में बढ़ते जोखिम की समस्या का समाधान करें.आयोग की प्रमुख सिफारिशें भूमि सुधार, सिंचाई सुधार, उत्पादकता वृद्धि, ऋण और बीमा, खाद्य सुरक्षा और किसान आत्महत्या की रोकथाम थीं.

 

उत्पादन लागत पर किसानों को 50% से अधिक मिलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 जून, 2018 को पांच राज्यों के किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान, उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक स्थिर तंत्र का वादा किया.

बैठक में भाग लेने वाले लगभग 100 किसान भारत के पांच राज्यों – पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आए थे. किसानों के लिए नीतियों को लाभकारी बनाने के लिए, प्रधानमंत्री ने किसानों को उत्पादन लागत पर 50% न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने और 2022 तक उनकी आय को दोगुना करने के लिए अपनी सरकार के संकल्प को दोहराया.

पीएम मोदी ने गन्ना क्षेत्र को बचाने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए गए अन्य कदमों के बारे में भी बात की, जिसमें गन्ना किसानों के लिए 8,500 करोड़ रुपये का कर्जमाफ पैकेज और 4,500 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन शामिल है. चीनी मिलों द्वारा लंबे समय से भुगतान न करने के लंबे समय से जारी मुद्दों सहित अपनी उत्पादित फसल के लिए पर्याप्त कीमत की मांग को लेकर किसानों द्वारा आयोजित विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के बीच पीएम की गन्ना किसानों के साथ बैठक हुई.

संजीव बाल्यान ने कहा, “हमारी सरकार किसानों के लिए प्रतिबद्ध है, और हम सुनिश्चित करेंगे कि उनमें से प्रत्येक को अपना बकाया समय पर मिल जाए. हम चीनी मिल को बंद नहीं करेंगे.”

प्रधान मंत्री ने घोषणा की कि केंद्रीय मंत्रिमंडल खरीफ सीजन 2018-19 की अधिसूचित फसलों के लिए अपनी आगामी बैठक में इनपुट लागत के 150% न्यूनतम समर्थन मूल्य के कार्यान्वयन को मंजूरी देगा, “सरकार ने एक बयान में कहा.

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) के दक्षिण-एशिया निदेशक पीके जोशी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुप्रतीक्षित निर्णय है (एमएसपी पर) और किसानों के लिए अच्छा होना चाहिए. जहां तक किसानों पर उच्च मुद्रास्फीति के प्रभाव का सवाल है, मुझे नहीं लगता है कि इसका कोई प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि, गेहूं और चावल में, पीडीएस परिचालन बढ़ती कीमतों के खिलाफ एक बफर के रूप में कार्य करता है और अन्य फसलों में भी, यह थोक दामों को नहीं बढ़ाएगा.”

किसानों के कल्याण का लक्ष्य रखने वाली स्वामीनाथन रिपोर्ट के साथ, यह सिफारिश की जा रही है कि वास्तव में यह अच्छी खबर है.

 

 

 

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