मेरी कहानी

मेरी कहानी: वीडियो बनाने और ऐसी जगहों पर तस्वीरें क्लिक करने के बजाय पहले घायलों की मदद करें

तर्कसंगत

February 8, 2019

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मैं मेजर आदित्य जैन हूँ. मैं सेना में एक हेलीकॉप्टर पायलट हूँ. हाल ही में, उधमपुर जम्मू राजमार्ग पर एक दुर्घटना हुई, जिसमें एक मारुति वैन एक ट्रक के नीचे आ गई और उसमें सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल थे. मैं वहां से गुजर रहा था और मैंने दुर्घटनास्थल के आसपास कई लोगों को देखा. मुझे अपने ऑफिसियल कमिटमेंट के लिए देर हो रही थी लेकिन मैंने रुकने का फैसला किया.

जब मैं दुर्घटनास्थल पर पहुंचा तो मैंने देखा कि मारुति वैन के सामने दो व्यक्ति बैठे हैं लेकिन गंभीर रूप से घायल हैं और वाहन के फ्रेम में फंस गए हैं. मैं कुछ लोगों के साथ वहां उपलब्ध औज़ार जैसे कि लाठी और लोहे की पट्टी से उन जो आदमियों को गाड़ी से बाहर निकाला और जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल में भेजा.

पहले व्यक्ति पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत थी, क्योंकि वह पूरे शरीर पर लगी चोट से बेहोश था, पहले हमने उसे निकाला, मैंने एक गाड़ी को रोका और उसका ड्राइवर भी अपना रास्ता बदलकर हॉस्पिटल जाने को राज़ी हो गया, दूसरे व्यक्ति को मैं अपनी गाड़ी में अस्पताल ले गया. हम अस्पताल पहुँचे और उस दूसरे व्यक्ति से उसके परिवार का पता पूछा और उनके परिवारों को खबर किया. उनका ख़ून काफी बह चूका था उन्हें ख़ून की ज़रूरत थी, इसलिए मैंने अपने एक दोस्त के साथ खून दिया.

उस हालात में भी हम समय रहते उन दो लोगों को समय पर हॉस्पिटल पहुँचाने में सफल रहे और उनकी जान बच गयी. मुझे ऑफिस पहुँचने में देर हो गई थी और मुझे इसके लिए अपने हिस्से की डाँट मिलने वाली थी क्योंकि समय की पाबंदी सेना में कोई बहाना नहीं है. हालाँकि, पूरी घटना को समझाने के बाद, मुझे शाबाशी मिली और मेरे खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई.

मैं लोगों को संदेश देना चाहता हूँ कि वीडियो बनाने और ऐसी जगहों पर तस्वीरें क्लिक करने के बजाय पहले व्यक्तियों की मदद करें. पुलिस भी इन दिनों सभी को सहयोग करती है, यदि आप एक अच्छे नागरिक हैं तो कोई भी आपको अपनी रिपोर्ट या किसी भी चीज़ में शामिल नहीं करता है. यदि हम समय पर सड़क दुर्घटना में व्यक्तियों की मदद करते हैं, तो बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है.

धन्यवाद और जय हिंद.

 

कहानी:आदित्य जैन

 

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