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मिलिए एक आर्मी अफसर से जो स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवानों को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं

तर्कसंगत

February 6, 2019

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भारतीय सेना देश की आदरणीय और भरोसेमंद संस्थानों में गिनी जाती है. दुनिया भर की सेनाओं में भारतीय सेना अपने बलिदान, वीरता और भाईचारे की भावना के लिए अव्वल मानी जाती है. आर्मी की इस विचारधारा को अपनाना हर एक इंसान के लिए महत्वपूर्ण है. इसी विचार के साथ आर्मी के प्रतिष्ठित अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल संदीप अहलावत देश की विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों का दौरा करते हैं. उनका लक्ष्य ना केवल विद्यार्थियों को सुरक्षा दल में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है अपितु विद्यार्थियों को सेना की धर्मनिर्पेक्षता, भाईचारे और एकता की भावना सिखाना है.

 

विद्यार्थियों तक पहुँचने वाले कैंपेन

भारतीय आर्मी अपने  ‘सर्विस बिफोर सेल्फ’ के उद्देश्य का सख्ती से पालन करती है. देश और देशवासीओं की सुरक्षा, शांति और समृद्धि आर्मी के मुख्य उद्देश्य हैं. लेफ्टिनेंट कर्नल अहलावत मानते है कि भले ही देश को आज़ादी 1947 में मिल गई पर आज भी लोग देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए रातदिन काम करते है. तो हम सभी को ये समझना जरुरी है कि ये स्वतंत्रता अनमोल है और इसीलिए हमे खुद को बेहतर बनाने के लिए कोशिश करनी चाहिए.

 

 

इसी विचार को लोगों तक पहुँचाने के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल अहलावत ने अभी तक देश के 30 शैक्षणिक संस्थानों में जा चुके हैं, उनमें से कुछ मशहूर संसथान जैसे  IIT दिल्ली, दिल्ली पब्लिक स्कूल और अन्य सरकारी स्कूल और यूनिवर्सिटी भी हैं. उन्होंने तकरीबन 30000 विद्यार्थियों को सम्बोधित किया है. “मैं समझता हूँ कि हर एक विद्यार्थी की अलग आकांक्षा और अलग लक्ष्य होती है, हर कोई आर्मी में शामिल होना नहीं चाहता और अन्य क्षेत्रों में जाना चाहता है पर मैं उन्हें सदा एक सैनिक के मूल्यों को अपनाने की सलाह देता हूँ.

 

 

लेफ्टिनेंट कर्नल अहलावत के शब्दों में धर्मनिरपेक्षता और बंधुत्व की भावना एक सैनिक के व्यक्तित्व में साफ झलकती है. इसीलिए आर्मी में मंदिर, मस्जिद या चर्च देखने को नहीं मिलेंगे, उनकी जगह पर एक सर्वधर्म स्थल होता है जहाँ हम यह प्रार्थना करते हैं कि हम हमारी फर्ज का निर्वाहन निष्ठा से कर सकें. आर्मी का एक सूत्र है “सबसे पहले देश, उसके बाद उसके साथी और सबसे अंत में व्यक्ति खुद.”

 

लेफ्टिनेंट कर्नल संदीप अहलावत का परिचय

लेफ्टिनेंट कर्नल संदीप अहलावत दृढ़ता से मानते है कि आर्मी की निष्ठा सिर्फ और सिर्फ संविधान के प्रति है. उनके मुताबिक उनके जैसे आर्मी के जवान संविधान के मूल मूल्यों की रक्षा के लिए सदा प्रयत्न करते है. लेफ्टिनेंट कर्नल संदीप अहलावत वही आर्मी अफसर है जिन्होंने हिंदी फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार के फिल्म ‘रुस्तम’ में उनके द्वारा पहने हुए नेवी की वर्दी की नीलामी का विरोध किया था. “वर्दी खून, पसीने और कठोर परिश्रम का  नतीजा है और जो सैनिक की शहादत के बाद तिरंगे के साथ हमेशा रहती है.”  यह उन्होंने अपने खुले पत्र में लिखा था. इसके बाद यह घटना काफी चर्चा में रही और अंत में अभिनेता और निर्माता ने  वर्दी की नीलामी के फैसले को छोड़ दिया. वे सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को सैनिकों की वीरता, बलिदान और त्याग की कहानी से अवगत कराते है, जो देश के लोगो को जानना जरूरी है.

 

 

तर्कसंगत कर्नल अहलावत की युवाओं को प्रेरित करने की इस अभियान के लिए तारीफ़ करता है, जिसके द्वारा वह युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं बल्कि साथ ही साथ चरित्र निर्माण में भी मदद कर रहे हैं.

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