मेरी कहानी

मेरी कहानी: एक समय मेरे कुछ रिश्तेदारों ने मेरे माता-पिता को मुझे एक अनाथालय में छोड़ने का सुझाव दिया था

तर्कसंगत

February 4, 2019

SHARES

मेरा नाम इंद्रजीत सिंह डंग है, मैं देहरादून, उत्तराखंड में रहता हूँ. मैं पेशे से ग्राफिक और वेब डिजाइनर हूँ, एक पार्ट टाइम टेक ब्लॉगर साथ ही साथ पैरापैलेजिक (सेरेब्रल पाल्सी) हूँ जो अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जी रहा है.

1 साल की उम्र में, मेरा पूरा शरीर पोलियो के गलत वेक्सिनेशन के कारण बेकार हो गया था, सालों के इलाज के बाद, मेरा ऊपरी शरीर मेरे कंधों को छोड़कर पूरी तरह से ठीक हो गया है, जो अब भी अपनी असल क्षमता का केवल 70% ही काम कर पाता है, लेकिन मेरे पैर कभी ठीक ही नहीं हुए और मैं खड़ा नहीं हो सकता और न ही चल सकता हूँ और पूरी तरह से व्हीलचेयर पर ही रहता हूँ. मेरे माता-पिता और बहन हमेशा सपोर्टिव रहे हैं और मुझे अपने सपनों को साकार करने के लिए हिम्मत दिया है.

एक समय ऐसा भी था जब मेरे कुछ रिश्तेदारों ने मेरे माता-पिता को मुझे एक अनाथालय में छोड़ने का सुझाव दिया था, लेकिन मेरे माता-पिता ने कभी उनकी बात नहीं सुनी. मुझे खुशी है कि मैंने उन सभी लोगों को गलत साबित कर दिया और अपने माता-पिता को जीवन में मेरी छोटी-छोटी उपलब्धियों से गौरवान्वित किया.

 

 मैंने चंडीगढ़ से अंग्रेजी माध्यम में सीबीएसई स्कूल में 10 वीं (माध्यमिक) तक अपनी शिक्षा पूरी की, लेकिन बाद में हम अपने पुराने शहर देहरादून वापस आ गए मगर वहाँ किसी भी स्कूल में विकलांग बच्चों के लिए कोई बुनियादी सुविधाएं नहीं होने के कारण, मैंने एनआईओएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) से हायर सेकेंडरी (12 वीं, इंग्लिश मीडियम) में दाखिला लिया और फर्स्ट डिवीजन से क्लियर किया. मैंने HNBGU (हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय) में अपने ग्रेजुएशन के लिए दाखिला लिया, लेकिन कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में मेरी बढ़ती रुचि के कारण इसे पूरा नहीं किया. मैंने बिना किसी फॉर्मल ट्रेनिंग या पढ़ाई  के चीजों को सीखना शुरू कर दिया. एक कंप्यूटर, इंटरनेट, Google और कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ, मैंने ग्राफिक / वेब डिजाइनिंग, कई आईटी स्किल, ब्लॉगिंग और डिजिटल मार्केटिंग में महारथ हासिल की और अपने जुनून को अपने पेशे में बदल दिया.

मैंने एक एंट्रेप्रेनयूर और एक सफल ग्राफिक और वेब डिज़ाइनर के रूप में देहरादून, उत्तराखंड में HD THE DESIGNER के नाम से खुद का ब्रांड बनाया है और पिछले दस साल से बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण या सर्टिफिकेट के इसे अच्छी तरह से चला रहा हूँ. सभी स्किल और नॉलेज मैंने इंटरनेट से खुद से सीखा है. पूरे भारत में मेरे सौ से अधिक ग्राहक हैं और उनके साथ साथ मैंने कुछ विदेशी प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया है.

वर्ष 2015 में, मैंने पीडब्ल्यूडी (लोक कल्याण विभाग) उत्तराखंड, सरकार के लिए लोगो डिजाइन किया. उत्तराखंड के वन विभाग के एक कार्यक्रम ‘वाइल्डलाइफ वीक’ के लिए मैंने वर्ष 2014 से कई सारे लोगो, निमंत्रण, बैनर, क्रिएटिव सामग्री तैयार की है यह हर साल -, 1 से 8 अक्टूबर के बीच राजाजी टाइगर रिजर्व के राष्ट्रीय उद्यान, देहरादून, उत्तराखंड में मनाया जाता है.

