सप्रेक

कास्टलेस वेडिंग: पुणे के कपल ने अपने टाइटल को छुपाकर संविधान के सिद्धांतों के साथ शादी की रस्में पूरी कीं

तर्कसंगत

February 4, 2019

SHARES

हाल के दिनों में भारत ने जहां कुछ चर्चित महंगी ‘लार्जर देन लाइफ’ जैसे  शादियों को देखा है, वहीं कुछ ऐसे दूल्हा दुल्हन भी हैं जो एक अनोखे तरीके से शादी के बंधन में बांध रहे हैं, समाज द्वारा बनाये गए कुछ गैरज़रूरी मानकों   के बावजूद, महाराष्ट्र के पुणे से सचिन आशा सुभाष और शारवरी सुरेखा अरुण ने 26 जनवरी, 2019 को अनूठे तरीके से शादी की.

 

एक अलग तरह की शादी

जब  भारत अपना 70 वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, यह जोड़ी सत्यशोधक तरीके से एक-दूसरे से शादी करके भारत के युवाओं के लिए मिसाल कायम कर रहे थे. आप सोच रहे होंगे कि यह कैसा विवाह होता है? इसके बारे में पहली बार समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले ने बताया था. सत्यशोधक विवाह बिना पुजारियों और बिना सामान्य धार्मिक अनुष्ठानों के किये जाने वाले समारोह को कहते हैं.

 

 

अब के समय में जबकि धर्म, जाति, वर्ग और खर्च  भारतीय शादियों का अंतरंग हिस्सा बन चूका है, महाराष्ट्र के इन दो सोशल वर्कर, ने एक जातिविहीन शादी में भाग लेने का फैसला किया जो बाकि शादियों के  ग्लिट्ज़ और ग्लैमर से बहुत दूर था. यह दंपती दो साल पहले एक सामाजिक कार्यक्रम में एक-दूसरे से मिले और एक दूसरे को शादी के लिए पसंद कर लिया. जब उन्होंने अपनी शादी के बारे में बात की, तो सचिन और शार्वरी दोनों को पता था कि उनकी शादी एक ऐसी जगह है, जहां वे सही मायने में एक मिसाल कायम करेंगे.

 

पुस्तकालयों के निर्माण के लिए किताबें दान की

तर्कसंगत से बात करते हुए, सचिन आशा सुभाष ने कहा, “हमारी शादी सरल थी, हमने शादी के निमंत्रण कार्ड भी नहीं छपवाए क्योंकि हमने टेक्नोलॉजी  का इस्तेमाल किया और इसे सोशल मीडिया पर अपने सभी दोस्तों और परिवारों को निमंत्रण भेज दिया.” युगल ने महंगी शादी के उपहारों के बजाय अपने मेहमानों कोतोहफे में किताब लाने को कहा, उन्होंने कहा, “हमने अपनी शादी में लगभग 1000 लोगों की मेजबानी की और 1200 से अधिक पुस्तकें प्राप्त कीं और हम इन्हें गाँव के लाइब्रेरी में दान कर देंगे.”

केवल इतना ही नहीं, बल्कि अपने ’जातिविहीन’ विवाह के अनुसार, इन दोनों ने जाति-आधारित सोच को खत्म करने के लिए एक दूसरे के परिवारों से अपने अंतिम नाम छिपाए रखा. उन्होंने कहा, “मैंने और मेरी पत्नी दोनों ने हमारे अंतिम नामों को निजी रखते हुए एक दूसरे के परिवारों को इसके बारे में नहीं बताया है.”

 

 

संविधान पर आधारित विवाह

प्रत्येक रस्म जो एक पारंपरिक हिंदू विवाह में देखी जा सकती है, वह इस विवाह में नहीं थी  सचिन ने कहा कि वे और उनकी पत्नी कन्यादान के विचार पर भी विश्वास नहीं करते हैं, इसके अलावा, विवाह की शपथ भारतीय संविधान पर आधारित थी, जिसमें उन्होंने समानता, विकास, विवेक और कड़ी मेहनत के साथ-साथ आपसी सम्मान जैसे सात सिद्धांतों के आधार पर गाँठ बाँध ली.

यहां तक कि उनकी कुंडली भी आधुनिक थी। सुभाष ने कहा, “हमने अपनी खुद की आधुनिक कुंडली बनाई जहां हमने फैसला किया कि शैक्षिक योग्यता, आमदनी और अन्य चीज़ों को मिलकर शादी की. रिटर्न गिफ्ट के रूप में, दंपति ने एक किताब दी, जो शारवरी द्वारा लिखी गयी है, जिसमें उन्होनें अपने मेहमानों को इस अनोखी शादी का विवरण किया है.

शादी समारोह, पुणे राष्ट्र सेवा दल में आयोजित किया गया था, वहां महाराष्ट्र के कुछ प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति देखी गई और शादी की घोषणाएँ एक करीबी दोस्त ने की.सुभाष और शवरी दोनों महाराष्ट्र में दो अलग-अलग गैर सरकारी संगठन चलाते हैं जो सामाजिक उत्थान के लिए काम कर रहे हैं. तर्कसंगत दूसरों के लिए एक उदाहरण स्थापित करने के लिए इस जोड़े की सराहना करता है.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...