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मिलिए एक पत्रकार से जो घरेलु काम वाली महिलाओं को सेल्फ डिफेन्स क्लासेस मुफ्त में दिलवा रही हैं

तर्कसंगत

January 31, 2019

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राष्ट्रीय राजधानी में ईव-टीजिंग और महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. एक शाम काम से लौटते समय, सिल्वी कालरा ने अपने इलाके के कुछ कामवाली बाई की बातचीत को सुनकर समझा कि उनके साथ-साथ उनकी बेटियों को भी कैसे इन सब चीज़ों से जूझना पड़ता है. उन्होनें इस परिस्थितियों को बदलने की ठान ली. मुफ्त में सेल्फ डिफेन्स की क्लासेस देकर, वह उन्हें खुद की सुरक्षा के प्रति जागरूक और निडर बना रही हैं.

एक पत्रकार और कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट के रूप में काम करते हुए, उन्हें मालूम है कि शिक्षित होने के क्या फायदे हैं. डोमेस्टिक हेल्प के लिए कुछ करने और उन्हें सशक्त करने के उनके विश्वास ने उन्हें ये क्लासेज स्टार्ट करने की प्रेरणा दी. तर्कसंगत से अपनी नेक पहल के बारे में बात करते हुए, वह कहती हैं, “पहला सेल्फ डिफेन्स क्लास  2018 के अंत में आयोजित किया गया था, अगले बैच को शुरू करने में बहुत समय और योजना बनाई गई. लेकिन स्टूडेंट्स के उत्साह से ये काफी अच्छे से हुआ मैंने अपने ट्रेनर, अनुज की मदद से, मैंने जनवरी में भी ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया.”

 

 

अधिक आत्मविश्वास होने से महिलाओं को ऐसी स्थितियों से निपटने में मदद मिलती है. लेकिन समाज से कटे और कमजोर वर्गों की महिलाओं की अक्सर उपेक्षा की जाती है और उनके लिए सुरक्षित स्थान बनाने की आवश्यकता को हमारे समाज ने नजरअंदाज कर दिया है. इन ट्रेनिंग सेशन में शामिल होने वाले अधिकांश घरेलू कर्मचारियों और उनकी बेटियों को पहले किसी न किसी रूप में दुर्व्यवहार या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है. अपने पहले बैच में मिले रिस्पांस के बारे में तर्कसंगत के साथ बात करते हुए, सिल्वी ने बताया, “दिल्ली के पश्चिम विहार में घरेलू काम करने वाली रेखा नामक एक प्रतिभागी पहले सेशन में भाग लेने के बाद काफी कुश थी. शुरू में, वह इसके बारे में उत्सुक नहीं थी. लेकिन जैसे उसमें धीरे धीरे आत्म विश्वास आते गया, वह दोबारा से आना चाहती है और क्लासेज में इसका अधिक से अधिक प्रक्टिस करना चाहती है.”

 

 

उन्होनें बताया कि इन क्लासेज में आने के बाद लोगों की सोच बदल गयी है और वे चाहती हैं कि उनकी बेटियाँ यह सेल्फ डिफेन्स तकनीक सीख सकें. उनके लिए समय निकालना और काम के बाद क्लासेज में आना मुश्किल है, फिर भी वे इसे नियमित रूप से करना चाहते हैं. उनमें से कई अपनी बेटियों को घर छोड़ने से भी डरते हैं क्योंकि वे सुरक्षित इलाकों में नहीं रहते हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, सिल्वी कालरा ने अपनी फ्री सेल्फ डिफेन्स क्लासेज को अपनी बचत के साथ फण्ड किया है. शायद ही कोई वालंटियर इस नेक काम के लिए आगे आया हो, उन्होनें क्लासेज  के लिए ट्रेनर भी खुद से खोजे है.

 

 

अनुज एकमात्र ट्रेनर थे जो मदद के लिए तैयार थे. यह क्लास  उनकी मदद के बिना संभव नहीं होता, कुल मिलाकर, 10 लोग इस सेल्फ डिफेन्स ट्रेनिंग क्लास में शामिल हुए. घरेलू कामगारों और उनकी बेटियों के साथ, कुछ अन्य युवा भी क्लास में शामिल हुए. उन्होनें उन परिस्थितियों में वापस लड़ने के लिए उन्हें बुनियादी गुर सिखाए.” तर्कसंगत को सिल्वी ने बताया.

 

 

हालाँकि ये सही है कि केवल कुछ कक्षाओं और सत्रों के साथ सेल्फ डफेन्स सीखना संभव नहीं है, फिर भी वह इसकी और ज़ायदा क्लासेज करवाना चाह रही हैं. आत्मरक्षा के लिए नियमित अभ्यास के साथ-साथ फिजिकल फिटनेस की आवश्यकता होती है जो काफी कठिन है. चूंकि यह सब कुछ बनने में समय लगता है, इसलिए इन लोगों को नियमित रूप से क्लासेज करना ज़रूरी है. लेकिन धन की कमी के बावजूद, वह सकारात्मक रूप से महिलाओं के एक सुरक्षित समुदाय के निर्माण की ओर देख रही है, जहाँ वे एक साथ आकर सेल्फ डिफेन्स का अभ्यास कर सकें और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल कर सकें. महिलाओं के लिए ज़रूरी है कि वह खुद से अपनी रक्षा कर सकें और यह उन्हें और अधिक स्वतंत्र बना देगा.

उत्पीड़न का सामना करने वाली इन महिला घरेलू कामगारों में से अधिकांश साक्षर या आर्थिक रूप से स्थिर नहीं हैं, जो आगे आने और खुद को वापस लड़ने के लिए शिक्षित कर सकें लेकिन उन्हें सशक्त बनाने की सिल्वी की इस कोशिश ने कई महिलाओं को ऐसी हलालत से निपटने के लिए आत्मविश्वास दे दिया है. तर्कसंगत के साथ अपनी पहल के बारे में अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए, वह कहती हैं, “मेरा चाहती हूँ कि मैं महिला और बाल विकास मंत्रालय के साथ काम करूँ, लेकिन हमने अभी कुछ सेशंस ही किये हैं. अगर मंत्रालय इस पर काम करने के लिए हमारी मदद कर सकता है, तो हम और अधिक लड़कियों और महिलाओं को सुरक्षित महसूस करने में मदद कर सकते हैं.”

तर्कसंगत सिल्वी कालरा द्वारा महिलाओं के हाशिए और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना करता है उम्मीद करता है कि  समाज को महलाओं के लिए सुरक्षित स्थान बनाने की दिशा में उनका कदम कभी न रुके.

 

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