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राज ठाकरे ने अन्ना हज़ारे से प्रधानमंत्री या उनके वादों पर भरोसा न करने को कहा

तर्कसंगत

February 5, 2019

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भ्रष्टाचार के विरोध में धर्मयुद्ध के रूप में, अन्ना हजारे के उपवास ने 4 फरवरी को अपने छः दिन पूरे कर लिए, शिवसेना ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार से सामाजिक कार्यकर्ता के जीवन को बचाने की अपील की. कथित तौर पर, 81 वर्षीय 30 जनवरी से महाराष्ट्र के अहमदनगर में रालेगण सिद्धि में हड़ताल पर हैं. हजारे, जो लोकपाल आंदोलन का चेहरा भी हैं, केंद्र और महाराष्ट्र में किसान विरोधी समस्याओं के समाधान के साथ-साथ भ्रष्टाचार विरोधी प्रहरी नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं.

 

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की लड़ाई

3 फरवरी को पत्रकारों से बात करते हुए, अन्ना ने कहा कि अगर केंद्र ने उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो वह राष्ट्रपति को अपना पद्म भूषण पुरस्कार वापस कर देंगे. इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान उन्होनें  कहा, “मैं राष्ट्रपति को अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटाऊंगा. मैंने उस पुरस्कार के लिए काम नहीं किया, आपने मुझे ये अवार्ड इस लिए दिया क्यूंकि मैं उस वक़्त एक सामाजिक कारण से देश के लिए काम कर रहा था. अगर देश या समाज इस हालत में है, तो फिर मुझे पद्म भूषण क्यों रखना चाहिए?”

पांचवें दिन भी, हजारे का स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया, डॉक्टरों ने बताया कि जब से अन्ना ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, उनका 3 किलो से अधिक वजन कम हो चूका है. जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने 3 फरवरी को अन्ना हज़ारे के साथ मुलाकात की और  और मीडिया को कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से प्रासंगिक दस्तावेज सौंप दिए हैं. उन्होंने यहां तक ​​बताया कि राज्य सरकार उन विभिन्न मांगों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है, जिन्हें  अन्ना हजारे ने उठाया है.

हजारे समर्थन में, युवाओं ने सुबह अहमदनगर-पुणे राज्य राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिसके चलते सड़क पर जाम गया. हालांकि, दोनों तरफ छह किलोमीटर लंबी ट्रैफिक की भीड़ को देखते हुए, स्थानीय पुलिस ने गुस्साई भीड़ को शांत करने की कोशिश की और उन्हें रास्ता साफ करने के लिए कहा. एनडीटीवी के अनुसार कथित तौर पर विरोध के समर्थन में, जिले के लगभग 5000 किसानों को 4 फरवरी को अहमदनगर कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की संभावना थी, इसके अलावा, कल करीब 110 लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था. हालांकि, हजारे ने लोगों से अहिंसक तरीके से विरोध करने को कहा है.

MNS प्रमुख राज ठाकरे और जल संरक्षण मंत्री राजेंद्र सिंह ने 4 फरवरी को अन्ना हजारे से मुलाकात की, एनडीटीवी की रिपोर्ट में ठाकरे ने हजारे से  “बेकार सरकार” के लिए अपने जीवन का बलिदान नहीं करने के लिए कहा. “मैंने अन्ना से इन बेकार लोगों के लिए अपने जीवन का बलिदान नहीं करने की अपील की है. मैंने उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके किसी भी वादे पर भरोसा नहीं करने को कहा है.” इसके अलावा, वह आश्चर्यचकित थे कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जो हजारे की आंदोलन का हिस्सा थे, उनसे मिलने नहीं आए.

 

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