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ये योग के माध्यम से जापान और विश्व की सेवा, साथ ही भारत में गरीब बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर रहीं हैं

तर्कसंगत

February 11, 2019

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जब नूपुर ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (IITTM) ग्वालियर में पढ़ने की इच्छा व्यक्त की, तो उन्हें अपने परिवार से विरोध का सामना करना पड़ा.  उनके लिए दूल्हे की तलाश शुरू करते हुए उन्हें साफ़ हिदायत दे दी गयी कि “तुम न तो पढ़ने जा रही हो और काम करने के बारे में तो सोचना भी मत”. उदास परन्तु ढृढ़ इच्छा के साथ, नूपुर बंगाल के गांव में अपने घर को छोड़कर लैंड ऑफ़ राइजिंग सन ‘जापान’ चली गयीं. “वर्षों बाद, जब मैं IITTM ग्वालियर में लगभग चार सौ छात्रों की एक सभा को संबोधित कर रही थी, मैं बहुत ख़ुश थी. ऐसा लगा जैसे मेरी ज़न्दगी ने एक पूरा चक्कर काटा हो” एक भावनात्मकता के साथ नूपुर तिवारी ने अपनी बात साझा करी। योग ट्रेनर, मोटिवेशनल स्पीकर और परोपकर की भावना रखने वाली नूपुर तिवारी एक योग-केंद्रित संस्था ‘हील टोक्यो’ की संस्थापक हैं, जो सभी के लिए शांति, सद्भाव और खुशियां लाने की इच्छा रखता है. तर्कसंगत के साथ इंटरव्यू में नूपुर ने एक साधारण गांव की लड़की होने से लेकर जापान, श्रीलंका और अफ्रीका में शांति और प्रेरणा फैलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि बनने तक के अपने सफर के बारे में बात की. उन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश में झुग्गी के बच्चों के लिए एक स्कूल को गोद लिया है और जल्द ही कोलकाता में एक और स्कूल खोलने की योजना बना रही हैं.

 

 

 

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जैसे छोटे इलाके में जन्मीं और पली-बड़ी नूपुर तिवारी ने बड़े होने तक आपने घर में बिजली नहीं देखि थी. उनका ग्रामीण बचपन लालटेन के सामने पढ़ाई करने और स्कूल पहुँचने के लिए तीन किमी नंगे पांव चलने की यादों से भरा हुआ है. “मैं एक रूढ़िवादी संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी हूँ जहाँ मैंने मेरे माता-पिता को बहुत सारे दान पुण्य का कार्य करते देखा हैं. शायद यही कारण था कि मैंने बहुत छोटी उम्र से ही मजबूत नैतिक सिद्धांत विकसित कर लिए थे”, नूपुर ने बताया.

दुनिया से अलग रहने वाली नूपुर ने किसी दिन दुनिया की सैर करने का सपना हमेशा देखा. अपने गाँव के बाहर की दुनिया के साथ पहले वाक्ये ने नूपुर को एक दर्दनाक अनुभव के साथ छोड़ दिया. पास के शहर में उनके कॉलेज में, उनके साथ न केवल भेदभाव किया गया अपितु उनकी ख़राब अंग्रेजी के लहजे, देहाती पोशाक और शर्मीले व्यवहार के कारण अकेला कर दिया. हालाँकि विश्वविद्यालय में पहली रैंक हासिल करना उनका एक मौन विरोध था.

कॉलेज में रहते हुए ही उन्होंने एक टीचर  के रूप में नौकरी कर ली और आगे एक उज्ज्वल भविष्य के लिए बचत करना भी शुरू कर दिया। लेकिन घर से शादी के दबाव में उनका दम घुटता था.

“मेरी माँ की शादी 17 वर्ष में हुई थी और मैंने उनकी परेशानियों को करीब से देखा है. मैं नहीं चाहती कि मेरी ज़िन्दगी उसी तरह से गुजरे” भावनात्मकता के साथ नूपुर ने बताया। “मेरे परिवार का कोई भी व्यक्ति गाँव से बाहर नहीं गया। इसके अलावा, मैं एक लड़की थी, जिसने चीजों को और भी कठिन बना दिया था. एक दिन, मैंने अपनी माँ को कोलकाता में मिली एक नई नौकरी के बारे में बताया और उनके आशीर्वाद और 500 रुपये के साथ घर छोड़ दिया” उन्होनें याद किया.

 

 

जापान की यात्रा

नूपुर के उत्साह और कड़ी मेहनत के कारण से उन्हें जल्द ही एक सीनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में Mitsubishi Compney से एक ऑफर आया और नौकरी की जगह जापान के शिकोकू में थी. नूपुर ने बिना दुबारा सोचे ऑफर स्वीकार कर लिया.

योग हमेशा नूपुर के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा रहा है. ये सब उनके पारंपरिक परिवार की बदौलत है. नूपुर बताती हैं,”मैंने देखा कि जापान में किस तरह से योग को एक फैशन स्टेटमेंट में बदल दिया गया है, जिससे इसका सांस्कृतिक मूल्य कम हो गया है.”

