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आसमान की उड़ान : तमिलनाडु के दो व्यवसाइयों ने 115 बुज़ुर्गों को उनकी ज़िन्दगी का पहला हवाई सफर कराया

तर्कसंगत

Image Credits: NDTV

February 6, 2019

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शनिवार, 2 जनवरी को, तमिलनाडु के देवनारायणपालयम के 115 बुज़ुर्ग कोयंबटूर से चेन्नई जाने के लिए अपनी ज़िन्दगी में पहली बार प्लेन से सफर किया. 102 वर्षीय कुप्पाथल के लिए, राज्य का यह दौरा एक सपना सच होने जैसा था, सभी ने उनके गांव के दो उद्यमियों धन्यवाद और आशीर्वाद दिया.

 

सपना सच हो गया

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार ग्रुप में मुख्य रूप से कपड़े की फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाएं शामिल थीं, और यह एक तरह की तीर्थयात्रा थी, लौटते समय इन लोगों को मंदिरों और मस्जिदों की सैर कराते हुए बस द्वारा कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई और वेल्लोर घुमाया गया.

“विमान की सवारी बहुत अच्छी थी. मुझे मज़ा आया. उन्होंने मेरी अच्छी तरह से देखभाल की, ”ग्रुप में सबसे बड़ी कुप्पाथल ने कहा.

कुप्पाथल ही नहीं, प्लेन में सफर करने वाले सभी लोगों के लिए यह एक सपने के सच होने जैसा था. 57 वर्षीय जी वल्लीमल ने कहा कि एक प्लेन में सफर करना उन्होनें कभी नहीं सोचा था, क्योंकि  आज तक उन्होंने कभी ट्रेन की यात्रा भी नहीं की. 63 वर्षीय सरस्वती, जो हर बार आकाश में प्लेन को उड़ते देखती थीं,  ने कहा  कि यह एक “कभी न भुलाने वाली घड़ी है.”

 

एम रवि, इस सफर को स्पांसर करने वाले दो व्यक्तियों में से एक हैं उनके लिए, अपने ग्रामीणों को प्लेन की सवारी करने का विचार तब आया जब वह पहली बार कोलकाता के लिए एक बिज़नेस ट्रिप पर गए थे और इसके बाद उनके मन में यह इच्छा बढ़ते गयी. उन्होंने कहा कि उनके स्वर्गवासी पिता, ग्रामीणों से बहुत प्यार करते थे और उनके लिए बहुत कुछ किया था, और इसलिए वह इस विरासत को आगे ले जाना चाहते थे. एक कपड़ा व्यापारी, उनके इस सपने को साकार करने में अपनी भागीदारी की और दोनों ने प्लेन के टिकट का खर्च बाँट लिया.

“दूसरों को खुश करने में ख़ुशी मिलती है. मैंने वही किया है सभी मेरे परिवार की तरह हैं. मरने के बाद हम पैसे तो लेकर कहीं जायेंगे नहीं” रवि ने कहा.

इससे पहले 2018 में, हरियाणा के हिसार जिले के सारंगपुर गाँव के एक पायलट विकास ज्ञानी ने 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी ग्रामीणों के लिए हवाई यात्रा की व्यवस्था की थी. 22 लोगों में से अधिकांश ने ज्यानी की पहल के बाद अपना ज़िन्दगी की पहली हवाई सफर का अनुभव किया था. ज्यानी ने नई दिल्ली से अमृतसर तक की यात्रा की व्यवस्था की थी. उन्हें वाघा बॉर्डर, स्वर्ण मंदिर और जलियांवाला बाग घुमाया गया था.

तर्कसंगत  बुजुर्गों के प्रति इन दो पुरुषों की इस आदर भावना की सराहना करता है.

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