पर्यावरण

तीन घंटे की सर्जरी के बाद गाय के पेट से निकाला गया 80 किलोग्राम पॉलिथीन कचरा

तर्कसंगत

February 8, 2019

SHARES

आवारा पशुओं के स्वास्थ्य पर प्लास्टिक के प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए, डॉक्टरों ने बुधवार को पटना के बिहार पशु चिकित्सा कॉलेज में गाय के पेट से 80 किलो पॉलिथीन कचरा निकाला है। सर्जरी और रेडियोलॉजी के प्रोफेसरों द्वारा छह साल की गाय के पेट से पॉलिथीन कचरे को हटाया गया. 

सर्जरी का नेतृत्व करने वाले सर्जरी और रेडियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर डॉक्टर जी.डी. सिंह ने कहा कि “13 साल के पेशेवर अभ्यास में यह पहला मामला है जब हमने गाय के पेट से 80 किलोग्राम से अधिक पॉलिथीन कचरा निकाला है. उन्होंने कहा कि सर्जरी को खत्म करने में तीन घंटे से अधिक समय लगा. जानवर फिर से ठीक हो रहा है और उसे छुट्टी दे दी गई है. लेकिन ऐसी स्थिति में अगले 10 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि रुमेन माइक्रोफ्लोरा निष्क्रिय हो जाता है, जिससे भूख कम हो जाती है. उन्होंने कहाइस तरह के मामलों में संभावना गंभीर होती है अगर उन्हें बहुत देर से रिपोर्ट किया जाता है. 

डॉ सिंह ने मालिकों पर यह आरोप लगाया कि वे अपने जानवरों को शहरी क्षेत्रों में चरने देते हैं. डॉ सिंह ने कहा, “लोगों को पॉलिथीन बैग में खाने की चीजें फेंकने से भी बचना चाहिए और पर्यावरण पर इसके बुरे प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए”.

जानवर के मालिक दीपक कुमार ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि गाय ठीक से नहीं खा रही थी तो उसे खुली भूमि में चरने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया गया था. वह गाय को अस्पताल तब लेकर आये जब उसने पूरी तरह से खाना बंद कर दिया।

 

प्लास्टिक एक खतरा है जानवरो के लिये 

यह भारत के अधिकांश बड़े शहरों में एक आम दृश्य है जहां जानवर के मालिक अपने जानवरो को खुली भूमि में स्वतंत्र रूप से चरने के लिये छोड़ देते हैं. गायों को खुले कचरे के डिब्बे में भोजन को ढूढ़ते हुये देखा जा सकता है. लगभग सभी खाद्य अपशिष्ट और कचरा प्लास्टिक की थैलियों में रखकर फेका जाता है. गाय अक्सर प्लास्टिक सहित बचा हुआ खाद्य खा जाती हैं.

जानवरों और प्रकृति के लिए करुणा सोसाइटी द्वारा किये गए एक अध्ययन में पाया गया कि समस्या शहरी क्षेत्रों में और भी गंभीर थी. रिपोर्ट में कहा गया है, “प्लास्टिक पूरी तरह से गाय के पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाती है और जानवर को असहनीय दर्द होता है, इसके अलावा प्लास्टिक के अवशेष डेयरी और पशु उत्पादों के माध्यम से मानव खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं.

 

यह कोई पहली बार नहीं है 

इस तरह की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है. मार्च 2017 में, वेटनरी डॉक्टरों ने आंध्र प्रदेश के जाटलपलेम गांव में एक गाय के पेट से 30 किलो प्लास्टिक कचरा निकाला था. डॉक्टरों ने सर्जरी के दौरान लोहे की जंग, फ्लेक्स बैनर बोल्ट, स्क्रू और नाखून भी निकाले थे.

सितंबर 2016 में, अहमदाबाद में जीवदया चैरिटेबल ट्रस्ट के डॉक्टरों ने एक गाय का ऑपरेशन किया था और उसके पेट से 100 किलो प्लास्टिक कचरा मिला था.

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...