ख़बरें

रिपोर्ट: केरल में धूम्रपान, शराब और अन्हेल्दी डाइट की वजह से लाइफस्टाइल डिजीज बढ़ रही है

तर्कसंगत

Image Credits: The Times Of India

February 4, 2019

SHARES

31 जनवरी को, केरल सरकार ने राज्य विधानसभा में एक आर्थिक समीक्षा-2018 प्रस्तुत की जिसने राज्य की स्वास्थ्य स्थिति की एक गंभीर तस्वीर सामने रखी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य देश में किसी भी अन्य राज्य की तुलना में अधिक जीवन शैली की बीमारियों की चपेट में है.

 

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में केरल सबसे ऊपर है

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, रिपोर्ट में राज्य के बहुचर्चित स्थायी स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आये हैं. इसने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोरोनरी हार्ट डिजीज, कैंसर और जेरिएट्रिक (उम्र दराज़ लोगों की बीमारी) व्याप्त हो रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में, एनसीडी के कारण होने वाली मौतों की कुल संख्या 42 प्रतिशत है, ऐसी बीमारियों के कारण केरल में यह संख्या 30-59 वर्ष के आयु वर्ग में कुल मौतों के 52 प्रतिशत से भी अधिक है.

विश्व बैंक और नीतीयोग द्वारा तैयार हालिया हेल्थ इंडेक्स रिपोर्ट के बाद ये खबर सामने आई है जिसमें कि यह खुलासा हुआ कि लाइफस्टाइल डिजीज के कारण बीमार पड़ने वाले लोगो की संख्या में केरल सबसे ऊपर है. यह काफी आश्चर्यजनक है कि स्वास्थ्य सूचकांक के लिए जो राज्य सूची में ऊपर है, उसी राज्य में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की संख्या भी बढ़ रही है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “अध्ययनों से पता चलता है कि केरल में 27 प्रतिशत पुरुष डायबिटीज से ग्रसित हैं जबकि पूरे भारत भर में यह आंकड़ा केवल 15 प्रतिशत है; भारत में महिला आबादी का 11 प्रतिशत मधुमेह से ग्रसित है जबकि इसकी तुलना में केरल में 19 प्रतिशत महिलाएं डायबिटीज से ग्रसित हैं. जेनेटिक कारण, आहार संबंधी आदतें और स्थिर जीवन शैली को इसका कारण माना जा रहा है.”

हाई ब्लड प्रेशर के मामलों की संख्या देते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि केरल में 40.6 प्रतिशत वयस्क पुरुष और 38.5 प्रतिशत वयस्क महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं. इस बीच, राष्ट्रीय स्तर पर संख्या 30.7 प्रतिशत और 31.9 प्रतिशत के साथ बहुत कम है. मोटापा, हाइपरलिपिडिमिया, दिल का दौरा और स्ट्रोक की घटनाएं भी अधिक हैं. राष्ट्रीय औसत की तुलना में केरल में पुरुषों में कैंसर की मृत्यु दर बहुत अधिक है.

 

किसे दोषी ठहराया जाए?

लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ बुरी आदतों के कारण होती हैं. ये आमतौर पर शराब, ड्रग्स और धूम्रपान, सेडेंटरी लिफ़ स्टाइल और अन्हेल्दी खाने के कारण होते हैं. रिपोर्ट के अनुसार तेज़ी से हो रहे आधुनिकीकरण और शहरीकरण के कारण जीवनशैली संबंधी बीमारियों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है. राज्य में एनसीडी में वृद्धि के लिए स्थिर शराब और तंबाकू का अत्यधिक उपयोग, अन्हेल्दी खाने के पैटर्न, एक्सरसाइज के लिए समय न देना और काम के स्ट्रेस को जिम्मेदार ठहराया गया है.

रिपोर्ट समस्या पर रोक लगाने के लिए इस मामले में उचित और समय रहते हस्तक्षेप करने की मांग करती है. इसमें कहा गया है कि अगर एनसीडी को कम करने के लिए कुछ नहीं किया गया, तो भविष्य में उससे जुडी बीमारियों की संख्या में काफी वृद्धि होने की संभावना है क्योंकि लोगों की उम्र भी बढ़ रही है और जीवनशैली में बदलाव जारी है. दवाओं की उच्च लागत और उपचार की लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए, यह कम आमदनी वाले लोगों के लिए बोझ बन सकता है.

भारत में, केरल ने किसी अन्य राज्यों की तुलना में बहुत पहले प्रतिस्थापन-स्तर की उर्वरता हासिल की है, यही वजह है कि केरल में बुजुर्गों की आबादी सबसे अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की आबादी 3.34 करोड़ है, वृद्ध जनसंख्या (60 वर्ष से अधिक) 42 लाख है. इससे राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर पर्याप्त प्रभाव पड़ता है. इससे केरल आर्थिक तनाव में है क्योंकि राज्य में कम उम्र की आबादी होगी. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का ओल्ड आगे डिपेंडन्सी रेश्यो 142 है, जबकि जन्म के समय हायर लाइफ एक्सपेक्टेंसी के कारण केरल में यह 196 है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...