पर्यावरण

सत्यमेव जयते वॉटर कप: इस प्रतियोगिता ने महाराष्ट्र का नाम सूखाग्रस्त राज्यों से हटाने की योजना बनाई है

तर्कसंगत

Image Credits: Paani Foundation

February 5, 2019

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पानी फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2016 में बॉलीवुड अभिनेता, आमिर खान ने अपनी पत्नी किरण राव के साथ की थी. अपने प्रसिद्ध टीवी शो, सत्यमेव जयते की सफलता से प्रेरित होकर, आमिर ख़ान को एक फाउंडेशन बनाने की ज़रूरत का एहसास हुआ, जो कि ग्रामीण महाराष्ट्र में पानी के दिक्कत के मुद्दे पर काम कर सकता हो. उनके इस कोशिश ने अपना काम किया है और पहले तीन वर्षों में  ही अच्छे परिणाम दिखने लगे हैं.

इस फाउंडेशन द्वारा आयोजित  वॉटर कप एक प्रतियोगिता है जिसमें पूरे महाराष्ट्र के सभी तालुकाओं के लोगों को शामिल किया जाता है. इस प्रतियोगिता में, बरसात के मौसम में पानी के गड्ढों का निर्माण करके ज़्यादा से ज़ायदा पानी को जमा करने की होड़ लगती है. वे गाँव जो सबसे ज़्यादा पानी जमा कर पाते हैं उन्हें बड़ी मात्रा में पुरस्कार राशि दी जाती है. आकर्षक पुरस्कार राशि और इस प्रतियोगिता में शामिल गतिविधियों ने अपने पहले तीन वर्षों में इसे प्रसिद्ध बना दिया है. इस साल, वाटर कप 8 अप्रैल से 22 मई, 2019 तक चलेगा.

 

मिशन

पानी फाउंडेशन का उद्देश्य महाराष्ट्र को सूखा मुक्त बनाना है. महाराष्ट्र दशकों से कम बारिश का शिकार  रहा है. यह हमारे देश का सूखाग्रस्त क्षेत्र माना जाता है. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्याएं देखी गई हैं.

सरकार ने किसानों को कर्जमाफी और अन्य सहायता मुहैया कराकर मदद करने की भी कोशिश की है. लेकिन इन किसानों को भी अपने लिए कदम बढ़ाने और समाधान खोजने की जरूरत थी. वॉटर फाउंडेशन उसी सोच के साथ आई है, जहां वे इन लोगों को आत्मनिर्भर बनते देखना चाहते हैं.

वे वॉटर मैनेजमेंट के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए कई तरीके आजमा रहे हैं, वे ट्रेनिंग वीडियो दिखाते हैं, स्कूल प्रोजेक्ट करते हैं, कुछ किताबें हैं और लोगों को वाटरशेड मैनेजमेंट के विभिन्न पहलुओं के बारे में सिखाने के लिए मराठी भाषा में एक ऐप भी लॉन्च किया है.

 

वॉटर कप – फॉर्मेट

सत्यमेव जयते वॉटर कप एक छह सप्ताह चलने वाली लंबी प्रतियोगिता है जिसमें गाँव रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वाटरशेड मैनेजमेंट में सबसे अच्छा काम करने के लिए एक दूसरे से होड़ लगाते हैं. भाग लेने वाले गांवों में टीम के तीन से नौ लोग होते हैं. इन प्रतिभागियों को फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिन के ट्रेनिंग कार्यक्रम के लिए भेजा जाता है. लीडरशिप और कम्युनिटी  बिल्डिंग स्किल के साथ विभिन्न वाटरशेड मैनेजमेंट तकनीक उनको सिखाये जाते हैं.

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, मानसून की तैयारी में अप्रैल और मई के महीनों में एक प्रतियोगिता चलती है. लोग वालंटियर बन कर पानी रोकने वाली ढ़ांचाओं का निर्माण करते हैं, साथ ही मशीन के काम के लिए धन जुटाते हैं, सॉइल टेस्टिंग करते हैं, पानी का उपयोग करते हैं, पानी की बचत करने वाली तकनीकों को लागू करते हैं, पानी फाउंडेशन टीम तकनीकी सहायता के लिए लोगों की मदद करती है. निर्धारित समय अवधि के बाद, गांव वालों  की मेहनत को 100 मार्क्स पर आंका जाता है. शीर्ष तीन गांवों को 75 लाख, रु 50 लाख और रु 40 लाख पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाता है.

इस पहल को देश भर के लोगों ने बहुत सराहा है. महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष के वाटर कप, 2019 में योगदान देने की घोषणा की है. रतन टाटा, मुकेश अंबानी, दीपक पारेख, अजय पीरामल, राजीव बजाज और कई अन्य जैसे व्यवसायी कुछ वित्तीय योगदानों के लिए इस नेक पहल का हिस्सा बनना चाहते हैं.

 

आगे की योजना

तीन सफल वॉटर कप के बाद, पानी फाउंडेशन 2019 में अधिक से अधिक गांवों में इसका विस्तार करने की योजना बना रहा है. वॉटर कप 2018 के तीसरे संस्करण में 75 तालुकाओं की भागीदारी देखी गई जहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग से 22,269 करोड़ लीटर पानी किया गया. 45 दिनों की अवधि में इस वर्ष, फाउंडेशन ने 100 तालुकों तक पहुँचने महाराष्ट्र का नाम सूखाग्रस्त राज्यों से हटाने की योजना बनाई है.

 

 

 

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