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पूर्व स्टेटिस्टिक्स चीफ: एनएससी की नौकरी छोड़ने पर कोई अफसोस नहीं, लेकिन निति आयोग का दखल चिंता की बात

तर्कसंगत

February 11, 2019

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एक चौंका देने वाले घटनाक्रम में पीसी मोहनन, जो नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन (एनएससी) के अध्यक्ष और एक स्वतंत्र सदस्य हैं ने 28 जनवरी, 2019 को इस्तीफा दे दिया. एनएससी सरकार द्वारा फंडेड एडवाइजरी बॉडी है जो सर्कार के स्टेटिस्टिक्स के आंकड़ों की जांच परख करती है. मोहनन के इस्तीफे के पीछे का कारण रोजगार पर नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) की सर्वे रिपोर्ट जारी करने में देरी को बताया जा रहा है. रायटर की रिपोर्ट के अनुसार यह रिपोर्ट दिसंबर 2018 में रिपोर्ट जारी होने वाली थी. उनके साथ, एनएससी की एक अन्य सदस्य, जे.मीनाक्षी ने इसी कारण का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया.

 

मोदी सरकार के लिए यह आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है

उनके इस्तीफे के तीन दिन बाद, उन नौकरियों का आंकड़ा जो होल्ड पर था, बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार को लीक कर दिया गया था. आंकड़ों से पता चला है कि  2018 में वर्ष में भारत की बेरोजगारी दर 6.1% तक बढ़ गयी थी. यह पिछले 45 वर्षों में बेरोजगारी की उच्चतम दर है. यह कहना गलत नहीं होगा कि इन आंकड़ों से मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस साल के मई में होने वाले आम चुनाव में मुश्किल का सामना कर पड़ सकता है.

मोदी सरकार के समर्थन में, NITI Aayog, एक सरकारी थिंक टैंक ने बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा बताई गई नौकरी की संख्या को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पूरी नहीं थी और अभी भी बनाई जा रही थी. उन्होंने यह भी कहा कि तुलनात्मक नौकरियों की रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा तीन महीनों के आंकड़ों की आवश्यकता थी.

 

मोहनन की चिंता?

मोहनन ने कहा कि NITI Aayog इन आंकड़ों को जारी करने में कैसे शामिल हो सकता है, उन्होंने कहा कि प्रकाशित किए जाने से पहले आंकड़ों पर अंतिम अधिकार एनएससी को माना जाता है. सरकार द्वारा हाल के महीनों में संगठन को बार-बार दरकिनार किया गया था, और नौकरियों के आंकड़े को देरी से प्रकाशित करना भी उसी का हिस्सा थे. रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में, उन्होंने कहा कि कैलेंडर के अनुसार डेटा जारी किया जाना चाहिए, चाहे वह आपकी पसंद के अनुसार हो या न हो. उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संगठन ऐसा करने में विफल रहा है तो सिस्टम में विश्वसनीयता कहां है?

यह पूछने पर कि क्या आयोग की पवित्रता हस्तक्षेप से प्रभावित हो रही है, श्री मोहनन ने एनडीटीवी से कहा, “एक बात यह भी है कि आंकड़े सरकार से स्वतंत्र होने चाहिए. इसे निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए और आधिकारिक आंकड़ों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और आयोग ने यह सुनिश्चित किया कि इसे बनाए रखा जाए यह आयोग के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है कि स्टैट सिस्टम की स्वायत्तता बनाए रखी जाती है और यह केवल हमारे आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ा सकती है. विश्वसनीयता बहुत महत्वपूर्ण है. NITI Aayog का शामिल होना वांछनीय बात नहीं है.”

मोहनन ने आगे कहा कि उन्हें अपनी नौकरी छोड़ने का कोई पछतावा नहीं है और वह सेवानिवृत्ति के बाद गांव में बसने के लिए तैयार हैं.

 

 

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