2003 में, नुपुर ने अपने मन से जापनीयों को योग के वास्तविक सार का एहसास कराने और उनके तनावपूर्ण जीवन में थोड़ी शांति देने के लिए मुफ्त योग क्लासेज़ शुरू किया. धीरे-धीरे, उन्होंने ट्रेडिशनल डांस क्लासेज़, कुकिंग वर्कशॉप्स और बंगाली भाषा के लेसन्स भी शुरू किया. नूपुर ने बताया, “मुझे स्कूलों में इंटरनेशनल रिलेशन्स और अंग्रेजी सिखाने की पेशकश की गई. अपने देश को एक विदेशी ज़मीन पर पहचान देने के मेरे प्रयासों की वजह से मुझे यहाँ की मीडिया ने ‘भारत के अनौपचारिक राजदूत’ की उपाधि दी” नूपुर ने एक टीवी एंकर और मॉडल के रूप में भी काम किया है और जल्द ही एक जापानी फिल्म में अभिनय करने वाली पहली भारतीय महिला होंगीं.

 

 

और फिर सब बदल गया

अप्रैल 2015 में, विशालकाय कुमामोटो भूकंप ने क्यूशू शहर में एक बड़े क्षेत्र को तबाह कर दिया, जहां वह रह रही थी. नूपुर याद करते हुए कहती हैं ,”मैं हैरान थी और सोच रही थी कि मैं उन लोगों की मदद कैसे कर पाऊँगी जिन्होंने मेरे जैसे अजनबी को इतना प्यार दिया.”

पैसे के योगदान के अलावा, उन्होंने महसूस किया कि उन्हें लंबे समय तक होने वाले प्रभाव के लिए कुछ शुरू करना चाहिए. नुपुर ने तर्कसंगत को बताया कि मैंने अपने क्लासेज़ में वालंटियर डोनेशन शुरू किया  और जिससे होने वाली आमदनी को सीधे लोगो के घरों के पुनर्निर्माण में लगा दिया. “मैंने कुमामोटो में मुफ्त योग शुरू किया, जिसने भूकंप में अपना सब कुछ खो देने वाले दुःखी लोगों को ठीक करने में मदद की. योग, ध्यान, आत्म-चिकित्सा अभ्यासों ने उन्हें नए सिरे से शुरू करने के लिए प्रेरित किया.”

उनके अद्भुत प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सराहा गया और संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बाढ़ से पीड़ित लोगो के लिए योग और उपचार अभियान आयोजित करने के लिए उनसे संपर्क किया.

 

 

हील टोक्यो की शुरुआत

पिछले साल मुंबई बाढ़ के पीड़ितों की मदद करने के बाद, नूपुर ने अपना ठिकाना जापान के दिल, टोक्यो, में बना लिया. उन्होंने पाया कि रोबोट वाले इस शहर में आत्महत्या की दर बहुत अधिक थी, यहां प्रत्येक निवासी तनाव और चिंता से ग्रस्त है और इस तरह 2017 में टोक्यो में “हील टोक्यो” का जन्म हुआ, जिसका उद्देश्य मानसिक रूप से घिरे हुए लोगो को राहत पहुंचना और उनकी जीवन शैली को बदलना था. हालांकि “हील टोक्यो” केवल योग और सकारात्मक उपचार तक ही सीमित नहीं रहा.

नूपुर ने बताया, “हील टोक्यो के साथ काम करते समय, मुझे अपनी मातृभूमि की ओर ध्यान देने के लिए एक अपने अंदर से आवाज आ रही थी. भारत में एक मित्र की मदद से मैंने यूपी के अलीगढ़ में एक स्कूल के बुरे हाल के बारे में सुना. बिना किसी दूसरे विचार के, मैंने स्कूल को गोद ले लिया और हील टोक्यो के पैसों से उसका पुनर्निर्माण कराया. अलीगढ़ में हील टोक्यो स्कूल अब 110 झुग्गी बच्चों के लिए एक खुशहाल जगह है, जहां दो अतिरिक्त कमरे, दीवारों पर पेंट और डिजिटल क्लासेज़ हैं.” नूपुर, जो स्वम एक गर्वशील माँ है, सभी छात्रों को किताबें, स्टेशनरी, स्कूल ड्रेस और सात्विक भोजन की व्यवस्था कराती हैं. उन्होंने योग और ध्यान के अनुभव को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रम में भी बदलाव कराया.

नूपुर बताती हैं, “जब मैं बच्चों के बीच खड़ी होती थी, तो मुझे एक अलग तरह का गर्व महसूस होता था और मैं ये सपना देखती हूँ  कि वे भी किसी दिन अपनी आने वाली पीढ़ियों को ऐसे ही प्रेरित करेंगे.

नूपुर अल्पपोषित बच्चों के लिए एक और स्कूल कोलकाता के Salt Lake में शुरू करने वाली हैं. अपनी माँ, जिनका हल ही में देहांत हुआ है, के सम्मान में नूपुर ने बंगाल की ग्रामीण महिलाओं के लिए एक सशक्तिकरण कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बनाई है.

 

 

अधिक जानने के लिए, हील टोक्यो के फेसबुक पेज पर संपर्क करें

: https://www.facebook.com/connectbodymindandsoul/

 

सभी के लिए एक संदेश

हर्ष और उत्साह से परिपूर्ण नूपुर कहती हैं, “हील टोक्यो” का आदर्श वाक्य जो प्राचीन भारतीय कहावत को दोहराता है, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (दुनिया ही मेरा परिवार है) है. “मैं केवल सकारात्मकता में विश्वास रखने और सभी में सकारात्मकता देखने का प्रयास करती हूं. आज बहुत से लोग मुझे अपनी प्रेरणा मानते हैं. मुझे विश्वास है कि अगर मैं सौ नूपुरों को प्रेरित कर सकती हूँ, तो वे एक हज़ार को प्रेरित करेंगे, जिससे खुशी और सकारात्मकता की एक लहर पैदा होगी.

 

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