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क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए 2038 तक जर्मनी अपने सभी 84 थर्मल पावर प्लांट को बंद कर देगा

तर्कसंगत

Image Credits: Wikipedia

February 4, 2019

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जर्मनी, जो मुख्य रूप से बिजली उत्पन्न करने के लिए कोयले पर निर्भर है, उसने 2038 तक कोयले पर चलने वाले अपने सभी बिजली संयंत्रों को बंद करने का फैसला किया है. सरकार के 28-सदस्यीय समूह “कोल कमीशन” ने शनिवार को 21 घंटे की लंबी मैराथन बैठक के बाद क्लाइमेट चेंज से लड़ने के लिए अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के क्रम में यह निर्णय लिया. चांसलर एंजेला मर्केल की सरकार आयोग की सिफारिशों पर अमल करेगी.

 

एक साहसिक मगर चुनौतीपूर्ण फैसला

जो देश अपनी 40% बिजली की ज़रूरतों के लिए कोयले पर निर्भर हो वैसे देश के लिए, यह  निर्णय साहसिक है और ऐसे लक्ष्य को पूरा करने के लिए  उन्हें अथक प्रयास करनी होगी.

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, जर्मनी में 2016 में उत्पन्न 42% बिजली थर्मल पावर प्लांट से आती थी और 2000 से अगर उनके बदलावों को देखा जाये, तो पहले 53% बिजली पहले कोयले से प्राप्त होती थी तो इस लिहाज़ से सत्रह वर्षों में केवल 11% का परिवर्तन हुआ है. कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से छुटकारा पाने के लिए और अगले 19 वर्षों में रिन्यूएबल सोर्स से 40% ऊर्जा प्राप्त करना जर्मनी के लिए निश्चित रूप से एक कठिन चुनौती है.

यह विशेष रूप से मुश्किल है क्योंकि जर्मनी ने 2011 में जापान की फुकुशिमा आपदा के बाद 2022 तक अपने सभी न्युक्लीअर पावर प्लांट को बंद करने का फैसला किया है. अब तक यह अपने 19 न्युक्लीअर पावर प्लांट में से 12 को बंद कर चुका है.

आयोग ने थर्मल पावर प्लांट को बंद करने के कारण प्रभावित क्षेत्रों के नुक़सान को कम करने के लिए $ 46 बिलियन की सिफारिश की. 28 सदस्यीय सरकारी आयोग के अध्यक्ष रोनाल्ड पोफला ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.”

जर्मनी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और बिज़नेस लीडर्स परेशां हैं कि इस फैसले से उनके उद्योगों पर असर पड़ेगा. इसके कारण से बिजली महंगी हो जाएगी और विदेशी कंपनियों की तुलना में उनके उत्पाद महंगे हो जायेंगे.

समिति ने सिफारिश की कि अगले तीन वर्षों में 12.5 गीगावाट की क्षमता वाले 24 थर्मल पावर प्लांट बंद हो जाएंगे.

तर्कसंगत को उम्मीद है कि जर्मनी निर्धारित समय से पहले लक्ष्य पूरा करने में सक्षम हो जाये और भारत सहित अन्य देश इस फैसले की तरह कदम उठाएं. अगर क्लाइमेट चेंज से जल्द ही निपटा नहीं गया, तो यह मानव सभ्यता में कयामत लाएगा. दुनिया भर के देश अभी काफी ज़्यादा क्लाइमेट चेंज का सामना कर रहा है.

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