 

मेरी विकलांगता मुझे अपना जीवन पूरी तरह से जीने से रोक नहीं सकी. मेरा मानना ​​है कि अगर भगवान ने मुझसे एक चीज ली है, तो उन्होंने मेरी कमजोरी को जीतने के लिए एक विशिष्ट और रचनात्मक दिमाग के साथ मुझे आशीर्वाद दिया. ईश्वर ने मुझे जीवन जीने की शक्ति, प्रेरणा और आनंद दिया है. मुझे पता है कि व्हीलचेयर पर या सेरेब्रल पाल्सी के साथ अपना जीवन जीना आसान नहीं है लेकिन जीवन हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और आपके पास जो कुछ भी है उससे आपको खुश रहना चाहिए.

 

अपने शारीरिक प्रतिबंधों के कारण, मैं अपना सारा काम अपने घर से करता हूँ और मेरे सारे ग्राहक में से 80% ग्राहक इंटरनेट और फोन के माध्यम से मुझसे जुड़े हुए हैं. बीते सालों में, मैंने ऑनलाइन दुनिया में एक मजबूत ऑनलाइन नेटवर्क और अपनी पहचान बनाई है. मेरी वेबसाइट ही मेरे ऑफिस के रूप में काम कर रही है और पिछले  3-4  सालों से वर्तमान में मेरी वेबसाइट गूगल पर नंबर 1 रैंकिंग पर है.

वर्ष 2008 में, मैंने एक लोकल एनजीओ की मदद से विकलांग या आर्थिक रूप से अस्थिर लोगों के लिए एक अनूठी कांसेप्ट के साथ एक मंथली मैगज़ीन की 2000 कॉपियां डिजाइन और पब्लिश की थी. मैगज़ीन का शुभारंभ श्री यशपाल आर्य (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेता और उत्तराखंड विधान सभा के सदस्य) द्वारा किया गया था, लेकिन मैं जिस एनजीओ से जुड़ा था, उससे वित्तीय और नैतिक समर्थन नहीं मिलने के कारण यह कांसेप्ट फ़ैल हो गया, लेकिन मैं इसे फिर से शुरू करने की कोशिश करूंगा. अगले कुछ वर्षों में अपने खुद के पैसे और बेहतर प्लानिंग के साथ मैं इसे शुरू करने की सोच रहा हूँ.

इसके अलावा, मैंने लोगो डिजाइनिंग के लिए कुछ ऑनलाइन प्रतियोगिताओं में $ 100, $ 200 और $ 500 पुरस्कार राशि भी जीती है. मैंने i Next न्यूज़पेपर को दिए एक इंटरव्यू में देहरादून के स्कूल में विकलांग बच्चों के लिए अनुपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने में अपने तरफ से मदद करने की तत्परता भी ज़ाहिर की है, ताकि बचपन में मुझे जो मुश्किलें हुई हो वो आने वाले बच्चों को न हो. 

 

 

नवंबर 2017 में, मुझे कैविनकेयर एबिलिटी अवार्ड्स 2018 द्वारा आयोजित मास्टरी अवार्ड के लिए शॉर्टलिस्ट / नॉमिनेट किया गया था. ये तीन अवार्ड ऐसे विकलांग व्यक्ति को दिए जाते हैं जिन्होनें अपनी पसंद के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि प्राप्त की हो, यह किसी भी क्षेत्र में हो सकते हैं कला, फिल्म, मेडिसिन, साइंस, टेक्नोलॉजी, शिक्षा आदि. उनके टीम के सदस्य मेरे घर आ कर मेरा, मेरे ग्राहकों और परिवार का इंटरव्यू लिया. यह एक शानदार अनुभव था और उनके टीम के सदस्य मुझे काफी प्रभावित थे लेकिन अफसोस की बात है कि मैं पुरस्कार नहीं जीत सका.

मैं अपने व्यवसाय को अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अपने लक्ष्य की ओर काम कर रहा हूँ और इसे देश की सर्वश्रेष्ठ डिजाइन एजेंसी के रूप में स्थापित करना चाहता हूँ. मेरा एक एनजीओ स्थापित करने का भी सपना है, जहां मैं वंचित, विकलांग और आर्थिक रूप से अस्थिर बच्चों या युवाओं को मुफ्त बुनियादी कंप्यूटर शिक्षा दे सकूं, ताकि वे अपने जीवन में वैसा ही बदलाव ला सकें जैसा मैंने अपने जीवन में किया है. मैं उन्हें प्रेरित करना चाहता हूँ और उन्हें संदेश देना चाहता हूँ कि आप कभी भी अपने आप संदेह न करें कि आप कौन हैं, उस वक़्त भी जब आप परफेक्ट नहीं हो या आप लोगों से अलग हो.

 

कहानी: इंदरजीत सिंह डंग

 

अगर आपकी भी कोई कहानी है तो हमें तर्कसंगत के फेसबुक मैसेंजर पर लिख भेजिए.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...